रायसेन के किसानों का कमाल! मात्र 200 रुपये के बीज से चिया सीड की खेती कर कमा रहे हैं लाखों रुपये
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ 'चिया सीड' की खेती से लाखों का मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। जानिए इसकी पूरी सफलता की कहानी।
रायसेन । मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के किसान अब परंपरागत गेहूं-चने की खेती और मौसम की अनिश्चितताओं के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर नई और आधुनिक फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के इस दौर में 'चिया सीड' (Chia Seeds) की खेती यहां के मध्यम और लघु किसानों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है। न्यूनतम लागत, रासायनिक खादों से मुक्ति और बाजार में इस सुपरफूड की भारी मांग के चलते किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ रही है।
📈 200 रुपए के बीज से मिला लगभग 2 लाख रुपये तक का शानदार रिटर्न
बेगमगंज तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम सुनेहरा के प्रगतिशील किसान गोविंद सिंह लोधी और उनके साथी कृष्ण मुरारी पिछले दो वर्षों से चिया सीड की सफल खेती कर पूरे इलाके में एक मिसाल पेश कर रहे हैं।
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पारंपरिक खेती से अनुभव: गोविंद सिंह बताते हैं कि पहले वे गेहूं और चने जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे। इसके बाद उन्होंने औषधीय खेती के रूप में अश्वगंधा की शुरुआत की, लेकिन उसमें प्रति एकड़ लगभग 50,000 रुपए की भारी लागत आती थी और मौसम की जरा सी मार पड़ने पर भारी नुकसान उठाना पड़ता था।
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चिया सीड का ट्रायल: उद्यानिकी विभाग की सलाह पर उन्होंने रबी सीजन में ट्रायल के तौर पर महज 1 किलो चिया सीड का बीज 200 रुपए में खरीदा और एक एकड़ जमीन में इसकी बुवाई की। बीज, जुताई और निराई-गुड़ाई मिलाकर कुल खर्च करीब ₹5,000 प्रति एकड़ आया।
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बंपर उत्पादन और कमाई: इस एक एकड़ से उन्हें 5.5 क्विंटल (साढ़े पांच क्विंटल) का बंपर उत्पादन प्राप्त हुआ। नीमच मंडी में उनकी यह उपज 19,500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी। इस तरह उन्हें एक एकड़ से कुल ₹1,07,250 की सकल आय (मौसम व सीजन के अनुसार 1.5 लाख से ₹1.9 लाख तक का शुद्ध मुनाफा) प्राप्त हुई।
🚫 कम खर्च, बिना खाद-कीटनाशक और सुरक्षित है सुपरफूड की यह खेती
इस शानदार मुनाफे से उत्साहित होकर गोविंद सिंह ने इस वर्ष अपने 5 एकड़ रकबे में चिया सीड की बुवाई की है। गांव के ही दूसरे किसान कृष्ण मुरारी का अनुभव भी बेहद सकारात्मक रहा है।
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बिना खाद-कीटनाशक के खेती: चिया सीड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बेहद कम खर्चीली और सुरक्षित फसल है। इसमें किसी भी महंगे रासायनिक खाद (यूरिया/डीएपी) या जहरीले कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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आवारा पशुओं से सुरक्षा: चिया की पत्तियों में तेज गंध वाले प्राकृतिक तेल होते हैं, जिसके कारण मवेशी और नीलगाय इसे नहीं खाते हैं। यदि मौसम बदलने पर रसचूसक कीटों का हल्का असर दिखाई भी दे, तो किसान नीम के तेल या घर पर तैयार जैविक काढ़े का छिड़काव कर इसे आसानी से नियंत्रित कर लेते हैं।
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बढ़ता दायरा: शुरुआती दौर में जहां केवल 4 से 5 एकड़ में इसकी बुवाई होती थी, वहीं आज अकेले बेगमगंज क्षेत्र में इसका रकबा बढ़कर 55 एकड़ के पार पहुंच चुका है।
👩🌾 उद्यानिकी विभाग का सहयोग: कम लागत में अधिक मुनाफा दे रही औषधीय फसलें
उप संचालक उद्यानिकी विभाग नीलम पाटिल ने जानकारी देते हुए बताया कि बेगमगंज क्षेत्र में लगभग 20-25 किसानों द्वारा औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती की जा रही है, जिसमें प्रमुख रूप से अश्वगंधा और चिया सीड्स शामिल हैं।
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लागत और उत्पादन: उन्होंने बताया कि किसान मुख्य रूप से चिया सीड्स की खेती कर रहे हैं, जिसमें प्रति हेक्टेयर लगभग 25 हजार रुपए की लागत आती है और प्रति हेक्टेयर 14 क्विंटल तक का शानदार उत्पादन मिलता है। अन्य उद्यानिकी फसलों की तुलना में इसमें लागत कम और किसानों का फायदा कई गुना अधिक होता है।
🌍 ग्लोबल मार्केट में सुपरफूड चिया सीड की भारी मांग
चिया सीड (वैज्ञानिक नाम: Salvia hispanica) को पूरी दुनिया में एक बेहतरीन 'सुपरफूड' माना जाता है।
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पोषण से भरपूर: इसमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो हृदय स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
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स्वास्थ्य लाभ: इसमें मौजूद डाइट्री फाइबर और प्रोटीन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं, वजन घटाने में मदद करते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स हड्डियों की मजबूती और एंटी-एजिंग के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं।
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