कुपोषण प्रभावित श्योपुर जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों का बुरा हाल, सहायिका के भरोसे चल रहे हैं केंद्र
श्योपुर के कराहल विकासखंड में आंगनवाड़ी केंद्र महीनों से बंद मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने लापरवाह कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी किया है।
श्योपुर । एक तरफ जहाँ मध्य प्रदेश सरकार कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं धरातल पर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। कुपोषण से जूझ रहे श्योपुर जिले के कराहल विकासखंड में आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहे हैं।
दौलतपुर और कुराचोर खुर्द गांव के आंगनवाड़ी केंद्रों पर पिछले कई महीनों से ताले लटक रहे हैं और जिम्मेदार कार्यकर्ता अपनी ड्यूटी से लगातार नदारद मिल रही हैं। इस बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए नोटिस जारी किया है।
👩🍳 सहायिका के भरोसे चल रहा केंद्र: दो साल से ड्यूटी पर नहीं आई शगुन आदिवासी
दौलतपुर गांव की आंगनवाड़ी सहायिका नारायणी बाई आदिवासी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शगुन आदिवासी कराहल में ही किराये का मकान लेकर रहती हैं और कभी केंद्र पर नहीं आतीं।
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लगातार अनुपस्थिति: सहायिका का कहना है कि उन्होंने कई बार कार्यकर्ता से केंद्र पर समय से आने का आग्रह किया है, लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से कार्यकर्ता केंद्र का मुंह तक देखने नहीं आई हैं।
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कुराचोर खुर्द का हाल: वहीं, कुराचोर खुर्द गांव में भी आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। यहाँ की सहायिका गणेशी के पति बीरबल आदिवासी ने बताया कि कार्यकर्ता पोहरी में रहती हैं और किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं आ पाई होंगी, जबकि उनकी खुद की पत्नी की तबीयत भी खराब चल रही है।
🔍 सुपरवाइजर के औचक निरीक्षण में हुआ खुलासा, बाल विकास परियोजना अधिकारी ने दिए कड़े निर्देश
सेसईपुरा के सुपरवाइजर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था।
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नदारद मिलीं कार्यकर्ता: निरीक्षण के दौरान दौलतपुर की कार्यकर्ता शगुन आदिवासी मौके से पूरी तरह नदारद पाई गईं। इसकी आधिकारिक रिपोर्ट बाल विकास परियोजना अधिकारी को सौंप दी गई है। कुराचोर खुर्द के मामले में भी स्थिति की जांच कर नोटिस जारी किया गया है।
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विभाग का पक्ष: महिला एवं बाल विकास विभाग के कराहल परियोजना अधिकारी निटिन मित्तल ने बताया कि मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए संबंधित लापरवाह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
श्योपुर जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में जहाँ कुपोषण को मात देना सबसे बड़ी प्राथमिकता है, ऐसे में आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताले लटकना और जिम्मेदारों का नदारद रहना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
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