एमपी में UCC ड्राफ्ट पास; शादीशुदा होने पर लिव-इन में रहे तो 5 साल की सजा, जानें नियम

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक को सोमवार को विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसमें लिव-इन और विवाह को लेकर कड़े प्रावधान हैं।

Jul 19, 2026 - 18:20
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एमपी में UCC ड्राफ्ट पास; शादीशुदा होने पर लिव-इन में रहे तो 5 साल की सजा, जानें नियम

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में राजधानी भोपाल के जगदीशपुर (इस्लाम नगर) में आयोजित हुई कैबिनेट की अहम बैठक में 'मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' के अंतिम ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी गई है. इस अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक को सोमवार से शुरू होने जा रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र में पटल पर पेश किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि इस कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में विवाह का आधिकारिक तौर पर रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराना सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य हो जाएगा.

📜 1. कल विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक: 'क्या राम, क्या रहीम... सबको मिलेगा बराबरी का मौका'

कैबिनेट में लिए गए इस बड़े नीतिगत निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक समाज के हर वर्ग के लिए है, जो 'क्या राम-क्या रहीम' सबको समान रूप से आगे बढ़ने और बराबरी का अधिकार देने वाला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहती तो सीधे तौर पर एक्ट पारित कर सकती थी, लेकिन इसे पूरी तरह लोकतांत्रिक बनाने के लिए लगभग 2 महीने पहले एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था. इस कमेटी के जरिए प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर परामर्श समितियों की बैठकें आयोजित की गईं और जनसामान्य से संवाद किया गया.

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इस विधेयक के ड्राफ्ट पर व्यापक सर्वदलीय चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया था. बैठक में लगभग सभी दलों के नेता शामिल हुए और अपने सुझाव दिए, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता इस चर्चा से दूर रहे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि समझ नहीं आता कि कांग्रेस के नेताओं को हिंदू-मुस्लिम के वोटों को लेकर क्या परेशानी रहती है, उन्हें 'एक देश, एक विधान और एक निशान' पर हमेशा दुविधा क्यों होती है.

📊 2. 80 फीसदी मुस्लिम बहनों ने किया समर्थन: सर्वे रिपोर्ट में जनता से मिले 9 लाख से अधिक सुझाव

इस कानून की स्वीकार्यता को लेकर मुख्यमंत्री ने कुछ बेहद चौंकाने वाले और ऐतिहासिक आंकड़े पेश किए. विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले जनमत जानने के लिए प्रदेश भर में बड़े स्तर पर डिजिटल और जमीनी अभियान चलाया गया था.

जनता से मिले व्यापक जनसमर्थन और सांख्यिकीय आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

सर्वे / जनमत के मुख्य बिंदु प्राप्त समर्थन प्रतिशत (%) मुख्य निष्कर्ष व जनता की राय
मुस्लिम महिलाओं का समर्थन 80% से अधिक मुस्लिम बहनों ने खुलकर एक समान कानून की पुरजोर पैरवी की.
मुस्लिम पुरुषों का समर्थन 40% प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के पुरुषों ने भी विधेयक के ड्राफ्ट को सराहा.
कुल डिजिटल आउटरीच 3.94 करोड़ SMS जन-जागरूकता के लिए करोड़ों नागरिकों को सीधे संदेश भेजे गए.
कुल प्राप्त सुझाव (Suggestions) 9 लाख 58 हजार + कानून को बेहतर बनाने के लिए जनता ने भारी संख्या में सुझाव दिए.
ड्राफ्ट को कुल जनसमर्थन 93.7% प्रतिशत प्रदेश की बहुसंख्यक आबादी ने ड्राफ्ट पर अपनी अंतिम सहमति जताई.
संपत्ति में समान अधिकार पर राय 92.66% प्रतिशत सभी समुदायों में महिलाओं और पुरुषों को पैतृक संपत्ति में समान हक मिले.
🚫 3. एक ही विवाह को मिलेगी कानूनी मान्यता: दूसरी शादी और मनमाने तलाक पर लगेगी पूर्ण रोक

कैबिनेट द्वारा अनुमोदित ड्राफ्ट के अनुसार, यह कानून लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में केवल एक ही विवाह को कानूनी रूप से वैध माना जाएगा; किसी भी नागरिक के लिए दूसरा विवाह पूर्णतः निषेध (अवैध) घोषित होगा. जब तक सक्षम न्यायालय के माध्यम से कानून सम्मत रूप से विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक कोई भी व्यक्ति दूसरा विवाह नहीं कर सकेगा.

इसके साथ ही, समाज में प्रचलित मनमाने और भेदभावपूर्ण पारिवारिक नियमों को बदलने का प्रावधान किया गया है. अब विवाह विच्छेद में सिर्फ मौखिक या पारंपरिक शब्दों के इस्तेमाल से तलाक नहीं माना जाएगा, बल्कि इसके लिए पूरी कानूनी न्याय प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा. उत्तराधिकार कानून में भी बड़ा बदलाव करते हुए यह तय किया गया है कि पैतृक संपत्ति के चयन में कानूनी रूप से महिला और पुरुष (बेटा और बेटी) दोनों के अधिकार बिल्कुल एक समान होंगे. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की पारंपरिक प्रथाओं और रूढ़ियों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है.

🚨 4. शादीशुदा होने पर लिव-इन तो 5 साल की सजा: रिलेशनशिप का पंजीकरण कराना होगा अनिवार्य

इस विधेयक में युवाओं और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को लेकर बेहद कड़े और नए कानूनी नियम तय किए गए हैं, जो प्रदेश में पहली बार लागू होंगे:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंत में कहा कि इस ऐतिहासिक कानून के जरिए समाज में लंबे समय से चली आ रही भेदभावपूर्ण प्रथाओं और महिलाओं के शोषण को रोकने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है. सर्वे में शामिल 86.78% नागरिकों ने भी माना है कि समान नागरिक संहिता को किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना पूरी स्वतंत्रता से लागू किया जा सकता है.

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