दतिया विधानसभा उपचुनाव में सियासी घमासान, पिछड़ा वर्ग बना सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर
दतिया विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक पिछड़ा वर्ग है, जिसे साधने के लिए दोनों दल रणनीति बना रहे हैं।
ग्वालियर। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों का भी एक बड़ा अखाड़ा बन गया है। दोनों ही प्रमुख दल अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा वोट बैंक होने के कारण पूरी चुनावी रणनीति के केंद्र में बना हुआ है।
🏛️ कांग्रेस की परंपरागत सीट पर भाजपा की पैनी नजर
दतिया विधानसभा सीट लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी का एक मजबूत गढ़ रही है। हालांकि, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस सीट को कांग्रेस से छीनकर भाजपा के पाले में डाल दिया था, लेकिन बाद के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी कर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब इस आगामी उपचुनाव में भाजपा एक बार फिर इस महत्वपूर्ण सीट पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल खुद इस पूरे चुनावी अभियान और रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। पार्टी की मुख्य कोशिश सामान्य वर्ग के साथ-साथ पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक अपनी सीधी पहुंच मजबूत करने की है।
👥 पिछड़ा वर्ग बना सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर
दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या करीब दो लाख है। इनमें अकेले पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख नौ हजार है, जो कुल मतदाताओं का 50.7 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, अनुसूचित जाति के मतदाता 23.8 प्रतिशत, सामान्य वर्ग 17.6 प्रतिशत, मुस्लिम मतदाता 4.4 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के मतदाता 2.9 प्रतिशत हैं। इन्हीं जटिल सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए दोनों ही दलों ने अपने चुनाव प्रचार की दिशा तय की है।
🎯 भाजपा ने दिग्गजों को सौंपी सामाजिक समीकरण साधने की जिम्मेदारी
पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा ने सांसद भारत सिंह कुशवाह को दतिया का प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ अपेक्स के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र पाल और उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह सहित कई बड़े नेता गांव-गांव जाकर संपर्क अभियान चला रहे हैं। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के झांसी से ताल्लुक रखने वाले यादव समाज के नेता भी चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के राजनीतिक प्रभाव का भी भाजपा पूरा उपयोग कर रही है। पार्टी पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा करा चुकी है, और जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में भव्य रोड शो करने वाले हैं। अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया और पूर्व मंत्री इमरती देवी मोर्चा संभाले हुए हैं। वहीं, सामान्य वर्ग में अपना प्रभाव और मजबूत करने के लिए पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया और ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी विभिन्न सामाजिक बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं, जबकि भाजपा के संभागीय प्रभारी निशांत खरे दतिया में लगातार कैंप कर रहे हैं।
⚖️ कांग्रेस की रणनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां
दूसरी ओर, कांग्रेस भी लगातार इन सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उसे कुछ अंदरूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जबकि पिछड़े वर्ग के बीच राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह लगातार प्रचार कर रहे हैं।
हालांकि कांग्रेस के कई दिग्गज नेता दतिया का दौरा कर रहे हैं, लेकिन वार्ड और बूथ स्तर पर संगठन की कमजोरी के कारण उनका जमीनी प्रभाव कई जगह सीमित दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद पार्टी को पूरी उम्मीद है कि अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाता एक बार फिर एकजुट होकर उसका साथ देंगे।
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