क्या पृथ्वी पर मंडरा रहा है एस्टेरॉइड का खतरा? जानें क्या है 'इंटरनेशनल एस्टेरॉइड डे' का महत्व
30 जून को मनाया जाता है इंटरनेशनल एस्टेरॉइड डे। पृथ्वी की सुरक्षा और क्षुद्रग्रहों की निगरानी के प्रति जागरूकता के लिए क्या कहते हैं खगोलविद? जानें पूरी जानकारी।
जबलपुर। ब्रह्मांड में करोड़ों छोटे-बड़े पिंड सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें से कुछ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉइड) अपनी कक्षा से विचलित होकर पृथ्वी के निकट आ जाते हैं। संभावित खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 30 जून को 'इंटरनेशनल एस्टेरॉइड डे' मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी।
🔭 अंतरिक्ष की निगरानी और वैज्ञानिक तकनीक
आज के आधुनिक युग में शक्तिशाली दूरबीनों और उन्नत तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक लगातार ऐसे क्षुद्रग्रहों पर नज़र बनाए हुए हैं। नासा (NASA) जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां भवन, विमान और कार के आकार वाले कई 'नियर-अर्थ एस्टेरॉइड्स' को ट्रैक कर रही हैं। यदि कोई पिंड भविष्य में पृथ्वी के लिए खतरा बनता है, तो वैज्ञानिक उसकी गति और दिशा का विस्तृत अध्ययन करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसकी दिशा बदलने की तकनीकों पर भी काम किया जाता है।
🪨 एस्टेरॉइड क्या हैं और ये कैसे चमकते हैं?
एस्टेरॉइड सौरमंडल का ही एक हिस्सा हैं, जो मुख्य रूप से चट्टानी और धात्विक पदार्थों से बने होते हैं। इनमें वायुमंडल नहीं होता। जब ये पिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण अत्यधिक गर्म होकर चमकने लगते हैं और एक आग के गोले की तरह दिखाई देते हैं। हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियां इनकी गतिविधियों का पहले से आकलन कर लेती हैं, जिससे संभावित जोखिमों को समय रहते समझा जा सकता है।
🌌 एस्टेरॉइड बेल्ट: सौरमंडल के अनसुलझे रहस्य
अधिकांश क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच स्थित 'एस्टेरॉइड बेल्ट' में पाए जाते हैं। खगोलविदों का मानना है कि यह क्षेत्र उन पदार्थों से बना है, जो कभी ग्रह का रूप नहीं ले पाए या किसी प्राचीन ग्रह के अवशेष हैं। इस बेल्ट में लाखों क्षुद्रग्रह मौजूद हैं, जिनका आकार कुछ मीटर से लेकर सैकड़ों किलोमीटर तक हो सकता है। इनका अध्ययन सौरमंडल की उत्पत्ति और विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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