कचरे के ढेर से ऐसे बन रहा हरा-भरा कृत्रिम जंगल, नेशनल ग्रीन एयर प्रोग्राम के तहत हो रहा तैयार

ग्वालियर के बरा गांव में डंपिंग यार्ड की जगह बन रहा सिटी फॉरेस्ट। फरवरी 2027 तक आम जनता के लिए खुलेगा कृत्रिम जंगल। पूरी खबर पढ़ें।

Nov 07, 2026 - 13:38
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कचरे के ढेर से ऐसे बन रहा हरा-भरा कृत्रिम जंगल, नेशनल ग्रीन एयर प्रोग्राम के तहत हो रहा तैयार

ग्वालियर के पास बसे बरा गांव की सूरत अब तेजी से बदल रही है। जो इलाका कभी शहर भर के कचरे का डंपिंग यार्ड बन चुका था, अब उसकी रंगत बदलकर लोगों को प्रकृति के करीब लाने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है। ग्वालियर के बरा गांव में एक विशाल सिटी फॉरेस्ट का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ हजारों पौधे अब धीरे-धीरे बड़े पेड़ों का रूप ले रहे हैं। यह प्रोजेक्ट कुछ ही समय में ग्वालियरवासियों के लिए एक सुंदर और घने कृत्रिम जंगल के रूप में पूरी तरह विकसित हो जाएगा।

♻️ डंपिंग यार्ड से मुक्ति: प्रदूषित आबोहवा को सुधारने के लिए नगर निगम की अनूठी पहल

परियोजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि:

  • डंपिंग यार्ड का कायापलट: ग्वालियर के नजदीक बरा गांव के पास एक बड़े क्षेत्र में नगर निगम का पुराना डंपिंग यार्ड स्थित था। अब नगर निगम इस क्षेत्र का कायापलट करने में जुटा है।

  • शुद्ध आबोहवा: शहर की लगातार प्रदूषित होती हवा को शुद्ध करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इस डंपिंग यार्ड को खत्म कर यहाँ एक हरा-भरा सिटी फॉरेस्ट डेवलप किया जा रहा है, जो शहर के लोगों को जंगल का अहसास कराएगा।

🗓️ फरवरी-मार्च 2027 तक आमजन के लिए खुलने की उम्मीद; 94 हजार वर्गफीट में हो रहा निर्माण

समयसीमा और क्षेत्रफल:

  • विशाल दायरा: ग्वालियर नगर निगम द्वारा बरा गांव के पास करीब 94 हजार वर्गफीट के क्षेत्रफल में इस प्राकृतिक क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है।

  • तैयारी का समय: यहाँ युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि फरवरी या मार्च 2027 तक इस सिटी फॉरेस्ट को आम जनता के सैर-सपाटे और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए खोल दिया जाएगा।

🌿 5000 से ज्यादा पौधे लगाए गए; कच्चा रास्ता और प्राकृतिक संसाधनों का हो रहा उपयोग

अपर आयुक्त मुनीश सिंह सिकरवार के निर्देश व विशेषताएं:

  • 5000+ पौधे: नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीश सिंह सिकरवार के अनुसार, भले ही यह एक कृत्रिम जंगल है, लेकिन इसे पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किया जा रहा है। शुरुआत में 1200 पौधे लगाने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक 5,000 से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं जो तेजी से बढ़ रहे हैं।

  • कच्चे रास्ते का कॉन्सेप्ट: शहरी पार्कों की तरह यहाँ कंक्रीट या पेबर ब्लॉक से पक्के रास्ते (पाथवे) नहीं बनाए जा रहे हैं। आगंतुकों को असली जंगल जैसा अनुभव देने के लिए कच्ची मिट्टी पर गिट्टी डालकर चलने योग्य प्राकृतिक ट्रैक तैयार किया गया है।

💰 करीब 2 करोड़ की लागत; नीम, पीपल और बरगद जैसे दीर्घकालिक पेड़ों पर विशेष फोकस

लागत और पौधों की प्रजातियां:

  • बजट और अनुदान: इस पूरे परिसर को लगभग 1 करोड़ 92 लाख रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है, जिसे नेशनल ग्रीन एयर प्रोग्राम (National Green Air Program) के तहत अनुदान प्राप्त हुआ है। सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल और बोरिंग कराई गई है, साथ ही संबंधित संस्था अगले 5 वर्षों तक इसकी देखरेख करेगी।

  • स्थायी पौधे: इस जंगल में सजावटी या मौसमी पौधों के बजाय ऐसे दीर्घकालिक पेड़ों पर जोर दिया गया है जो सदियों तक जीवित रहें। यहाँ नीम, पीपल और बरगद जैसे पौधे लगाए गए हैं जो अब धीरे-धीरे विशाल वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं।

🌍 केवल सैर-सपाटा नहीं, बल्कि पर्यावरण में सुधार है मुख्य लक्ष्य

प्रशासन का दृष्टिकोण:

  • पर्यावरण संरक्षण: निगम अधिकारियों का मानना है कि इस सिटी फॉरेस्ट के विकसित होने से आसपास के क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और प्रदूषण का स्तर घटेगा।

  • गंभीर पहल: इस परियोजना को सिर्फ मनोरंजन या सैर-सपाटे तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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