गुना के जंगल में मिला एक पैर कटे तेंदुए का शव, नाखून गायब होने से वन्यजीव तस्करों पर शक
मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक पैर कटे और बिना नाखूनों वाले तेंदुए का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। वन विभाग और डॉग स्क्वॉड मामले की जांच कर रहे हैं।
गुना : मध्य प्रदेश के गुना जिले से वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहाँ के भदौरा गांव के घने जंगलों में एक पैर कटे हुए तेंदुए का शव बरामद किया गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। गुना वन मंडल के अंतर्गत आने वाले उत्तर वन परिक्षेत्र में मिले इस तेंदुए के शव के पंजे और नाखून काटे जाने के स्पष्ट निशान भी पाए गए हैं।
वन विभाग को अपनी प्रारंभिक जांच में यह गहरी आशंका है कि तस्करों द्वारा इस तेंदुए का बेरहमी से शिकार करने के बाद इसके नाखून और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को काट कर निकाल लिया गया है। ऐसी प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि वन्यजीवों के अंगों की अवैध तस्करी के काले कारोबार के चलते ही इस तेंदुए का शिकार किया गया है।
🐕 डॉग स्क्वॉड ने छाना पूरा जंगल, वन विभाग जुटा रहा पुख्ता सबूत
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने डॉग स्क्वॉड (Dog Squad) की मदद से पूरे जंगल में सघन सर्चिंग अभियान चलाया और मृत तेंदुए के शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद तेंदुए के शव को सुरक्षित पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है।
इस घटना की जानकारी देते हुए गौ सेवक व वन्य जीव प्रेमी मोनू ओझा ने बताया कि, ''ग्रामीणों के माध्यम से हमें सूचना मिली थी कि जंगल के भीतर एक तेंदुए का शव पड़ा हुआ है। जैसे ही हमें इसकी जानकारी प्राप्त हुई, मैं और मेरे साथी तुरंत मौके पर पहुँचे। इसके बाद हमने जिला कलेक्टर किशोर कन्याल जी और गुना एसपी हितिका वासल को इस पूरी घटना से अवगत कराया, जिसके बाद से आगे की जांच लगातार जारी है।''
⚖️ वन्यजीवों के अवैध शिकार पर हो सकती है 7 साल की कड़ी सजा
प्रमुख वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के अनुसार, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत किसी भी संरक्षित वन्यजीव का शिकार करने पर लगभग 7 साल तक की कैद और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है, और यह एक गंभीर गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।
इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर कब तक मूक और बेजुबान वन्यजीवों का इस तरह से शिकार होता रहेगा? क्या अपराधियों और शिकारियों के दिलों से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है?
📋 वन विभाग कर रहा है मामले की जांच, डीएफओ सौंपेंगे रिपोर्ट
इस संपूर्ण घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि, ''हमें इस घटना की सूचना मिल चुकी है और इससे जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। प्रशासनिक टीमों के साथ-साथ वन विभाग की विशेष टीमों को भी तत्काल मौके पर भेजा गया था। वन विभाग द्वारा इस पूरे मामले की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है और जिला वन अधिकारी (DFO) जल्द ही इस पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।''
हालांकि, जब इस संवेदनशील संबंध में डीएफओ से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर वन विभाग की नाइट पेट्रोलिंग और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, कि क्या रात के वक्त वन कर्मियों द्वारा जंगलों में नियमित गश्त नहीं की जा रही है, जिसके चलते शिकारी इतने बेपरवाह होकर ऐसी वारदातों को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं?
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)