बेटी के लिए दुबई की नौकरी छोड़ी, नागदा के डॉ. पंकज मारू ने शुरू किया 'स्नेह' संस्थान

बेटी की बीमारी के चलते दुबई की नौकरी छोड़ने वाले डॉ. पंकज मारू ने नागदा में 'स्नेह' संस्था की शुरुआत की, जो आज सैकड़ों दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बना रही है।

Sep 05, 2026 - 17:06
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बेटी के लिए दुबई की नौकरी छोड़ी, नागदा के डॉ. पंकज मारू ने शुरू किया 'स्नेह' संस्थान

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में एक पिता के त्याग और संघर्ष की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सैकड़ों विशेष परिवारों के जीवन में नई रोशनी भर दी है। अपनी 3 साल की बेटी सोनू के भविष्य और उसकी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों (ADHD) की चिंता ने डॉक्टर पंकज मारू को दुबई में मिल रही लाखों रुपए की सीओओ की नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वे अपने होमटाउन नागदा लौट आए और साल 2009 में महज दो किराए के कमरों और 8 बच्चों के साथ 'स्पेशल नीड एजुकेशन होम स्नेह' की नींव रखी। आज यही संस्थान 175 से अधिक विशेष जरूरत वाले बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, थेरेपी और कौशल विकास का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

🏫 8 बच्चों के छोटे सफर से शुरू हुआ 'स्नेह', अब शिक्षा का मतलब बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है

शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि अभिभावकों को यह समझाना था कि विशेष जरूरत वाला बच्चा समाज पर कोई बोझ नहीं है। स्नेह संस्थान में शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे सुबह उठने से लेकर रात तक के दैनिक कार्य—जैसे कपड़े पहनना, खाना खाना, स्वच्छता रखना और अपनी जरूरतें बताना खुद सीख सकें, इस पर विशेष जोर दिया जाता है। यहाँ ऑक्यूपेशनल थेरेपी, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, बच्चे दीपावली पर मिट्टी के दीपक और सुंदर राखियां बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।

🏆 छात्र से थेरेपिस्ट बने प्रमोद दुबे की प्रेरणादायक कहानी, राष्ट्रपति से मिल चुका है राष्ट्रीय सम्मान

संस्था की सफलता की सबसे बड़ी मिसाल प्रमोद धर दुबे हैं, जो जन्म से 59 प्रतिशत बौद्धिक रूप से दिव्यांग हैं। प्राथमिक शिक्षा के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन स्नेह संस्था में आकर उन्होंने विशेष शिक्षकों के मार्गदर्शन में नृत्य, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। कड़ी ट्रेनिंग के बाद आज वे खुद संस्था के थेरेपी सेक्शन में दूसरे बच्चों की मदद करते हैं और इसके एवز में उन्हें सैलरी भी मिलती है। उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के चलते उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 का 'नेशनल अवार्ड फॉर इंडिविजुअल एक्सीलेंस' प्रदान किया गया, और 3 दिसंबर 2022 को विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया। डॉ. पंकज मारू का यह सफर अब नागदा से लेकर देश के कई नीतिगत और राष्ट्रीय मंचों तक अपनी गूंज छोड़ चुका है।

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