विदिशा न्यूज़: चाइनीज लाइटों पर भारी पड़े माटी के दीये; 30-35 हजार दीयों के थोक ऑर्डर से रोशन होगी कुम्हारों की दीवाली

विदिशा में इस दीपावली 1 से 2 करोड़ मिट्टी के दीयों की खपत का अनुमान है। बढ़ती महंगाई के बावजूद स्थानीय कुम्हारों को इस साल अच्छे मुनाफे की बड़ी उम्मीद है।

Nov 02, 2026 - 15:40
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विदिशा न्यूज़: चाइनीज लाइटों पर भारी पड़े माटी के दीये; 30-35 हजार दीयों के थोक ऑर्डर से रोशन होगी कुम्हारों की दीवाली

प्रकाश का पावन पर्व दीपावली जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बिशप शहर विदिशा में मिट्टी के दीयों का बाजार भी पूरी तरह से गरमाने लगा है। आधुनिकता और चकाचौंध भरी चाइनीज लाइटों के दौर के बावजूद, इस वर्ष भी शुद्ध पारंपरिक मिट्टी के दीयों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है। विदिशा में दीपावली के इस त्योहारी सीजन में स्थानीय कुम्हार और शिल्पकार पारंपरिक मिट्टी के दीये तैयार करने में दिन-रात पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। अनुमान के मुताबिक, अकेले पूरे विदिशा क्षेत्र में इस बार दीपावली पर लगभग 1 से 2 करोड़ मिट्टी के दीयों की कुल खपत होने की संभावना जताई जा रही है।

✋ पीढ़ियों पुरानी समृद्ध परंपरा: 30-35 वर्षों से चाक पर माटी गढ़ रहे हैं कारीगर

पुश्तैनी हुनर को सहेज रहे कारीगरों की दास्तान:

  • वीरसिंह प्रजापति की कहानी: स्थानीय कुशल कारीगर वीरसिंह प्रजापति बताते हैं कि यह उनका पीढ़ियों पुराना पैतृक कार्य है, जो निरंतर चला आ रहा है। पहले उनके पिता यह कार्य करते थे और अब वे खुद पिछले 30 से 35 सालों से चाक पर लगातार दीये, मटके और करवा गढ़ने का काम कर रहे हैं।

  • 35 हजार का बड़ा ऑर्डर: उन्होंने बताया कि इस दीपावली पर उन्हें अकेले ही 30 से 35 हजार दीयों का बड़ा थोक ऑर्डर मिला है। एक हुनरमंद कारीगर दिन भर में लगभग 1,500 से लेकर 2,000 दीये केवल अपने हाथों से चाक पर तैयार कर लेता है।

  • अनुज प्रजापति का अनुभव: वहीं, युवा कारीगर अनुज प्रजापति ने बताया कि त्योहार शुरू होने से दो-तीन महीने पहले से ही मिट्टी के दीये बनाने का सिलसिला आरंभ हो जाता है। वे लगभग 20 हजार दीये तैयार कर रहे हैं, जिन्हें थोक के साथ-साथ शहर के विभिन्न बाजारों और इलाकों में ठेले लगाकर बेचा जाता है। विदिशा के स्थानीय इलाकों के अलावा आसपास की तहसीलों और गांवों से भी लोग यहाँ दीये खरीदने पहुँच रहे हैं।

💸 दीयों की बंपर मांग के बीच महंगाई की मार: मिट्टी, लकड़ी और कंडे हुए बेहद महंगे

लागत में हुए भारी इजाफे से परेशान कुम्हार समाज:

  • महंगी मिट्टी: हालांकि दीयों की बंपर मांग के बीच कारीगरों के सामने महंगाई एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। कारीगरों के अनुसार, दीये बनाने के लिए आवश्यक चिकनी मिट्टी अब बहुत महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है, जो करीब ₹3,000 से ₹4,000 प्रति ट्रॉली तक मिल रही है।

  • ईंधन का खर्च: इसके अलावा दीयों को पकाने के लिए उपयोग में आने वाली लकड़ी, कंडे और भूसा भी काफी महंगे हो चुके हैं। अकेले लकड़ी की कीमत ही लगभग ₹700 से ₹800 प्रति क्विंटल तक पहुँच गई है।

🪙 बाजार में क्या चल रहे हैं थोक व खुदरा भाव? जानिए कारीगरों की उम्मीदें

कीमतों का समीकरण और कुम्हारों का उत्साह:

  • थोक और फुटकर भाव: बढ़ती लागत के चलते इस बार दीयों के दामों में भी थोड़ा असर पड़ा है। थोक बाजार में दीयों का भाव ₹800 प्रति हजार के करीब चल रहा है। वहीं फुटकर बाजार में कारीगरों को ₹2 का एक दीया या ₹30 के 16 दीये बेचने की उम्मीद है।

  • हस्तनिर्मित दीयों का जादू: कारीगरों का कहना है कि वे पारंपरिक तरीके से ही दीये बनाते हैं, क्योंकि उनके पास आधुनिक डिजाइनिंग के मशीनी सांचे उपलब्ध नहीं हैं; वे केवल चाक के जरिए विशुद्ध हस्तनिर्मित दीये ही तैयार करते हैं।

  • मुनाफे की उम्मीद: तमाम महंगाई और संघर्ष के बावजूद लोगों में माटी के दीयों के प्रति यह अपार उत्साह देखकर कुम्हारों को इस साल अच्छे मुनाफे और खुशहाल दीवाली की पूरी उम्मीद है।

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