मध्य प्रदेश में पत्नियों द्वारा पति की हत्या के बढ़ते मामले; प्रेमी के साथ मिलकर रची जा रही साजिशें

मध्य प्रदेश में पति की हत्या के मामलों में पत्नियों की बढ़ती साजिश। बीते 6 महीनों में 15 से अधिक घटनाएं। जानिए रिश्तों में आई इस कड़वाहट और अपराध के पीछे की वजह।

Jul 12, 2026 - 13:16
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मध्य प्रदेश में पत्नियों द्वारा पति की हत्या के बढ़ते मामले; प्रेमी के साथ मिलकर रची जा रही साजिशें

मध्य प्रदेश। प्रदेश में पति-पत्नी के रिश्तों से जुड़ी आपराधिक घटनाएं चिंताजनक स्तर पर बढ़ गई हैं। बीते छह महीनों में ऐसे 15 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस जांच के दौरान पत्नियों के अपने कथित प्रेमियों के साथ मिलकर पति की हत्या कराने का षड्यंत्र रचने का आरोप है। रीवा, पन्ना, नरसिंहपुर, धार और इंदौर जैसे जिलों में सामने आए मामलों ने समाज में रिश्तों की मर्यादा और बढ़ते अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🕵️ हत्या के तरीके: दुर्घटना का नाटक या सुपारी किलिंग

पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के तरीके अत्यंत क्रूर और नियोजित होते हैं। धार के मसाला कारोबारी देवकृष्ण पुरोहित हत्याकांड में पत्नी ने 1 लाख रुपये की सुपारी देकर शूटर बुलाए थे, जबकि इंदौर के कारोबारी नवीन पाटीदार की हत्या को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई। मंदसौर के भानपुरा हत्याकांड में तो हैवानियत की हद पार करते हुए शव के टुकड़े तक किए गए। इन मामलों में साक्ष्य मिटाने के लिए जहर देने, गला घोंटने, या शवों को ठिकाने लगाने जैसी कोशिशें आम रही हैं।

🧠 मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण

मनोचिकित्सकों के अनुसार, रिश्तों में तनाव, संवादहीनता, अविश्वास और स्वार्थ का बढ़ना अपराध का मुख्य कारण है। कई बार दंपती असफल वैवाहिक जीवन से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन सामाजिक बदनामी और तलाक की लंबी कानूनी प्रक्रिया के डर से वे गलत रास्ता चुन लेते हैं। जब विवाहेतर संबंधों का विवाद गहराता है और बातचीत के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब कुछ लोग कानून का सहारा लेने के बजाय हिंसा और हत्या का मार्ग अपना लेते हैं।

⚖️ क्या बदल रहा है समाज?

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में बढ़ती आत्मनिर्भरता स्वागत योग्य है, लेकिन कुछ व्यक्तियों में विकसित होती नकारात्मक प्रवृत्तियां चिंता का विषय हैं। समाजशास्त्री इसे नैतिक पतन और बढ़ते मानसिक तनाव के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, हर घटना को पूरे समाज से जोड़ना सही नहीं है, लेकिन बढ़ती वारदातों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैवाहिक जीवन में बढ़ता असंतोष अब हिंसक अपराधों में तब्दील हो रहा है।

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