बाबा महाकाल की सवारी का 'राजसी सेवक': जानिए कौन है हाथी 'श्यामू' और क्या है उसका डाइट प्लान
उज्जैन महाकाल सवारी में हाथी 'श्यामू' है मुख्य आकर्षण। जानिए रामू के बाद श्यामू की शाही देखरेख, डाइट और उससे जुड़ी खास बातें।
उज्जैन। सावन-भादों के महीने में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी का भक्त साल भर बेसब्री से इंतजार करते हैं। भगवान महाकाल के स्वागत में पूरी उज्जैन नगरी उमड़ पड़ती है। सवारी के दौरान आतिशबाजी, रंगोली और पुष्प वर्षा के बीच हाथी 'श्यामू' आकर्षण का विशेष केंद्र होता है। श्यामू न केवल बाबा का भक्त है, बल्कि उसकी देखरेख किसी राजसी मेहमान की तरह की जाती है।
🌟 हाथी 'रामू' की विरासत संभाल रहा 'श्यामू'
हाथी श्यामू की उम्र 29 वर्ष है और वह बीते 9 सालों से बाबा महाकाल की सेवा में तैनात है। श्यामू की देखरेख करने वाले सरमन गिरी बाबा बताते हैं कि इससे पहले 'रामू' नामक हाथी महाकाल सवारी की शान हुआ करता था, जिसने 36 वर्षों तक सेवा दी थी। रामू के निधन के बाद असम से लाए गए श्यामू को तैयार किया गया, जो आज अपनी दिव्यता और भव्यता से सबका दुलारा बन गया है।
🍎 श्यामू की शाही डाइट: ढाई क्विंटल भोजन रोज
श्यामू की डाइट बेहद खास है, जिसे 10 महावतों की देखरेख में पूरा किया जाता है:
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सुबह की शुरुआत: श्यामू सुबह 5 बजे उठ जाता है और डेढ़ घंटे तक उसे स्नान कराया जाता है।
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नाश्ता और भोजन: नाश्ते में एक क्विंटल सब्जियाँ और भोजन में भी एक क्विंटल आहार दिया जाता है।
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विशेष आहार: रात 8 बजे उसे 25 किलो आटे से बने 50 मोटे टिक्कड़ और विशेष सानी खिलाई जाती है।
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पानी: श्यामू एक बार में ही करीब 25 बाल्टी पानी पी जाता है। प्रतिदिन उसे कुल ढाई क्विंटल भोजन की आवश्यकता होती है।
🩺 सेहत और सुरक्षा पर खास ध्यान
श्यामू की सेहत को लेकर मंदिर प्रशासन बेहद सतर्क रहता है। उसका दैनिक स्वास्थ्य निरीक्षण किया जाता है, साथ ही हर महीने वेटनरी डॉक्टर द्वारा मेडिकल टेस्ट और ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। पुजारी महेश गुरु के अनुसार, हाथी को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है और सवारी में हाथियों की उपस्थिति शुभता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों में भी हाथियों को राजाओं और देवताओं की सवारी के रूप में विशेष सम्मान दिया गया है।
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