17 साल का इंतजार खत्म; ₹1610 करोड़ की स्लीमनाबाद टनल से विंध्य-महाकौशल के 1450 गांवों की बुझेगी प्यास
कटनी के स्लीमनाबाद में देश की सबसे लंबी (11.952 किमी) वाटर टनल का काम अंतिम चरण में है। 17 साल बाद विंध्य और महाकौशल के 1450 गांवों तक पहुंचेगा नर्मदा जल।
कटनी। मध्य प्रदेश में विकास और सिंचाई क्रांति का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने वाला है. कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बनाई जा रही देश की सबसे लंबी (11.952 किलोमीटर) अंडरग्राउंड वाटर टनल का निर्माण कार्य अब अपने बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यह टनल विंध्य और महाकौशल अंचल के निवासियों के लिए एक बड़ी 'लाइफ चेंजर' साबित होने वाली है. तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के सिंचाई और सिविल इंजीनियरिंग के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट्स में से एक रहा है. जमीन के नीचे इतनी जटिल परिस्थितियों में टनल बनाना आसान नहीं था, लेकिन तमाम बाधाओं के बावजूद भारतीय इंजीनियरों ने इस भागीरथी कार्य को संभव कर दिखाया है.
🌊 2. 17 साल का लंबा संघर्ष और भागीरथी प्रयास: बुझेगी 1,450 गांवों की प्यास, खेतों को मिलेगा पानी
इस महत्वाकांक्षी टनल परियोजना का मुख्य लक्ष्य बरगी बांध के नर्मदा जल को प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) के सहारे विंध्य के सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना है.
परियोजना की मुख्य उपलब्धि:
लगभग 17 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद, विंध्य पर्वतमाला की 40 मीटर ऊंची और बेहद कठोर चट्टानों का सीना चीरकर बहने वाला नर्मदा का पानी अब महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के 1,450 गांवों की प्यास बुझाएगा. राज्य सरकार का दावा है कि इस परियोजना के पूर्ण होते ही इस पूरे बेल्ट की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा.
🔍 3. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया टनल का जायजा: केवल अंतिम एक मीटर का ब्रेक-थ्रू शेष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कटनी पहुंचकर इस ऐतिहासिक परियोजना का बेहद करीब से विस्तृत निरीक्षण किया. प्रोजेक्ट की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:
"लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी यह जटिल सुरंग अब केवल अंतिम एक मीटर के ब्रेक-थ्रू (खुदाई) से ही पूर्ण होने वाली है. पूरा होने पर यह देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे अनूठी जल-सुरंगों में शुमार होगी. विंध्य पर्वतमाला के भीतर से गुजरकर नर्मदा का जल सोन नदी के कछार तक पहुंचेगा. इसके बाद बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1,450 गांवों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को हमेशा के लिए सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी."
🇺🇸 4. अमेरिकी बोरिंग मशीनें भी जहां हो गई थीं फेल: पानी के भारी रिसाव और चट्टानों ने खड़ी की थी चुनौती
स्लीमनाबाद में जमीन से करीब 80 से 100 फुट नीचे बन रही यह टनल बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच से गुजरती है. साल 2008 में जब इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि विंध्य पर्वतमाला की मजबूत चट्टानों के बीच खुदाई करना इतना मुश्किल साबित होगा.
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मशीनों का फेल होना: इस कठिन काम के लिए विशेष रूप से अमेरिका से अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनें (TBM) मंगवाई गई थीं, लेकिन वे भी यहां की परिस्थितियों के आगे हार गईं.
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भीषण जल रिसाव: खुदाई के दौरान टनल के भीतर प्रति मिनट 25,000 लीटर तक पानी का भारी रिसाव होने लगा, जिसके दबाव को अमेरिकी मशीनें झेल नहीं पाईं और टूटकर बिखर गईं. इसके चलते काम लंबे समय तक बंद रहा.
⚠️ 5. विस्थापन का दर्द और मजदूरों की शहादत: कई बाधाओं को पार कर पूरा हुआ 'मौत के कुएं' का सफर
जब अमेरिकी तकनीक भी पूरी तरह फेल हो गई, तो प्रशासनिक स्तर पर इस प्रोजेक्ट को लेकर भारी चिंता पैदा हो गई थी. जमीन के नीचे मार्बल, डोलोमाइट और लाइमस्टोन की इतनी मजबूत और अनप्रेडिक्टेबल चट्टानें थीं कि खुदाई करना मौत के कुएं में उतरने जैसा खतरनाक हो गया था. काम के दौरान कई बार मिट्टी धंसने और चट्टानों के खिसकने की दुर्घटनाएं हुईं, जिसके कारण टनल के अलाइनमेंट में आने वाले करीब 80 परिवारों को विस्थापित करना पड़ा. बेहद दुखद रूप से, इस कठिन अभियान में कुछ मजदूरों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी. प्रशासनिक उदासीनता, बजट की निरंतर कमी और तकनीकी खामियों के कारण यह ड्रीम प्रोजेक्ट कई वर्षों तक अधर में लटका रहा.
💰 6. 17 साल बाद मिली ऐतिहासिक रफ्तार: 799 करोड़ से बढ़कर 1,610 करोड़ रुपये तक पहुंची लागत
विगत 17 वर्षों से धीमी गति से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और निरंतर मॉनिटरिंग के बाद नई रफ्तार मिली है. वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| प्रोजेक्ट विवरण (Sleemanabad Tunnel Status) | आंकड़े और प्रगति दर |
| प्रारंभिक वर्ष | 2008 |
| शुरुआती अनुमानित लागत | ₹799 करोड़ |
| अब तक कुल खर्च | ₹1,610.47 करोड़ |
| कुल कार्य की प्रगति | 96.66% पूर्ण |
| मुख्य टनल व ओपन कट नहर (12.135 किमी) | 100% पूर्ण (ब्रेक-थ्रू का आखिरी 1 मीटर शेष) |
| कट एंड कवर नहर (0.913 किमी) | केवल 0.188 किमी का कार्य शेष |
इस सुरंग के पूरी तरह चालू होते ही मध्य प्रदेश के 6 प्रमुख जिलों के लाखों किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी और बुंदेलखंड, विंध्य व महाकौशल की प्यासी धरती सदा के लिए तरबतर हो जाएगी.
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