क्या मध्य प्रदेश के जंगलों में सुरक्षित नहीं हैं बाघ? सिवनी में एक और बाघ की संदिग्ध मौत
सिवनी के कालीमाटी जंगल में बाघ का शव मिला। प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष में मौत की आशंका। वन विभाग ने पोस्टमार्टम कर NTCA नियमों के तहत अंतिम संस्कार किया।
सिवनी। मध्य प्रदेश में वन्यजीवों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह सिवनी जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कालीमाटी के जंगलों में एक बाघ का शव बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घटनास्थल को सील कर दिया और साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड की मदद ली गई।
⚔️ आपसी संघर्ष या शिकार? क्या कहती है प्राथमिक जांच?
जिला वन मंडलाधिकारी (DFO) गौरव मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला दो बाघों के बीच आपसी संघर्ष का लग रहा है। बाघ के गले और शरीर पर गहरे घाव और पंजे के निशान पाए गए हैं, साथ ही गले की हड्डी भी टूटी हुई मिली है। फिलहाल, वन विभाग किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रहा है और मौत की सटीक वजह जानने के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम का इंतजार किया जा रहा है।
🔥 प्रोटोकॉल के तहत हुआ अंतिम संस्कार
बाघ का पोस्टमार्टम वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की उपस्थिति में कराया गया। इसके बाद, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के कड़े नियमों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पूरे सम्मान के साथ बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व और जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
📉 प्रदेश में बढ़ रही बाघों की मौत की घटनाएं
मध्य प्रदेश के अलग-अलग टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है। 10 जुलाई 2026 को बांधवगढ़ में वन्यप्राणी का कंकाल मिला था, वहीं 2 मई को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और अप्रैल 2026 में कान्हा टाइगर रिजर्व में भी 9 दिनों के भीतर 4 बाघों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। इन घटनाओं के बाद अब वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
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