32 हजार से अधिक ग्रामीणों की स्क्रीनिंग, ICMR और केंद्रीय टीमों ने संभाला मोर्चा

बालाघाट के जनजातीय इलाकों में बच्चों की बीमारी का कारण खसरा, मलेरिया और कुपोषण का कॉकटेल था। 32 हजार से ज्यादा लोगों की जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में है।

Sep 06, 2026 - 17:27
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32 हजार से अधिक ग्रामीणों की स्क्रीनिंग, ICMR और केंद्रीय टीमों ने संभाला मोर्चा

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जनजातीय इलाकों में बच्चों की असमय मौतों और रहस्यमयी बीमारियों के पीछे किसी एक वायरस या बैक्टीरिया का हाथ नहीं था। चिकित्सा विशेषज्ञों और केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कई गंभीर बीमारियों का एक जटिल संयोजन यानी कॉकटेल था। प्रभावित बच्चों के शरीर में एक साथ खसरा (Measles), मलेरिया, श्वसन संबंधी गंभीर समस्याएं (Pneumonia), डिहाइड्रेशन, गंभीर एनीमिया, कुपोषण और सेप्टिक शॉक के लक्षण पाए गए, जिसने उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

🏥 431 बच्चे हुए थे अस्पताल में भर्ती, 379 स्वस्थ होकर लौटे घर

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस गंभीर स्वास्थ्य संकट की चपेट में आने से कुल 431 बच्चों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था। राहत की बात यह है कि त्वरित और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन के कारण इनमें से 379 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं, जबकि शेष 52 बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अपने कॉम्बिंग ऑपरेशन का दायरा 3 गांवों से बढ़ाकर 50 से अधिक गांवों तक कर दिया है, जिसके तहत अब तक 32,000 से ज्यादा ग्रामीणों की डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।

🔬 ICMR और केंद्रीय टीमों ने संभाला मोर्चा, कुपोषण के खिलाफ छिड़ी जंग

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अगस्त 2026 में दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों का दल मैदान में उतरा। जांच के दौरान 7,711 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए, जिनमें से 518 अति-गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया गया। इसके अलावा दस्त से पीड़ित 13,000 से अधिक और निमोनिया से ग्रस्त 274 बच्चों का समय पर इलाज शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी से पिछले एक सप्ताह में खसरे का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है, फिर भी संवेदनशील बस्तियों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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