मध्य प्रदेश में किसानों का उग्र आंदोलन जारी, कृषि मंत्री के साथ देर रात हुई बातचीत बेनतीजा, भोपाल के स्कूल बंद
मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसान भोपाल में धरने पर बैठे हैं, जिसके चलते स्कूल बंद किए गए हैं।
मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब बेहद तेज और आक्रामक होता जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के साथ किसान नेताओं की देर रात तक चली लंबी बातचीत आखिरकार बेनतीजा साबित हुई, जिसके बाद नाराज किसान रात से ही धरने पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं मान ली जातीं, तब तक वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे। किसानों के इस भारी विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राजधानी भोपाल में आज कई प्रमुख स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
🚜 भोपाल में सुरक्षा कड़ी, तीन बैरिकेड पार कर पहुंचे किसान
सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। हालांकि किसानों का यह आंदोलन मंगलवार को पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन अब यह अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गया है। प्रदेश के दूर-दराज के अलग-अलग जिलों से पैदल मार्च करते हुए सैकड़ों किसान राजधानी पहुंच गए और बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान किसानों ने रास्ते में पुलिस द्वारा लगाए गए 3 सुरक्षा बैरिकेड्स भी पार किए, हालांकि पूरे मार्च के दौरान कहीं भी हिंसा या टकराव की कोई अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई।
🌾 केंद्र सरकार से मूंग की खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग
इस पूरे आंदोलन का मुख्य मुद्दा ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और किसानों की अन्य लंबित मांगें हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार उनकी इन सभी मांगों पर ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं ले लेती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी को लेकर केंद्र सरकार से खरीद का कोटा और लक्ष्य बढ़ाने का आग्रह किया है। राज्य सरकार की ओर से 14 मई और 3 जुलाई को भारत सरकार के पास 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन इसके विपरीत केंद्र की तरफ से प्रदेश के लिए केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन का ही लक्ष्य स्वीकृत किया गया। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा तय किए गए आंशिक लक्ष्य के लिए धन्यवाद तो ज्ञापित किया है, लेकिन साथ ही किसानों के हित में शेष बचा हुआ लक्ष्य भी जल्द बढ़ाने का अनुरोध दोहराया है।
📊 आंकड़े: रकबा, उत्पादन और पंजीयन की स्थिति
केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस वर्ष राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग का कुल रकबा 14.30 लाख हेक्टेयर रहा है। प्रदेश में औसत उत्पादकता 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान लगाया गया है, जिससे कुल उत्पादन लगभग 20.16 लाख मीट्रिक टन तक होने की संभावना है।
इसके मुकाबले राज्य में सरकारी खरीद के लिए करीब 8 लाख मीट्रिक टन मूंग उपलब्ध रहने का अनुमान जताया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 3.47 लाख किसानों ने इसके लिए अपना पंजीयन कराया है, लेकिन इनमें से महज 82 हजार किसानों से ही अभी तक मूंग की खरीदी की जा सकी है।
🍲 पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं विभिन्न जिलों के किसान
किसानों की लंबी और पक्की तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धरना स्थल पर खुद किसान अपनी दाल-बाटी बनाते हुए नजर आए। किसानों का कहना है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है, लेकिन जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की अगुवाई में चलाए जा रहे इस आंदोलन में किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग की 100% सरकारी खरीद, खरीदी का कोटा बढ़ाना, समर्थन मूल्य पर पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करना, खरीदी और भुगतान में आ रही अनावश्यक देरी को समाप्त करना, खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और प्राकृतिक आपदाओं से खराब हुई फसलों का उचित मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं का स्थायी समाधान करने की भी जोरदार मांग की जा रही है।
👮♂️ पुलिस प्रशासन का बयान: स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
किसान नेताओं का तर्क है कि सीमित खरीदी के कारण बड़ी मात्रा में मूंग समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पा रही है, जिसकी वजह से किसानों को मजबूरन खुले बाजार में बेहद कम दामों पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। इसी मुख्य समस्या को लेकर नर्मदापुरम से भोपाल तक यह पैदल मार्च निकाला गया है।
इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा ने बयान देते हुए कहा है कि किसानों का यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। पुलिस की तरफ से किसी भी प्रकार का कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया है। किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत लगातार जारी है और उनकी सभी जायज मांगों पर चर्चा हो रही है। फिलहाल किसी भी तरह के तनाव की कोई बात नहीं है। शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या न हो, इसके लिए पुलिस ने पहले ही रूट डायवर्ट कर दिए हैं ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो।
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