उज्जैन समाचार: संस्कृत श्लोकों और चित्रों में सहेजी श्रीकृष्ण की अनमोल धरोहरें होंगी ऑनलाइन, देखिए पूरी योजना
मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और अनमोल पांडुलिपियों पर केंद्रित डिजिटल ज्ञानकोष तैयार कर रही है। अब नई पीढ़ी आसानी से श्रीकृष्ण की लीलाएं जान सकेगी।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाएं, उनका युग-युगीन जीवन दर्शन और गीता के महान उपदेश सदियों से दुर्लभ पांडुलिपियों (Manuscripts) के पन्नों पर सहेजे जाते रहे हैं। कहीं संस्कृत के दिव्य श्लोकों में उनके जन्मोत्सव और बाल लीलाओं का मनमोहक वर्णन है, तो कहीं स्वर्ण और रजत (सोने-चांदी) के प्राकृतिक रंगों से उकेरे गए चित्रों में उनके जीवन के विभिन्न प्रसंगों को सजीव रूप दिया गया है।
अब ये दुर्लभ और अनमोल ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुस्तकालयों, अभिलेखागारों और शोध संस्थानों की अलमारियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डिजिटल माध्यमों से देश और दुनिया की नई पीढ़ी तक सीधे पहुँचेंगी।
💻 मध्य प्रदेश सरकार तैयार कर रही है डिजिटल ज्ञानकोष (Digital Repository); ऑनलाइन देख सकेंगे दुर्लभ चित्र और ग्रंथ
डिजिटल ज्ञानकोष की मुख्य विशेषताएं:
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डिजिटल ज्ञानकोष का निर्माण: मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण के समग्र जीवन, दर्शन, कला और विचारों पर केंद्रित एक भव्य डिजिटल ज्ञानकोष (Digital Repository) तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
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दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण: इस विशेष परियोजना के तहत विभिन्न शोध संस्थानों, संदीपनि आश्रम और धार्मिक केंद्रों में रखी प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण (Digitalization) किया जाएगा।
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वैश्विक पहुंच: इस पहल के माध्यम से शोधार्थियों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर श्रीकृष्ण से जुड़े प्रामाणिक संस्कृत श्लोक, चित्र कथाएं और दार्शनिक ग्रंथ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
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