क्या है कटनी के कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का पूरा मामला? जानिए हाईकोर्ट की इस बड़ी कार्रवाई का सच
कटनी के कैमोर में एस्बेस्टस औद्योगिक कचरे और स्वास्थ्य संकट को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। 10 लाख टन दूषित कचरे का है अनुमान।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कैमोर में दशकों से जमा एस्बेस्टस (Asbestos) औद्योगिक कचरे और उससे उत्पन्न हुए गंभीर स्वास्थ्य संकट को लेकर दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई है। जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार सहित सभी संबंधित पक्षकारों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
⚠️ 10 लाख टन एस्बेस्टस दूषित कचरे का अनुमान; हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
याचिका के मुख्य बिंदु और तथ्य:
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याचिकाकर्ता: यह जनहित याचिका समाजसेवी आशुतोष दीक्षित मनु और कैमोर निवासी गणेश राव की तरफ से हाई कोर्ट में दायर की गई है।
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इतिहास और कचरा: याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1934 में कैमोर में एस्बेस्टस फैक्ट्री स्थापित की गई थी, जिसके औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Waste) का वर्षों तक आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में खुले तौर पर निस्तारण किया गया।
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रिपोर्ट का खुलासा: याचिका में एक आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि क्षेत्र में लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस दूषित सतही मिट्टी होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 5.65 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र गंभीर रूप से प्रदूषित है, जिसके संपर्क में आने से हजारों स्थानीय नागरिकों की जान खतरे में है और लोग विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
🩺 एस्बेस्टस के सूक्ष्म रेशों से फेफड़ों का कैंसर और मेसोथेलियोमा जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका
चिकित्सा रिपोर्ट और मांगी गई राहत:
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जानलेवा बीमारियां: हाईकोर्ट को अवगत कराया गया कि एस्बेस्टस के सूक्ष्म और खतरनाक रेशों के संपर्क में आने से एस्बेस्टोसिस (Asbestosis), फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) और मेसोथेलियोमा (Mesothelioma) जैसी लाइलाज और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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मेडिकल रिकार्ड्स का हवाला: याचिका में वर्ष 2013 से आयोजित विभिन्न चिकित्सा शिविरों, जांच रिपोर्टों और सैकड़ों प्रभावित मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
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प्रमुख मांगें: अदालत से आग्रह किया गया है कि प्रभावित क्षेत्र की मिट्टी और हवा के नमूनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच (Independent Scientific Investigation) कराई जाए। इसके साथ ही, प्रभावित नागरिकों और पूर्व कर्मचारियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार, पुनर्वास तथा नियमानुसार मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
🔄 फैक्ट्री स्वामित्व में बदलाव और सुरक्षित निस्तारण की कार्ययोजना की मांग
पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और जवाबदेही:
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जिम्मेदारियों का निर्धारण: याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि समय के साथ फैक्ट्री के स्वामित्व में हुए बदलावों (Ownership Changes) को देखते हुए वर्तमान स्वामित्व वाली कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियां तय की जाएं।
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समयबद्ध कार्ययोजना: इसके अलावा, इस जहरीले और दूषित कचरे के सुरक्षित वैज्ञानिक निस्तारण तथा पर्यावरणीय पुनर्स्थापन (Environmental Restoration) के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।
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