मध्य प्रदेश में मानसून का कहर; बड़वानी-खंडवा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय। बड़वानी-खंडवा में भारी बारिश का रेड अलर्ट। इंदौर, उज्जैन सहित 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट। जानें मानसून की वर्तमान स्थिति।
भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के चलते प्रदेश भर में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम केंद्र भोपाल ने अगले 24 घंटों के लिए राज्य के 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़वानी और खंडवा जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' घोषित किया गया है, जहां 8 इंच से अधिक वर्षा होने की प्रबल संभावना है।
⚠️ कहां रेड और कहां ऑरेंज अलर्ट?
मौसम विभाग के अनुसार, बड़वानी और खंडवा में 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, इंदौर और उज्जैन संभाग सहित रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, खरगोन, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा और बालाघाट के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। देवास, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर और पांढुर्णा में भी भारी बारिश की संभावना है, जिसे देखते हुए प्रशासन को पूरी तरह से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
⚖️ पूर्वी और पश्चिमी MP: बारिश में बड़ा अंतर
प्रदेश में मानसून की स्थिति संतुलित नहीं है। जहां पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से +8 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसून अभी भी सुस्त है और वहां औसत से -35 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। रीवा, सागर और जबलपुर संभाग के कई जिलों में अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है, जिससे सूखे जैसे हालात की चिंता बढ़ गई है।
💧 रिकॉर्ड तोड़ बारिश और मौसमी प्रणालियां
पिछले 24 घंटों में पचोर (168 मिमी) और बालाघाट (143.8 मिमी) में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और एक मजबूत ट्रफ रेखा के कारण अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी से भारी नमी मध्य प्रदेश की ओर आ रही है। यह मौसमी सिस्टम अगले 4-5 दिनों तक प्रदेश में झमाझम बारिश का कारण बना रहेगा।
🛡️ सुरक्षा के लिए निर्देश
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें, जलभराव वाले इलाकों और जर्जर इमारतों से दूर रहें। आकाशीय बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लें।
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