6 बागी सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; लोकसभा सचिवालय और सांसदों को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मंजूरी देने वाले लोकसभा स्पीकर के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर लोकसभा सचिवालय और बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। जानिए कोर्ट की टिप्पणी और पूरा मामला।
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए अपनी सहमति जता दी है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पार्टी के 6 सांसदों के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में विलय को अनुमति देने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने लोकसभा सचिवालय और पार्टी छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले बागी सांसदों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया. पीठ ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय (सचिवालय) और अन्य प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. पीठ ने कहा, "मामले में नोटिस जारी किया जाए." इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी है.
संसद के मानसून सत्र के शुरू होने से महज 2 दिन पहले, 18 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में विलय के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन 6 बागी सांसदों के आधिकारिक विलय के बाद निचले सदन (लोकसभा) में शिंदे नीत शिवसेना के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है.
इससे पूर्व, ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख कर त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया गया था.
पूरे विवाद और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का मुख्य विवरण नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक जानकारी व वर्तमान स्थिति |
| याचिकाकर्ता | शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे - UBT) |
| प्रतिवादी | लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय एवं 6 बागी सांसद |
| सुनवाई करने वाली पीठ | जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे |
| विवादित फैसला | 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को स्पीकर की मंजूरी (18 जुलाई) |
| संसदीय स्थिति | 2024 में जीते कुल 9 सांसद; 6 अलग होकर शिंदे गुट में गए |
| सुप्रीम कोर्ट का निर्देश | सभी पक्षों को नोटिस जारी; अगली सुनवाई 2 हफ्ते बाद |
सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने राजनीतिक रुझानों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि जिस तरह से सांसदों के विलय को मान्यता दी गई है, वह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक चिंताजनक मिसाल कायम कर रहा है.
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र के भीतर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के टिकट पर कुल 9 सांसद चुनकर संसद पहुंचे थे. हालांकि, इनमें से 6 सांसदों ने मूल दल से अलग होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का दामन थाम लिया.
शिवसेना (UBT) ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि बागी सांसदों की यह हरकत संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के स्पष्ट दायरे में आती है. इसलिए इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत लोकसभा अध्यक्ष ने बिना उचित वैधानिक प्रक्रिया के उनके विलय को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)