पढ़ाई से लेकर रिजल्ट तक सब कुछ ठप होने की कगार पर; अतिथि विद्वानों के मानदेय को लेकर भी विवाद
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में 100 से अधिक अतिथि विद्वानों का अनुबंध 30 जून को समाप्त। नया आदेश न होने से शैक्षणिक अराजकता की स्थिति।
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में कार्यरत 100 से अधिक गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी का आमंत्रण 30 जून को स्वतः समाप्त हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अभी तक इनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने या नया आदेश जारी न करने से शैक्षणिक अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। विवि की कई प्रमुख अध्ययनशालाएं—जिनमें स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SOET), कृषि, पर्यावरण, दर्शनशास्त्र और इतिहास शामिल हैं—पूरी तरह से अतिथि विद्वानों के भरोसे ही चल रही हैं।
📉 अध्ययनशालाओं में सन्नाटा, प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित
कुलसचिव द्वारा 11 जून को जारी आदेश के अनुसार 30 जून को शैक्षणिक सत्र समाप्त होना है, लेकिन 1 जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके परिणामस्वरूप:
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कक्षा संचालन: अतिथि विद्वानों के बिना नियमित कक्षाओं का संचालन असंभव होगा।
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प्रवेश प्रक्रिया: नए विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं होगा।
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दस्तावेज सत्यापन: विद्यार्थियों को दाखिले के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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मूल्यांकन: रिजल्ट और मूल्यांकन का कार्य भी बुरी तरह प्रभावित होगा।
💰 मानदेय का संकट: ऑडिट की आपत्ति से अटका वेतन
अतिथि विद्वान अपनी आजीविका को लेकर भी चिंतित हैं। मई माह में परीक्षाओं और प्रवेश संबंधी कार्यों के बावजूद ऑडिट विभाग की आपत्तियों के चलते उनका मानदेय भुगतान नहीं हो पाया है। हर महीने फाइलें अटकने से विद्वानों में गहरा आक्रोश है।
🏛️ विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस मामले में एक कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी की अनुशंसा के आधार पर ही नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। मानदेय के संबंध में भी ऑडिट में स्थिति स्पष्ट कर दी गई है और जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। देखना यह है कि क्या 1 जुलाई की सुबह तक प्रशासन कोई समाधान निकाल पाता है या विद्यार्थियों को एक बार फिर अव्यवस्था का शिकार होना पड़ेगा।
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