मंडला जेल में कैदियों को दी जा रही कंप्यूटर शिक्षा, सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़ेंगे बंदी
मंडला जिला जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है। अब तक 35 बंदी इस प्रशिक्षण का लाभ उठा चुके हैं। जानिए पूरी खबर।
मंडला: एक जमाने में जेलों को केवल सजा और प्रताड़ना का प्रतीक माना जाता था, लेकिन समय के साथ अब देश और प्रदेश की जेलों में कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए कई तरह के सकारात्मक और सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इसी दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए मध्य प्रदेश के मंडला जिला जेल में बंदियों को कंप्यूटर शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया गया है। इस सराहनीय कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम से अब तक कुल 35 बंदी पूरी तरह लाभान्वित हो चुके हैं।
💻 मंडला जिला जेल में बंदियों को दिया जा रहा आधुनिक कंप्यूटर प्रशिक्षण
मंडला जेल अधीक्षक संजय सहलाम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, ''मंडला जिला जेल में विभिन्न सुधारात्मक गतिविधियों के अंतर्गत कैदियों को आधुनिक तकनीक और शिक्षा से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।''
नैनपुर की एक स्थानीय सामाजिक संस्था के सहयोग से मंडला जेल को कुल 10 नए कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही, कैदियों को सिखाने के लिए एक विशेष और प्रशिक्षित कंप्यूटर शिक्षक की व्यवस्था भी की गई है, जो प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक नियमित रूप से बंदियों को कंप्यूटर का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि प्रशिक्षण के इस विशेष सत्र के दौरान बंदियों को हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग, एमएस वर्ड (MS Word), एमएस एक्सेल (MS Excel) सहित कंप्यूटर से जुड़ी तमाम बुनियादी और जरूरी जानकारियां सिखाई जा रही हैं। जेल में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब कई बंदी कंप्यूटर पर सामान्य कामकाज करने में पूरी तरह सक्षम हो चुके हैं।
🛠️ तकनीकी ज्ञान कैदियों को समाज में रोजगार प्राप्त करने में बनेगा मददगार
जेल प्रशासन का यह स्पष्ट मानना है कि अपनी सजा की अवधि पूरी होने के बाद जब ये बंदी जेल से रिहा होकर वापस सामान्य समाज में लौटेंगे, तब यह आधुनिक तकनीकी ज्ञान उन्हें आसानी से रोजगार प्राप्त करने और एक सम्मानजनक जीवन जीने में बेहद मददगार साबित होगा।
मंडला जेल में पहले से ही सुसज्जित लाइब्रेरी, योग कक्षाएं, खेलकूद गतिविधियां और कौशल विकास के अन्य पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, और अब इन सबके साथ कंप्यूटर शिक्षा भी इस सुधारात्मक अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
🗣️ बंदियों की जुबानी: सीख रहे हैं नई स्किल्स, बाहर जाकर मिलेगी मदद
प्रशिक्षण ले रहे बंदियों का कहना है कि, ''जेल के अंदर हमारे लिए लाइब्रेरी की भी बेहतरीन सुविधा है और अब कंप्यूटर सीखने का शानदार अवसर भी मिल रहा है।''
कैदियों का मानना है कि यहाँ हमें किताबों से वैचारिक ज्ञान तो मिल ही रहा है, साथ ही हम कंप्यूटर चलाना भी सीख रहे हैं। जेल से बाहर निकलने के बाद यह शिक्षा हमारे लिए रोजगार दिलाने और जीवन को नए सिरे से शुरू करने में बहुत उपयोगी साबित होगी।
🎯 जेल को प्रताड़ना शिविर नहीं, बल्कि एक आदर्श 'सुधार गृह' के रूप में देखना उद्देश्य
जेल अधीक्षक संजय सहलाम ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि, ''जेल परिसर में प्रतिदिन नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, और अब तक कुल 35 बंदियों को सफलतापूर्वक कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा चुका है।''
हमारा मुख्य उद्देश्य कैदी बंदियों को पूरी तरह प्रशिक्षित करना है। जेल के भीतर ही लाइब्रेरी की उन्नत व्यवस्था बनाई गई है, और विभिन्न कोर्सों के माध्यम से डिप्लोमा कोर्स भी कराए जा रहे हैं ताकि जब कोई बंदी अपनी सजा पूरी करके बाहर जाए, तो वह समाज की मुख्यधारा के साथ दोबारा जुड़ सके। हमारा मूल उद्देश्य यही है कि जेल को कभी भी प्रताड़ना शिविर के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे और आदर्श 'सुधार गृह' के रूप में पहचाना जाए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)