जिस आंगन में बीता बचपन, वहीं से दुल्हन बनकर विदा हुई मुस्कान—संस्था ने निभाई माता-पिता की जिम्मेदारी
भोपाल के दारुल शफकत में पली-बढ़ी अनाथ बेटी मुस्कान का साजिद अरफी के साथ धूमधाम से निकाह हुआ। संस्था ने माता-पिता की तरह विदाई देकर गृहस्थी का सामान सौंपा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक 'दारुल शफकत' परिसर में 5 सितंबर का दिन बेहद भावुक और खुशियों भरा रहा। जिस आंगन में मुस्कान ने अपना बचपन बिताया, पढ़ना-लिखना सीखा और जिंदगी के सपने बुने, उसी आंगन से वह आज दुल्हन बनकर अपने नए जीवन के सफर पर रवाना हुई। दारुल शफकत में पली-बढ़ी अनाथ बेटी मुस्कान का निकाह साजिद अरफी के साथ बेहद धूमधाम और सादगी के साथ संपन्न हुआ। दूल्हे के पहुंचने पर निकाह की तमाम रस्में पूरी की गईं, जिसके बाद साजिद ने कहा कि वे मुस्कान को कभी यह एहसास नहीं होने देंगे कि वह अनाथ थी और जिंदगी भर उसका साथ निभाकर उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनाए रखेंगे।
🏡 1912 से इंसानियत की मिसाल पेश कर रही संस्था, रिश्ता तय करने से पहले की जाती है पूरी पड़ताल
मुस्कान के लिए यह पल जितना खुशी का था, उतना ही भावुक करने वाला भी था। जिन लोगों ने उसे बचपन से अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा, उनके लिए यह विदाई किसी सगे माता-पिता जैसी ही रही। दारुल शफकत समिति और बिलकीसिया नर्सिंग होम ने मुस्कान की परवरिश और शिक्षा के साथ उसकी शादी की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि रिश्ता तय करने से पहले दूल्हे और उसके परिवार की पूरी पड़ताल की जाती है ताकि बेटी को एक सुरक्षित और खुशहाल घर मिल सके। साथ ही, विदाई के वक्त मुस्कान को गृहस्थी का जरूरी सामान, कपड़े और बर्तन उपहार स्वरूप दिए गए ताकि वह आत्मविश्वास के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर सके। वर्ष 1912 से लगातार सेवा कार्य कर रही यह संस्था आज भी बेसहारा बच्चों का सहारा बन रही है।
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