एमपी के 149 टोल प्लाजा भोपाल मुख्यालय से होंगे कनेक्ट! सर्वर-नेटवर्क बहानेबाजी और अवैध वसूली पर लगेगी रोक

मध्य प्रदेश के 149 टोल प्लाजा को भोपाल मुख्यालय से डिजिटल MPLS नेटवर्क के जरिए जोड़ा जा रहा है। इससे सर्वर बहानेबाजी, नेटवर्क डाउन और अवैध वसूली पर रोक लगेगी।

Oct 29, 2026 - 19:52
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एमपी के 149 टोल प्लाजा भोपाल मुख्यालय से होंगे कनेक्ट! सर्वर-नेटवर्क बहानेबाजी और अवैध वसूली पर लगेगी रोक

सागर / भोपाल । प्रदेश भर के टोल प्लाजा पर आए दिन वाहन चालकों और टोल कर्मचारियों के बीच विवाद के मामले सामने आते रहते हैं। कभी सर्वर डाउन होने का बहाना तो कभी तकनीकी खराबी और नेटवर्क न मिलने की बात कहकर अवैध तरीके से वसूली की शिकायतें मिलती हैं।

फास्टैग (FASTag) व्यवस्था लागू होने के बावजूद इस तरह की मनमानी से वाहन चालकों को निजात नहीं मिल पा रही थी। इसी स्थिति से निपटने और टोल टैक्स कलेक्शन में पारदर्शिता लाने के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख 149 टोल प्लाजा को एक एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिसकी सीधी निगरानी राजधानी भोपाल स्थित मुख्यालय से होगी।

📡 मैनेज्ड MPLS नेटवर्क से जुड़ेंगे टोल प्लाजा; रियल टाइम में होगी मॉनिटरिंग

एमपीआरडीसी ने प्रदेश के 149 टोल प्लाजा को भोपाल मुख्यालय से मैनेज्ड मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग (Managed MPLS) नेटवर्क के जरिए जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए ₹3.81 करोड़ की लागत का टेंडर जारी किया गया है।

  • तुरंत मिलेगी सूचना: मैनेज्ड एमपीएलएस तकनीक लागू होने के बाद भोपाल मुख्यालय से हर टोल प्लाजा की रियल टाइम (Real Time) निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी भी टोल प्लाजा पर नेटवर्क डाउन होता है, कनेक्टिविटी बाधित होती है, डेटा ट्रांसफर में गड़बड़ी आती है या बैंडविड्थ कम मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत मुख्यालय तक पहुंच जाएगी।

  • सुरक्षित और निजी नेटवर्क: मैनेज्ड एमपीएलएस एक विशेष दूरसंचार सेवा है, जिसके जरिए निजी वाइड एरिया नेटवर्क (WAN) का उपयोग करके केंद्रों को आपस में जोड़ा जाता है। यह आम इंटरनेट के जोखिमों से परे बेहद सुरक्षित, निजी और हाई-स्पीड नेटवर्क होता है, जिससे वॉयस कॉल (VoIP) और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बिना किसी रुकावट के चलती है।

📊 पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों का होगा त्वरित समाधान; भोपाल बनेगा डिजिटल हब

इस नई तकनीक के लागू होने से टोल प्लाजा के संचालन में पारदर्शिता आएगी और विवादों की स्थिति समाप्त होगी:

  • केंद्रीकृत नियंत्रण: एमपीएलएस नेटवर्क से जुड़ने के बाद भोपाल स्थित मुख्यालय एक 'हाई-स्पीड नेटवर्क हब' के रूप में कार्य करेगा।

  • कलेक्शन पर नजर: टोल टैक्स के कुल कलेक्शन, वाहनों की आवाजाही और तकनीकी समस्याओं की निगरानी मुख्यालय में बैठे अधिकारी सीधे कर सकेंगे। इससे टोल ऑपरेटर किसी भी तरह की गलत जानकारी या नेटवर्क बहानेबाज़ी का सहारा नहीं ले सकेंगे।

  • संभागवार चयन: एमपीआरडीसी द्वारा इस योजना के लिए संभागवार टोल प्लाजा का चयन किया गया है, ताकि पूरे प्रदेश का नेटवर्क एक समान ढाँचे में कवर हो सके।

💬 शिकायतों को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए उठाया कदम: PWD मंत्री राकेश सिंह

मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री राकेश सिंह ने इस महत्वपूर्ण पहल की जानकारी देते हुए कहा:

"टोल प्लाजा को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती हैं और कई बार विवाद की स्थिति बनती है। यह शिकायतें भी बड़े पैमाने पर आती हैं कि सर्वर और नेटवर्क इश्यू बताकर टोल प्लाजा पर मनमानी वसूली की जाती है। इस तरह की शिकायतों को रोकने और टोल प्रबंधन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एमपीआरडीसी प्रदेश के 149 प्रमुख टोल प्लाजा को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने जा रहा है। इससे कामकाज में पूरी पारदर्शिता आएगी और नियमित रूप से टोल कलेक्शन की निगरानी होती रहेगी, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं और सरकार दोनों को मिलेगा।"

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