छतरपुर लोकल न्यूज़: जलविहार मेले में उमड़ी भीड़, सीएमओ और नगरपालिका अध्यक्ष ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
छतरपुर के ऐतिहासिक जलविहार मेले की शुरुआत राजा-महाराजाओं के समय से हुई थी। जानिए बुंदेली राई नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इस भव्य मेले का पूरा इतिहास।
छतरपुर जिले में दीवाली के पहले उत्सव शुरू होकर दीवाली के बाद तक चलने की एक पुरानी और समृद्ध परंपरा है, जिसकी शुरुआत ऐतिहासिक मेला जलविहार से होती है। यह मेला सिर्फ मनोरंजन का केंद्र भर नहीं है, बल्कि यह पूरे बुंदेलखंड की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और लोक विरासत की अनूठी पहचान भी है। सैकड़ों साल पहले राजे-रजवाड़ों के दौर में शुरू हुई मेले की यह भव्य परंपरा आज भी पूरी शान-ओ-शौकत के साथ जीवित है। छतरपुर के मेला ग्राउंड में इस वर्ष भी जलविहार मेले का आयोजन किया गया है, जहाँ देश के दूर-दूर से दुकानदार पहुंचे हैं और विशाल झूले, आकर्षक दुकानें व सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। समय और दौर बदला, लेकिन जलविहार मेले की रौनक और जनता का उत्साह आज भी जस का तस बरकरार है।
👑 प्रजा को खुश करने के लिए राजा-महाराजाओं ने शुरू की थी 'जलविहार' की परंपरा
इतिहास के पन्नों से जुड़ी इस अनूठी परंपरा की शुरुआत:
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शाही दौर की शुरुआत: छतरपुर रियासत के महाराज अपनी प्रजा को प्रसन्न करने और उन्हें मनोरंजन का अवसर देने के लिए महल परिसर में मेला जलविहार का भव्य आयोजन करवाते थे।
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अंग्रेजों के काल में भी जारी: यह ऐतिहासिक परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान भी निर्बाध रूप से जारी रही, जो आज छतरपुर की सांस्कृतिक थाती बन चुकी है।
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नगर पालिका का जिम्मा: वर्तमान समय में इस पुरानी परंपरा को छतरपुर नगर पालिका द्वारा पूरी भव्यता के साथ निभाया जा रहा है, और शहरवासियों के लिए नगर पालिका की ओर से बड़े पैमाने पर मेला जलविहार का आयोजन किया जाता है।
✨ दौरान-ए-मेला: सीएमओ और अध्यक्ष ने लिया जायजा, कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां
उत्सव और प्रशासनिक सक्रियता का सुंदर तालमेल:
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रात के रंगारंग कार्यक्रम: इस ऐतिहासिक मेले में प्रतिदिन रात्रि के समय बाहर से पधारे जाने-माने कलाकार अपनी अद्भुत और अलौकिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह रहे हैं।
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अधिकारियों का उत्साह: दिन के समय नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति सुरेंद्र चौरसिया और सीएमओ माधुरी शर्मा ने अपने पूरे स्टाफ के साथ मेला स्थल का औचक निरीक्षण किया। जनता और दुकानदारों का उत्साहवर्धन करने के लिए सीएमओ व अध्यक्ष ने खुद झूला झूला और रात के समय बुंदेली राई का जमकर आनंद उठाया।
🎶 बुंदेलखंड का प्रसिद्ध लोक नृत्य 'राई': लोक संगीत से गूंजा नगरपालिका प्रांगण
मेले के मुख्य आकर्षण का विशेष पड़ाव:
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छह नृत्यांगनाओं की प्रस्तुति: आयोजन के छठे दिन बुंदेलखंड के सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य राई का भव्य आयोजन किया गया। मंच पर छह प्रसिद्ध नृत्यांगनाओं ने अपनी शानदार और ऊर्जावान प्रस्तुतियां दीं।
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दर्शक दीर्घा का उत्साह: बुंदेली लोक राई नृत्य की एक झलक पाने और उसका आनंद लेने के लिए देर रात तक भारी भीड़ जमी रही। दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बढ़ता रहा और पूरा प्रांगण लोक संगीत के सुरों से सराबोर हो गया।
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सम्मान समारोह: अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया तथा प्रसिद्ध लोक गायक जित्तू खरे 'बादल' और उनके सहयोगियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
🗣️ क्या कहती हैं नगर पालिका अध्यक्ष?
मेले के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति सुरेंद्र चौरसिया ने बताया:
"जलविहार मेले की यह परंपरा राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही है। इस आयोजन की शुरुआत राजा भवानी सिंह द्वारा महल परिसर में जनता को खुश करने और मनोरंजन उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। समय के साथ मेले में आने वाले लोगों की संख्या में भारी इजाफा होता गया, जिसके चलते इसका दायरा भी बड़ा होता चला गया। अब इस ऐतिहासिक आयोजन की जिम्मेदारी नगर पालिका निभाती है, जिसमें रंगारंग कार्यक्रमों के माध्यम से बुंदेली संस्कृति, कला और समाज के हर वर्ग के लोगों की रुचि का विशेष ध्यान रखा जाता है।"
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