नोटों की बारिश और गड़े धन का झांसा देकर 12 लाख की ठगी; मंदसौर में 4 फर्जी तांत्रिक गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के मंदसौर में नोटों की बारिश और जमीन से गड़ा धन निकालने का झांसा देकर 12 लाख रुपये की ठगी करने वाले फर्जी तांत्रिक गिरोह के 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से अंधविश्वास का फायदा उठाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. यहां नोटों की बारिश कराने और जमीन में गड़ा हुआ करोड़ों का खजाना निकालने का झांसा देकर मासूम लोगों को ठगने वाले एक फर्जी तांत्रिक गिरोह का पर्दाफाश पुलिस ने किया है. मंदसौर की अफजलपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में 4 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इनके कुछ अन्य साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 51 हजार रुपये नकद, दो मोटरसाइकिलें, तंत्र-मंत्र में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और एक धातु की मूर्ति बरामद की है.
इस हाई-प्रोफाइल ठगी मामले का खुलासा करते हुए मंदसौर के एडिशनल एसपी (ASP) तेरसिंह बघेल ने बताया कि ठगी के मुख्य शिकार रतलाम जिले के कालूखेड़ा निवासी गोपाल धाकड़ हुए हैं. गोपाल धाकड़ ने अफजलपुर थाने में आकर आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने खुद को चमत्कारी और सिद्ध तांत्रिक बताकर गोपाल को अपने जाल में फंसाया था.
उन्होंने दावा किया था कि वे अपनी गुप्त सिद्धियों और तंत्र-मंत्र की शक्ति से न केवल नोटों की बारिश करा सकते हैं, बल्कि जमीन के भीतर छिपे सदियों पुराने खजाने को भी आसानी से निकाल सकते हैं. आरोपियों की चिकनी-चुपड़ी बातों और अंधविश्वास के जाल में आकर गोपाल उनके बहकावे में आ गए और अलग-अलग विशेष पूजा-पाठ के नाम पर धीरे-धीरे उनसे 12 लाख रुपये ऐंठ लिए गए.
पुलिस की प्राथमिक जांच और सायबर सेल की मदद से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना अपनी पहचान और नाम बदलकर सीधे-सादे लोगों को अपना शिकार बनाता था. उसका असली नाम नबीनुर है, लेकिन वह हिंदू बहुल इलाकों में खुद का नाम 'गोपाल' बताकर घूम रहा था ताकि लोग उस पर आसानी से भरोसा कर सकें.
एडिशनल एसपी तेरसिंह बघेल के मार्गदर्शन में पुलिस की एक विशेष टीम ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर मुख्य आरोपी नबीनुर, पृथ्वीराज, कमलेश और अफसर को गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान इनके पास से भारी मात्रा में तांत्रिक वेशभूषा, विशेष मालाएं, खोपड़ीनुमा वस्तुएं और वारदात में इस्तेमाल होने वाला अन्य संदिग्ध सामान मिला है. मामले का एक अन्य सह-आरोपी कंवरलाल अभी फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं.
इस आपराधिक घटनाक्रम के मुख्य पहलुओं और पुलिस कार्रवाई को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेप में समझा जा सकता है:
| अपराध का प्रकार | पीड़ित और मुख्य आरोपी | बरामदगी और जब्ती | वर्तमान पुलिस एक्शन |
| अंधविश्वास के नाम पर ठगी | पीड़ित: गोपाल धाकड़ (रतलाम) | 51,000 रुपये नकद नगदी राशि. | 4 आरोपी (नबीनुर, पृथ्वीराज, कमलेश, अफसर) गिरफ्तार. |
| ठगी की कुल रकम | मुख्य आरोपी: नबीनुर (उर्फ गोपाल) | 2 मोटरसाइकिलें (वारदात में प्रयुक्त). | मुख्य सह-आरोपी कंवरलाल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार. |
| अपराध का तरीका | नोटों की बारिश व गड़े धन का झांसा देना. | तांत्रिक वेशभूषा, मालाएं और माता की मूर्ति. | अन्य संभावित पीड़ितों का पता लगाने के लिए रिमांड पर पूछताछ जारी. |
गोपाल धाकड़ को पूरी तरह अपने चंगुल में फंसाने के बाद, आरोपियों ने ठगी को हकीकत का रूप देने के लिए मंदसौर के बीहड़ जंगलों और सुनसान कुओं जैसी एकांत जगहों पर तांत्रिक पूजा-पाठ का कई बार झूठा नाटक रचा. इस दौरान उन्होंने बकायदा कुछ ऐसे रासायनिक और जादुई ड्रामे भी रचे, जिससे पीड़ित गोपाल को उनकी शक्तियों पर पक्का भरोसा हो जाए.
एक रात सुनसान जंगल में पूजा के दौरान आरोपियों ने चालाकी से जमीन से पहले से छुपाई गई माता की एक मूर्ति निकाली और दावा किया कि 51 दिनों की इस विशेष और कठिन साधना के बाद ठीक इसी स्थान से भारी मात्रा में स्वर्ण मुद्राएं और दबा हुआ धन बाहर निकलेगा. इस साधना के बीच में ही विघ्न आने और भूत-प्रेत के प्रकोप का डर दिखाकर उन्होंने गोपाल से समय-समय पर लाखों रुपये वसूल किए.
जब आरोपियों को लगा कि वे गोपाल से अधिकतम राशि ऐंठ चुके हैं, तो उन्होंने ठगी की अंतिम योजना को अंजाम दिया. उन्होंने गोपाल को लाल कपड़े में बंधी हुई एक भारी पोटली सौंपी और सख्त हिदायत दी कि इसे बिना पीछे देखे सीधे अपने घर के पूजा स्थल पर ले जाकर ही खोलना, अन्यथा अनिष्ट हो सकता है.
पुलिस अब गिरफ्तार किए गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने मालवा और मेवाड़ अंचल के ग्रामीण इलाकों में और कितने भोले-भाले किसानों और नागरिकों को अपनी इस तांत्रिक ठगी का शिकार बनाया है.
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