जबलपुर के होटल, अस्पताल और मैरिज गार्डन को खुद करना होगा कचरे का निपटान; BWG नियम लागू
जबलपुर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026' लागू कर दिया गया है। अब 100 kg से अधिक कचरा पैदा करने वाले होटल, अस्पताल और मैरिज गार्डन को खुद वेस्ट मैनेजमेंट करना होगा।
जबलपुर। शहर को स्वच्छ, सुंदर और कचरा मुक्त बनाने की दिशा में जबलपुर नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में देश भर में लागू 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026' के तहत अब शहर के बड़े संस्थानों जैसे - होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और मैरिज गार्डन को अपने परिसर से निकलने वाले कचरे का निष्पादन स्वयं वैज्ञानिक तरीके से करना होगा.
स्वच्छता व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब शहर में 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (BWG) प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है.
शुक्रवार को भंवरताल स्थित संस्कृति थिएटर में नगर निगम द्वारा एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें शहर के लगभग 150 होटल, अस्पताल और मैरिज गार्डन संचालकों एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से नए नियमों की विस्तृत जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान निगमाध्यक्ष रिंकू विज, एमआईसी सदस्य राम सोनकर और डॉ. सुभाष तिवारी भी मंचासीन रहे.
कार्यशाला में स्पष्ट किया गया कि शहर के सभी बड़े संस्थानों को 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (BWG) केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा.
पंजीयन के साथ-साथ कचरे का वैज्ञानिक निष्पादन करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त करना होगा. यदि कोई संस्थान नियम का उल्लंघन करता है, लापरवाही बरतता है या पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज करता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
नए नियमों के अंतर्गत संस्थानों के चयन और वेस्ट सेग्रीगेशन के मानकों की जानकारी नीचे तालिका में दी गई है:
| मानदंड / श्रेणी | नियम और विवरण |
| बल्क वेस्ट जनरेटर का दायरा | 20,000 वर्गमीटर या अधिक निर्मित क्षेत्र, रोजाना 100 kg+ कचरा, या 40,000 लीटर+ पानी खपत |
| गीला कचरा (Wet Waste) | रसोई का कचरा, बचा भोजन, फल-सब्जियों के छिलके (परिसर में ही कंपोस्टिंग अनिवार्य) |
| सूखा कचरा (Dry Waste) | प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु (अधिकृत रिसाइक्लिंग एजेंसी को देना होगा) |
| सैनिटरी कचरा | डायपर, सैनिटरी नैपकिन (सुरक्षित पृथक्करण एवं निपटान) |
| विशेष देखभाल कचरा (Hazardous/E-Waste) | पुरानी बैटरियां, बल्ब, एक्सपायर्ड दवाइयां एवं ई-कचरा |
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि जबलपुर शहर को 'गार्बेज फ्री सिटी' (Garbage Free City) बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सभी व्यावसायिक संचालकों से सिंगल यूज प्लास्टिक, पॉलिथीन और पाउच आइटम का उपयोग पूरी तरह बंद करने की अपील की. उन्होंने बताया कि अदालत के निर्देशानुसार जिला प्रशासन को हर 15 दिन (पाक्षिक) में अनुपालन रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजनी होगी.
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने स्पष्ट किया कि बड़े व्यावसायिक संस्थान अब अपना कचरा सीधे नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकते. उन्हें अनिवार्य रूप से कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर (Segregate) अधिकृत एजेंसियों या अपने स्तर पर ही निस्तारित करना होगा.
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