एमपी सरकार ने खत्म किए 900 से ज्यादा अनुपयोगी कानून; मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गिनाई उपलब्धियां
जबलपुर में आयोजित मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे के सम्मान समारोह में सीएम मोहन यादव शामिल हुए। कार्यक्रम में न्यायपालिका और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा की गई।
जबलपुर । न्यायधानी जबलपुर के महाधिवक्ता कार्यालय में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे के सम्मान में एक गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने न्यायपालिका, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की सर्वोच्च भूमिका पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
📜 "हमारी सरकार ने समाप्त किए 900 से अधिक अनुपयोगी कानून"; विपक्ष पर साधा निशाना
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य सरकार की प्रशासनिक सुधारों की उपलब्धियों का जिक्र किया:
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कानूनों का सरलीकरण: मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के गठन के बाद से प्रदेश में 900 से अधिक पुराने और अनुपयोगी कानूनों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अप्रसांगिक कानूनों को हटाकर आम जनता के लिए शासन व्यवस्था को और अधिक सरल व सुगम बनाना है।
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विपक्ष पर तंज: इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि "कुछ लोगों को आज भी यह तक पता नहीं होता कि ज्ञापन कहां सौंपा जाता है और कोर्ट में याचिका कहां दायर की जाती है।"
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लोकतंत्र और न्यायपालिका: देश के पड़ोसी राष्ट्रों की लोकतांत्रिक परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जगहों पर लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियां आई हैं, लेकिन भारत में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने में हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका ने हमेशा से एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
🤝 "लोकतंत्र के सभी स्तंभों का अंतिम उद्देश्य एक—संविधान की रक्षा": चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशासन और लोकतंत्र के अलग-अलग अंगों की कार्यप्रणाली भले ही भिन्न हो, लेकिन सभी का मूल उद्देश्य एक ही होता है:
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संविधान और अधिकारों की सुरक्षा: उन्होंने कहा कि देश के संविधान की रक्षा करना, नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित रखना और समाज के प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी भय या पक्षपात के निष्पक्ष न्याय दिलाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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बार और बेंच का तालमेल: चीफ जस्टिस ने इस बात पर जोर दिया कि बार (वकीलों) और बेंच (न्यायाधीशों) के बीच के संबंध हमेशा आपसी सम्मान, संस्थागत स्वतंत्रता, पेशेवर ईमानदारी और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर टिके होने चाहिए। विचारों में भिन्नता या मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संविधान की रक्षा हमारा परम और साझा उद्देश्य होना चाहिए।
👥 दिग्गज न्यायविदों और अधिवक्ताओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से आयोजित इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के तमाम सम्मानित न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता कार्यालय के अधिकारी तथा स्टेट बार कौंसिल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एवं जिला बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता व पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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