MP का इकलौता यमदेव मंदिर, जहाँ अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और मोक्ष के लिए लगता है भक्तों का ताँता
भोपाल के 200 साल पुराने मंदिर में विराजे यमदेव। नरक चतुर्दशी पर होता है दीपदान, चढ़ता है छाता-लाठी। पूरी खबर पढ़ें।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पुराने शहर स्थित लखेरापुरा बाजार की तंग गलियों में लगभग 200 वर्ष पूर्व चौरसिया समाज द्वारा भव्य श्रीराम मंदिर की स्थापना की गई थी। इसी मंदिर परिसर में मृत्यु के देवता यमदेव (धर्मराज) भी मुख्य रूप से विराजे हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रतिवर्ष दीपावली से ठीक एक दिन पहले यानी नरक चतुर्दशी की रात्रि को यहाँ यमदेव का अत्यंत विशेष पूजन-अर्चन और दीपदान किया जाता है, जो तड़के तक अनवरत चलता है।
☂️ भोपाल और मध्य प्रदेश का इकलौता यमराज मंदिर; क्यों चढ़ाया जाता है छाता, लाठी और कंबल?
पूजा-विधान और सामग्री का महत्व:
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एकमात्र मंदिर: 3 पीढ़ियों से इस मंदिर की अनवरत सेवा कर रहे पुजारी शरद कश्यप बताते हैं कि "यह केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का इकलौता मंदिर है जहाँ धर्मराज यमदेव की प्रतिमा स्थापित है। अमूमन लोग अन्य देवी-देवताओं से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य मांगते हैं, लेकिन यमदेव से केवल यह प्रार्थना की जाती है कि जीवन के अंतिम क्षण में बिना किसी शारीरिक या मानसिक कष्ट के मोक्ष प्राप्त हो।"
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विशेष चढ़ावा: नरक चतुर्दशी के दिन यमदेव को प्रसन्न करने के लिए कंबल, छाता, उड़द, तिल का तेल, तिल और लाठी मुख्य रूप से अर्पित की जाती है। मान्यता है कि जिस एक लाठी के सहारे मानव जीवन की नैया पार होनी है, वे हमारे द्वारा किए गए कर्म ही हैं, और उन्हीं कर्मों का निष्पक्ष न्याय धर्मराज करते हैं।
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अकाल मृत्यु से मुक्ति: मंदिर में दीपदान का विशेष क्रम शाम 7 बजे से प्रारंभ होकर देर रात 3 बजे तक चलता है। इस पूजन का मुख्य उद्देश्य अकाल मृत्यु का योग टालना और मृत्यु के भय को पूरी तरह समाप्त करना है।
📿 'जो मृत्यु के बाद संभालेंगे उनका पूजन आवश्यक'; दूर-दूर से पहुँचते हैं आस्थावान श्रद्धालु
भक्तों की आस्था और अनुभव:
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मोक्ष की कामना: नरक चतुर्दशी के अवसर पर मंदिर में दर्शन करने आईं श्रद्धालु आस्था अग्रवाल बताती हैं कि "यहाँ लोग जीवन के लिए नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद के सफर की सुगमता के लिए आते हैं ताकि परलोक का जीवन कष्टदायी न हो। मैं कई वर्षों से यहाँ पूजन करने आ रही हूँ।"
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काली वस्तुओं का दान: भगवान धर्मराज को विशेष रूप से काली वस्तुओं का दान किया जाता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से आने पर अकाल मृत्यु का भय सदा के लिए समाप्त हो जाता है और धर्मराज जी ही अंतिम यात्रा में मोक्ष प्रदान करते हैं।
🏛️ आजादी के पूर्व का ऐतिहासिक इतिहास; नवाबों के दौर से भोपाल की सांस्कृतिक धरोहर
मंदिर का इतिहास:
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ऐतिहासिक पहचान: भोपाल के इस प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर की गिनती उन ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में होती है जिनकी स्थापना देश की आजादी से काफी पहले नवाबों के दौर में हो चुकी थी।
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अनोखी परंपरा: भले ही भोपाल के ऐतिहासिक धरोहरों में इस मंदिर का विशिष्ट स्थान है, लेकिन आज भी नए भोपाल और बाहरी इलाकों के कई लोगों को यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि उनके शहर में भगवान यमदेव का भी एक अति प्राचीन और सिद्ध मंदिर स्थापित है।
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