निर्माण कार्यों में हादसे रोकने को उज्जैन में IIT बॉम्बे का महामंथन, AI और 5-एक्शन फॉर्मूले से बचेगी मजदूरों की जान

उज्जैन सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों को सुरक्षित बनाने के लिए IIT बॉम्बे ने संभाली कमान। इंजीनियरों को दी जा रही 5-Action सेफ्टी व AI ट्रेनिंग। पढ़ें रिपोर्ट।

Jul 17, 2026 - 17:32
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निर्माण कार्यों में हादसे रोकने को उज्जैन में IIT बॉम्बे का महामंथन, AI और 5-एक्शन फॉर्मूले से बचेगी मजदूरों की जान

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर 100 से ज्यादा विकास कार्य बेहद तेज गति से संचालित हो रहे हैं. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में विभिन्न निर्माण स्थलों पर मजदूरों के साथ हुए कई हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी. इन हादसों से कड़ा सबक लेते हुए, अब विकास कार्यों को पूरी तरह से दुर्घटनामुक्त और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे ने मध्य प्रदेश सरकार के निर्देशन में सुरक्षा प्रबंधन की कमान संभाल ली है.

🎓 2. दो दिवसीय कंस्ट्रक्शन सेफ्टी प्रोग्राम शुरू: विभागों के इंजीनियर और सुपरवाइजर्स सीख रहे आधुनिक सुरक्षा के गुर

उज्जैन के सिंहस्थ मेला कार्यालय में 17 और 18 जुलाई को दो दिवसीय 'कंस्ट्रक्शन सेफ्टी कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम' (Construction Safety Capacity Building Programme) का आयोजन किया जा रहा है. इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र के अलग-अलग शासकीय विभागों के इंजीनियरों, सुपरवाइजर्स और टेक्निकल ऑफिसर्स को आधुनिक निर्माण सुरक्षा के बेहद महत्वपूर्ण गुर सिखाए जा रहे हैं, ताकि कार्यस्थलों पर किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके.

🚫 3. केवल हेलमेट-जैकेट पहनना सुरक्षा नहीं: IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने बताया- जोखिम को जड़ से मिटाना पहली प्रायोरिटी

सुरक्षा की नई परिभाषा:

प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और IIT बॉम्बे के प्रोफेसर डॉ. वरुण कुमार रेज़ा ने बताया कि यह ट्रेनिंग कुल 6 टेक्निकल सेशंस में दी जा रही है, जिसमें चार प्रमुख मॉड्यूल शामिल किए गए हैं. पहले मॉड्यूल में भारतीय मानक (IS) और अंतरराष्ट्रीय मानक (ISO) सेफ्टी कोड्स, निर्माण स्थलों पर मौजूद विभिन्न अदृश्य खतरों की पहचान और वर्तमान सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन कराया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकतर लोग सुरक्षा का मतलब केवल हेलमेट, जैकेट और सेफ्टी शूज पहनना समझते हैं, जबकि यह सुरक्षा की सबसे अंतिम कड़ी है. असली और पहला प्रयास हमेशा निर्माण स्थल के जोखिम को शुरुआत में ही समाप्त करना होना चाहिए.

🛡️ 4. फाइव एक्शन सेफ्टी स्ट्रेटजी (Five Action Safety Strategy): इन 5 स्तरों पर काम करने से टलेंगे बड़े हादसे

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ इंजीनियरों को दुर्घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए 'फाइव एक्शन सेफ्टी स्ट्रेटजी' (Five Action Safety Strategy) की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया गया. प्रो. रेज़ा के अनुसार, यदि शुरुआती चार स्तरों पर प्रभावी ढंग से काम किया जाए, तो दुर्घटनाओं की संभावना स्वतः ही समाप्त हो जाती है:

स्तर (Level) सुरक्षा रणनीति (Strategy) व्यावहारिक दृष्टिकोण (Action Plan)
1. Elimination जोखिम उन्मूलन किसी भी अत्यधिक खतरनाक कार्य या प्रक्रिया को साइट से पूरी तरह समाप्त करना.
2. Substitution सुरक्षित विकल्प असुरक्षित पारंपरिक व्यवस्था की जगह आधुनिक और अधिक सुरक्षित विकल्पों को अपनाना.
3. Isolation जोखिम पृथक्करण निर्माण स्थल की मजबूत बैरिकेडिंग कर आम नागरिकों को डेंजर जोन से दूर रखना.
4. Engineering Controls इंजीनियरिंग नियंत्रण साइट पर गार्ड रेल, सेफ्टी नेट और टो बोर्ड जैसी मजबूत सुरक्षा संरचनाएं विकसित करना.
5. PPE व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सबसे अंतिम सुरक्षा कवच के रूप में हेलमेट, सेफ्टी हार्नेस, रिफ्लेक्टिव जैकेट और सेफ्टी शूज का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करना.
🤖 5. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बताएगा जोखिम: निर्माण स्थलों की सुरक्षा जांच होगी और भी आसान

इस आधुनिक प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इंजीनियरों को निर्माण क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग से रूबरू कराना है. अब सुपरवाइजर निर्माण स्थल की लाइव फोटो लेकर AI सॉफ्टवेयर की मदद से संभावित जोखिमों की तुरंत पहचान कर सकेंगे. यह तकनीक सुरक्षा संबंधी सूक्ष्म कमियों का विश्लेषण करेगी और सुधार के त्वरित उपाय सुझाएगी. इससे निर्माण स्थलों का सुरक्षा निरीक्षण न केवल तेज होगा, बल्कि अधिक सटीक और प्रभावी भी साबित होगा.

👥 6. प्रत्येक बैच में 40 इंजीनियरों को मिल रहा प्रशिक्षण: वैश्विक सुरक्षा मानकों पर किया जा रहा तैयार

IIT बॉम्बे के प्रोफेसर अल्बर्ट थॉमस ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के प्रत्येक बैच में करीब 40 चयनित इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों को शामिल किया गया है. चूंकि यही अधिकारी जिले में चल रहे सभी बड़े निर्माण कार्यों की जमीनी निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी संभालते हैं, इसलिए उन्हें नवीनतम वैश्विक सुरक्षा मानकों (Global Safety Standards) के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे साइट पर सुरक्षित वातावरण तैयार कर सकें.

🚧 7. 100 से अधिक विकास कार्यों पर पैनी नजर: उज्जैन कलेक्टर ने कहा- श्रमिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा:

"सिंहस्थ-2028 की भव्यता और सुगमता के लिए वर्तमान में जिले में 100 से अधिक बड़े निर्माण कार्य प्रगति पर हैं. हमारी सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता हर हाल में श्रमिकों की जीवन रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इस महाअभियान के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय दुर्घटना न हो, इसके लिए IIT बॉम्बे जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का तकनीकी सहयोग जिला प्रशासन के लिए मील का पत्थर साबित होगा. प्रशिक्षण में इंजीनियरों को विशेष रूप से विद्युत सुरक्षा, ट्रेंच (गहरी खुदाई) के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां, बैरिकेडिंग, साइनेज, ऊंचाई पर सुरक्षित कार्य प्रणाली और अन्य तकनीकी पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है. इस मास्टर ट्रेनिंग के बाद निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों को भी सुरक्षा के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित किया जाएगा."

सिंहस्थ मीडिया कंसल्टेंसी के अभिषेक शर्मा ने जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए लोक निर्माण सेतु संभाग, उज्जैन को नोडल एजेंसी बनाया गया है. दो दिवसीय इस कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग (PWD), एमपीआरडीसी (MPRDC), ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES), और मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास विभागों के आला अधिकारी और अभियंता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं.

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