'सेल्फी की छूट, मां दे थोड़ा एकांत'; बच्चे की कस्टडी विवाद पर जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
जबलपुर हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मामले में पिता-पुत्र की मुलाकात के लिए अनोखे निर्देश जारी किए हैं। सेल्फी लेने की अनुमति, केवल पैक्ड फूड देने और बिना सुरक्षा गार्ड के मिलने जैसी शर्तें तय की गई हैं।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने एक बच्चे की कस्टडी और पिता की मुलाकात से जुड़े संवेदनशील मामले में बेहद अनोखा और विस्तृत आदेश दिया है. अदालत ने पिता की अपने ढाई वर्षीय बेटे से मुलाकात की तारीख, समय, स्थान, खाने-पीने के सामान, फोटोग्राफी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है.
मामले की अगली औपचारिक सुनवाई 9 सितंबर 2026 को नियत की गई है.
हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि रीवा निवासी पिता विशाल (जिसका वास्तविक नाम इरशाद है) अपने बेटे से उत्तर प्रदेश के कानपुर (कल्याणपुर) स्थित किसी भी सार्वजनिक स्थान, जैसे—मॉल, पार्क या रेस्तरां में मिल सकेंगे.
यह मुलाकात 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त, 16 अगस्त और 23 अगस्त 2026 को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर अंतरिम रूप से लागू की गई है.
हाईकोर्ट ने मासूम बच्चे की सुरक्षा और किसी भी भावी विवाद को टालने के लिए कई व्यावहारिक नियम तय किए हैं:
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भोजन की शर्त: शुरुआती मुलाकातों के दौरान पिता बच्चे को केवल ब्रांडेड पैक्ड खाद्य सामग्री (Branded Packed Food) ही खिला सकेंगे.
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फोटोग्राफी: पिता को अपने मोबाइल फोन से बेटे के साथ सेल्फी लेने की अनुमति होगी, लेकिन किसी तीसरे व्यक्ति से फोटो नहीं खिंचवाई जाएगी.
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मां का सहयोग: बच्चे की मां से अपेक्षा की गई है कि वह पिता और पुत्र को कुछ समय अकेले में बातचीत करने का अवसर प्रदान करे.
अदालत द्वारा जारी शर्तों और व्यवस्थाओं का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| विषय / मापदंड | हाईकोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें |
| मुलाकात की तिथियां | 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त, 16 अगस्त व 23 अगस्त 2026 |
| समय व स्थान | सुबह 10:00 से दोपहर 3:00 बजे तक (कल्याणपुर, कानपुर के सार्वजनिक स्थान में) |
| खाद्य सामग्री | केवल ब्रांडेड पैक्ड खाद्य पदार्थ ही दिए जा सकेंगे |
| सुरक्षा प्रतिबंध | पुलिस, निजी सुरक्षा गार्ड या बाउंसर साथ ले जाना सख्त मना |
| निजता व फोटो | स्वयं के मोबाइल से सेल्फी की अनुमति; मां बातचीत के लिए एकांत देगी |
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सख्त हिदायत दी है कि पिता मुलाकात के दौरान अपने साथ कोई भी पुलिसकर्मी, निजी सुरक्षा गार्ड या बाउंसर नहीं लाएंगे, ताकि बच्चे के मन में किसी तरह का भय न पैदा हो और माहौल बिल्कुल सहज व सामान्य बना रहे.
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि "पारिवारिक और वैवाहिक विवादों के बीच बच्चे का भावनात्मक हित (Emotional Well-being) सर्वोपरि है और उसका अपने माता-पिता दोनों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बना रहना अत्यंत आवश्यक है."
दरअसल, यह मामला पति-पत्नी के बीच जारी आपसी मनमुटाव से जुड़ा हुआ है. पत्नी अनुकृति पांडे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की रहने वाली है और वर्तमान में पनकी (कल्याणपुर, कानपुर) में रह रही है.
ढाई वर्ष का मासूम बेटा फिलहाल मां की कस्टडी में है. इस वजह से रीवा निवासी पिता विशाल उर्फ इरशाद अपने बेटे से मिल नहीं पा रहा था, जिसके बाद उसने अपने अधिकार और बच्चे से मुलाकात की मांग को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट की शरण ली थी.
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