बिजली-पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरीं आवासीय विद्यालय की छात्राएं, प्रशासन ने दिया आश्वासन

शहडोल जिले में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर स्कूली छात्राओं ने 30 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला। प्रशासन के आश्वासन के बाद छात्राएं वापस लौटीं।

Jul 31, 2026 - 12:38
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बिजली-पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरीं आवासीय विद्यालय की छात्राएं, प्रशासन ने दिया आश्वासन

शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से स्कूली छात्राओं की जागरूकता और व्यवस्थाओं के खिलाफ उनके अनोखे विरोध प्रदर्शन की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। यहाँ स्कूली छात्राएं 'जेन जी' (Gen Z) अंदाज में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर पड़ीं। ये सभी छात्राएं बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सीधे कलेक्टर से संवाद करने के लिए पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर निकल पड़ीं, जिसकी दूरी हॉस्टल से लगभग 30 किलोमीटर थी। हालांकि, जिला प्रशासन ने बीच रास्ते में ही मुस्तैदी दिखाते हुए छात्राओं को रोका और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा देकर उन्हें वापस छात्रावास भेज दिया।

🚶‍♀️ बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर स्कूली छात्राओं का 30 किमी पैदल मार्च

यह पूरा मामला शहडोल जिले के बुढार विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम कटकोना स्थित 'माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिषद' का है। गुरुवार के दिन यहाँ की छात्राएं बिजली, पेयजल और अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान होकर एकजुट हो गईं और अपने आवासीय परिसर से बाहर निकल आईं।

अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म में ये सभी स्कूली छात्राएं हाथों में बैनर-पोस्टर के बिना ही सीधे जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय की तरफ पैदल ही रवाना हो गईं। छात्राओं का कहना था कि, जब बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बाद भी उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ, तो अब उनके पास अपनी बात सीधे कलेक्टर साहब के सामने रखने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

🛑 प्रशासन की मुस्तैदी, बीच रास्ते में छात्राओं को रोककर सुनी समस्याएं

जैसे ही इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के पैदल मार्च की सूचना जिला प्रशासन तक पहुँची, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँच गए।

अधिकारियों ने सड़क पर ही छात्राओं से लंबी चर्चा की, उनकी सभी समस्याओं को बहुत गंभीरता से सुना और उन्हें जल्द से जल्द सभी समस्याओं के स्थायी समाधान का पूरा भरोसा दिलाया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने पर छात्राएं संतुष्ट हुईं और शांतिपूर्वक वापस अपने आवासीय परिसर की ओर लौट गईं।

📚 बिजली, पानी के साथ एक लोकप्रिय शिक्षक को यथावत रखने की भी मांग

छात्राओं ने प्रशासन के सामने केवल बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की ही मांग नहीं रखी, बल्कि इसके साथ ही उन्होंने एक विशेष शिक्षक को उसी स्कूल में यथावत रखे जाने की भी पुरजोर मांग की। छात्राओं का तर्क था कि संबंधित शिक्षक के बेहतरीन मार्गदर्शन की वजह से ही विद्यालय का परीक्षा परिणाम लगातार शानदार रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया है कि छात्राओं की इन सभी समस्याओं का स्थायी समाधान अब सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसके अलावा, भविष्य में सुरक्षा को लेकर इस प्रकार की कोई भी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए हॉस्टल प्रबंधन को भी कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

🚨 बच्चियां कैंपस से बाहर कैसे आईं? लापरवाही बरतने वाले गार्ड को मिलेगा नोटिस

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग शहडोल, आनंद राय सिन्हा ने बताया कि, ''सूचना मिलते ही मात्र 15 मिनट के भीतर ही हम लोग मौके पर पहुँच गए थे। हमने प्रिंसिपल से कहा कि स्टाफ और बच्चों को वहीं रोकें, बच्चों के लिए इतनी दूर पैदल आना कतई संभव और सुरक्षित नहीं है। मैंने कलेक्टर साहब से अनुरोध किया कि वे खुद वहां आ जाएंगे, सुरक्षा कारणों से हमारा सारा स्टाफ भी वहाँ मौजूद था।''

उन्होंने आगे कहा कि, ''फिर भी जिस तरह से बच्चियां बिना अनुमति के कैंपस से बाहर आ गईं, इसे लेकर मैं हॉस्टल के गार्ड को निश्चित तौर पर कारण बताओ नोटिस जारी करूँगा। यदि उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उसे सख्त रूप से पेनलाइज्ड (दंडित) किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बच्चों को परिसर से बाहर आने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि यहाँ बहुत सारी बच्चियां हैं और अगर बच्चे इस तरह बिना माता-पिता या प्रिंसिपल की अनुमति के बाहर जाने लगेंगे, तो कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।''

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