त्योहारों में मिठाइयों पर लगा 'चांदी का वर्क' असली है या नकली? 3 आसान तरीकों से घर पर करें पहचान
त्योहारों में मिठाइयों पर लगे चांदी के वर्क की शुद्धता को लेकर उठे सवाल। जबलपुर FSSAI अधिकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताए इसके नियम, सेहत पर असर और पहचान के आसान तरीके।
जबलपुर । त्योहारों के पावन अवसर पर बाजारों में तरह-तरह की मिठाइयों की मांग और क्रेज काफी बढ़ जाता है। विशेष रूप से काजू कतली, घेवर और महंगी मिठाइयों को आकर्षक व शाही लुक देने के लिए उन पर चमकदार चांदी का वर्क लगाया जाता है। देखने में बेहद सुंदर लगने वाली ये मिठाइयां ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित तो करती हैं, लेकिन इनकी शुद्धता और इसमें इस्तेमाल होने वाली धातु को लेकर लगातार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं।
चांदी की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद इस बात की आशंका और बढ़ गई है कि सस्ती मिठाइयों पर असली चांदी की जगह एल्युमिनियम, कैडमियम या अन्य हानिकारक धातुओं की मिलावट वाला नकली वर्क इस्तेमाल किया जा रहा है।
📜 मुगलकाल से चली आ रही है चांदी वर्क की परंपरा; 99.99% शुद्ध चांदी ही खाने योग्य
खाद्य पदार्थों पर चांदी की बेहद महीन परत लगाने का इतिहास काफी पुराना माना जाता है:
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: माना जाता है कि मध्यकाल में मुगल साम्राज्य के शाही रसोइयों ने व्यंजनों व मिठाइयों को दर्शनीय बनाने के लिए चांदी की पतली परतों का प्रयोग शुरू किया था। उत्तर प्रदेश के कुछ विशेष क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक रूप से हथौड़ों से पीटकर वर्क तैयार किया जाता है, हालांकि अब इसमें अत्याधुनिक मशीनों का भी प्रयोग होने लगा है।
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FSSAI के कड़े मानक: जबलपुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) अमित गुप्ता के अनुसार, "भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्पष्ट मानक तय किए हैं। खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाला वर्क कम से कम 99.99 प्रतिशत शुद्ध चांदी से निर्मित होना चाहिए। इसमें एल्युमिनियम या कैडमियम जैसी धातुओं का सम्मिश्रण गैर-कानूनी है।"
🩺 स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: 'शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व नहीं है चांदी, ज्यादा सेवन से बचें'
एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. परिमल स्वामी और स्वास्थ्य शोधकर्ताओं के अनुसार, चांदी मानव शरीर के लिए कोई आवश्यक पोषण घटक नहीं है:
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पोषक मूल्य शून्य: जिस तरह शरीर को आयरन, कैल्शियम या विटामिन्स की जरूरत होती है, वैसी चांदी की कोई जैविक आवश्यकता नहीं होती।
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भारी धातुओं का असर: शरीर पर हैवी मेटल्स (Heavy Metals) के लगातार संचय से पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन मौजूद हैं। हालांकि आयुर्वेद में विशेष शोधन प्रक्रिया से बनी 'चांदी भस्म' का चिकित्सीय उपयोग होता है, परंतु उसे सामान्य बाजार की मिठाइयों पर लगे वर्क से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। विश्व के कई देशों में खाद्य पदार्थों पर धात्विक वर्क के इस्तेमाल पर पाबंदी भी है।
🔍 घर पर कैसे करें असली और नकली (एल्युमिनियम) चांदी वर्क की पहचान?
यदि आप त्योहारों पर चांदी वर्क लगी मिठाइयां खरीद रहे हैं, तो इन 3 आसान घरेलू तरीकों से उसकी सत्यता जांच सकते हैं:
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उंगलियों से रगड़कर देखें: मिठाइयां खरीदते समय थोड़े से वर्क को अपनी उंगलियों के बीच रगड़ें। यदि वर्क पूरी तरह अदृश्य या गायब हो जाता है, तो वह असली चांदी है। यदि वह उंगलियों पर चिपका रह जाए या काला-ग्रे धब्बा छोड़े, तो उसमें एल्युमिनियम की मिलावट है।
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जलाकर जांचें (Flame Test): वर्क के छोटे से टुकड़े को अग्नि के संपर्क में लाएं या जलाकर देखें। असली चांदी का वर्क जलने पर एक नन्ही सी गेंद (Ball) जैसी आकृति में सिमट जाता है, जबकि नकली या एल्युमिनियम युक्त वर्क जलकर तुरंत राख बन जाता है और काला पड़ने लगता है।
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बनावट और मोटाई (Texture): असली चांदी का वर्क बहुत ज्यादा बारीक, मुलायम और छूने में अत्यंत हल्का होता है, जबकि एल्युमिनियम या मिलावटी वर्क तुलनात्मक रूप से मोटा, कड़ा और खुरदरा महसूस होता है।
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