यूसीसी समेत 14 विधेयकों पर एमपी विधानसभा में गर्माया माहौल; जानें किस बिल पर क्या है विवाद
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) समेत 14 विधेयक पेश किए। पूरक कार्यसूची पर विपक्ष के ऐतराज के बीच कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने यूसीसी में संशोधन की मांग की है।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्य सरकार ने विधायी गतिविधियों की रफ्तार तेज करते हुए एक साथ 14 महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रख दिए. इन विधेयकों में चर्चित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक और मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक जैसे बेहद अहम कानून शामिल हैं. हालांकि, सत्र के पहले ही दिन इतनी बड़ी संख्या में विधेयकों को एक साथ पेश किए जाने पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रक्रियागत सवाल खड़े कर दिए, जिसे सरकार और विधानसभा अध्यक्ष ने पूरी तरह नियमों के अनुरूप करार दिया.
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार द्वारा अनुपूरक कार्यसूची के माध्यम से 14 विधेयकों को पटल पर रखने से हंगामा खड़ा हो गया. कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों बाला बच्चन और सचिन यादव ने पूरक कार्यसूची (Supplementary Agenda) के जरिए सीधे विधेयकों को लाए जाने पर तीव्र आपत्ति जताई. विपक्षी सदस्यों का तर्क था कि इतने महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े विधेयकों की अग्रिम जानकारी और प्रतिलिपि सभी विधायकों को समय पर मिलनी चाहिए थी, ताकि वे पूरी तैयारी व अध्ययन के साथ सदन में होने वाली चर्चा में भाग ले सकें.
विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि पूरक कार्यसूची को कार्यमंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) की सहमति और सर्वसम्मति के बाद ही जारी किया गया है.
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर का वक्तव्य:
"पूरक कार्यसूची के जरिए विधेयक पेश करना संसदीय परंपराओं और नियमों के पूरी तरह से अनुकूल है. पूर्व में भी इसी स्थापित प्रक्रिया के तहत आवश्यकतानुसार विधेयक सदन में पेश किए जाते रहे हैं. सरकार की ओर से पेश विधेयकों में से आठ प्रमुख विधेयकों पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा और बहस के लिए अलग से समय निर्धारित कर दिया गया है."
सत्र के पहले दिन की विधायी स्थिति और पक्ष-विपक्ष के रुख को नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
| मुख्य विषय | विपक्ष (कांग्रेस) का रुख / मांग | सरकार व अध्यक्ष का पक्ष |
| पूरक कार्यसूची (14 बिल) | पूर्व सूचना न देने और अध्ययन का समय न मिलने का आरोप | कार्यमंत्रणा समिति की सहमति से लाया गया, प्रक्रिया नियमानुसार |
| UCC विधेयक पर चर्चा | अनुच्छेदों के तहत धार्मिक/सांस्कृतिक सुरक्षा की मांग | मंगलवार को विस्तृत बहस और चर्चा का समय तय |
| विधेयकों का वितरण | तुरंत सभी सदस्यों को प्रतियों के अध्ययन का मौका मिले | सभी विधायकों को अध्ययन हेतु प्रतियां उपलब्ध कराई गईं |
समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के पटल पर आते ही कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस पर संशोधन का प्रस्ताव पेश कर दिया है. उन्होंने मांग उठाई है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 29 के तहत संरक्षित धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं वाले अल्पसंख्यक व आदिवासी समुदायों को इस कानून के व्यापक दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए.
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का तर्क:
"संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के तहत विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों की अपनी पारंपरिक पहचान और रीति-रिवाज हैं. नए कानून को लागू करते समय ऐसे समुदायों के पारंपरिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए."
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