मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की खुली पोल; शिविर में कुर्सियां रहीं खाली, अधिकारी समेटकर भागे बोरिया-बिस्तर
रतलाम में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के शिविर से जनता और अधिकांश विभागों के अधिकारी गायब मिले। कलेक्टर के जाने के बाद अधिकारियों ने बोरिया-बिस्तर समेट लिया।
रतलाम । प्रदेश की आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण और प्रशासनिक अमले को सीधे फील्ड में उतारने के उद्देश्य से शुरू किए गए 'मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान' की पोल रतलाम में आयोजित शिविर के दौरान खुल गई। प्रत्येक शुक्रवार को लगने वाले इस अभियान के तहत रतलाम शहर में शिविर का आयोजन किया गया था, लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार के दावों के विपरीत इस कार्यक्रम से आम जनता पूरी तरह नदारद नजर आई। सुबह 11:00 बजे कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इसकी शुरुआत तो हुई, लेकिन इसके बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
🚪 कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों के निकलते ही गायब हुए अधिकारी-कर्मचारी
नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री जन विश्वास का यह शिविर शाम 4:00 बजे तक आयोजित होना था, जिसमें विभिन्न विभागों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की गई थी:
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अधिकारियों की गैर-मौजूदगी: जैसे ही कलेक्टर और जनप्रतिनिधि फील्ड के अन्य दौरों के लिए रवाना हुए, बिजली, स्वास्थ्य, नगर निगम और महिला बाल विकास विभागों को छोड़कर बाकी तमाम विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने बैनर-पोस्टर और बोरिया-बिस्तर समेटकर वहां से गायब हो गए।
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सन्नाटा पसरा: दिनभर इस शिविर में अपनी समस्याओं के समाधान की आस लेकर पहुंचने वाले लोगों की संख्या बेहद कम यानी गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रह गई।
🔍 दोपहर 1:30 बजे का रियलिटी चेक; विभागों की उदासीनता आई सामने
जब इस कार्यक्रम का जमीनी स्तर पर रियलिटी चेक किया गया, तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली मिली:
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न जनता थी, न अधिकारी: दोपहर करीब 1:30 बजे जब शिविर का जायजा लिया गया, तो वहां न तो फरियाद लेकर आने वाली जनता थी और न ही उनकी समस्याएं सुनने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अमला मौजूद था।
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चुनिंदा विभाग ही आए नजर: मौके पर केवल नगर निगम, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य, उद्योग और बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी ही नजर आए, जबकि अभियान का समय शाम 4 बजे तक का था।
🗣️ जिम्मेदारों की प्रतिक्रिया और अभियान की गंभीरता पर सवाल
इस पूरे मामले पर जब नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "नगर निगम के कर्मचारी निर्धारित समय के दौरान शिविर में पूरी तरह मौजूद रहे हैं। बाकी अन्य विभागों की उपस्थिति या उनकी अनुपस्थिति के बारे में हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।"
बहरहाल, मुख्यमंत्री के इस अति महत्वपूर्ण जन विश्वास अभियान के शिविर में आम जनता के न पहुंचने और प्रशासनिक मुखियाओं के जाने के बाद विभागों के इस तरह मनमाने तरीके से गायब हो जाने से यह साफ हो गया है कि जनता के प्रति अधिकारी कितने गंभीर हैं।
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