सागर के 217 गांवों की बदली तस्वीर: 'एकल अभियान' से नशामुक्ति और शिक्षा की नई पहल

मध्य प्रदेश के सागर जिले में 'एकल अभियान' ने 217 गांवों की तस्वीर बदल दी है। ग्रामीण नशा छोड़कर शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण और उन्नत कृषि से जुड़ रहे हैं।

Jul 25, 2026 - 12:24
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सागर के 217 गांवों की बदली तस्वीर: 'एकल अभियान' से नशामुक्ति और शिक्षा की नई पहल

सागर: जिले के 217 गांवों में पिछले सात सालों से चल रहे एक अभियान ने इन गांवों की दिशा और दशा बदल दी है। ग्रामीण जहां पर्यावरण का महत्व समझ रहे हैं, वहीं नशे की बुराईयों से रूबरू होकर नशा से तौबा कर रहे हैं। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पढ़ाई के साथ संस्कार की अलग से पाठशाला लगाई जा रही है। इसके अलावा ग्रामीण उन्नत कृषि, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक कर्तव्यों को भी बखूबी समझ रहे हैं। दरअसल, इन गांवों में पिछले सात सालों से 'एकल अभियान' के तहत यह बदलाव आया है। हर पंचायत में एक आचार्य और आचार्या की नियुक्ति की गई है, जो गांवों में बच्चों और बुजुर्गों से संपर्क करके उन्हें अभियान से जोड़ते हैं और बदलाव की कोशिश करते हैं। इसके सकारात्मक परिणाम अब नजर आने लगे हैं।

💡 क्या है 'एकल अभियान'?

सागर जिले में करीब सात साल पहले शुरू किए गए इस अभियान के तहत 217 गांवों में बदलाव की बयार चल रही है। इन गांवों में सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकलती है, तो शाम को बुजुर्ग भजन और संस्कार गीत गाते हुए नजर आते हैं। स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए शाम के वक्त संस्कार की पाठशाला लगाई जाती है, जिसमें संस्कारों के साथ पहाड़ा और अक्षरज्ञान सिखाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए उनके जन्मदिन पर पौधरोपण कराया जाता है। इस पौधे को बड़ा करने की जिम्मेदारी बच्चे और अभियान से जुड़े आचार्य और आचार्या संभालते हैं। नशामुक्ति के भी काफी सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं और करीब 10 हजार ग्रामीणों ने अलग-अलग तरह के नशे से तौबा की है।

🏫 स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए 'एकल विद्यालय'

अभियान के जिलाध्यक्ष एडवोकेट मनोज भायजी बताते हैं कि, "अभियान के तहत हम लोग हर पंचायत में एक आचार्य और एक आचार्या की नियुक्ति करते हैं। इनकी जिम्मेदारी होती है कि वे गांव में एक-एक परिवार को चिन्हित करें और उनसे जुड़ें। वे घरों तक पहुंचते हैं और सबसे पहले बुजुर्गों से संवाद करते हैं। उनको पढ़ाई का महत्व समझाकर, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को अभियान से जोड़ने के लिए तैयार करते हैं। बच्चों को एकल विद्यालय में शाम के वक्त बुलाया जाता है और पढ़ाई कराई जाती है। उनको व्यावहारिक शिक्षा के साथ-साथ अक्षरज्ञान, गणित, संस्कार, अनुशासन, पर्यावरण और स्वच्छता का महत्व समझाया जाता है।"

🚫 नशा छुड़वाने के लिए लगातार एक महीने संवाद

एकल विद्यालय जूना के आचार्य महेश पटेल बताते हैं, "ग्रामीणों को नशा छुड़वाने के लिए भी अभियान के तहत परिवारों को चिन्हित किया जाता है और ऐसे परिवारों से लगातार एक महीने तक संपर्क किया जाता है। घर में सब लोगों के साथ बैठकर नशे से होने वाले शारीरिक, आर्थिक और पारिवारिक नुकसान के बारे में बताया जाता है। ऐसे लोगों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़कर नशा छुड़वाने का प्रयास किया जाता है। उन्हें सुबह की प्रभात फेरी और शाम की भजन संध्या में शामिल किया जाता है। लगातार आध्यात्मिक और सकारात्मक माहौल के कारण अब तक करीब 10 हजार लोगों ने अलग-अलग तरह के नशे से तौबा कर ली है।"

🌱 जन्मदिन के जरिए बच्चों को पर्यावरण से जोड़ा

जिलाध्यक्ष मनोज भायजी बताते हैं कि, "बच्चों को पर्यावरण से जोड़ने के लिए एकल विद्यालय के जरिए अब तक 5 हजार 600 बच्चों को जोड़ा गया है। इन बच्चों के जन्मदिन पर केक काटने के साथ एक पौधा लगवाया जाता है और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी बच्चों को ही दी जाती है। बच्चे इसके जरिए पर्यावरण के महत्व को बहुत अच्छी तरह समझ रहे हैं।"

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