'समान पद, समान कार्य फिर अलग वेतन क्यों?'; हाई कोर्ट ने भोपाल गैस राहत विभाग के प्रमुख सचिव को थमाया नोटिस
संविदा मेडिकल ऑफिसर के समान पद और कार्य के बावजूद अलग वेतन पर जबलपुर हाई कोर्ट सख्त। भोपाल गैस राहत विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने समान पद और समान कार्य के बावजूद संविदा मेडिकल ऑफिसरों को अलग-अलग वेतन दिए जाने के मामले में भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।
न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव, संचालक और सहायक संचालक को चार सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
🩺 2021 से कार्यरत डॉक्टर को 64 हजार, नई भर्ती में 88 हजार वेतन: याचिकाकर्ता ने दर्ज कराई आपत्ति
भोपाल निवासी डॉक्टर महेंद्र सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में अधिवक्ता सोनेलाल बर्मन ने पक्ष रखा।
याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2021-22 से भोपाल गैस राहत डिस्पेंसरी में संविदा मेडिकल ऑफिसर के पद पर निरंतर कार्यरत हैं और उन्हें प्रतिमाह ₹64,000 वेतन दिया जा रहा है। जबकि, विभाग ने 7 जुलाई, 2026 को संविदा मेडिकल ऑफिसर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए नया विज्ञापन जारी किया, जिसमें मासिक वेतन ₹88,506 निर्धारित किया गया है। इस प्रकार समान पद पर पहले से कार्यरत याचिकाकर्ता को मिल रहे वेतन और नए विज्ञापन में निर्धारित राशि के बीच प्रतिमाह सीधे ₹24,506 का बड़ा अंतर है।
📜 "समान कार्य का अलग वेतन संविधान के खिलाफ": विभागीय अभ्यावेदन पर कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि याचिकाकर्ता और नए विज्ञापन के तहत नियुक्त होने वाले डॉक्टर एक ही पद पर एक जैसा कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी नए विज्ञापित वेतनमान के बराबर ही लाभ मिलना चाहिए।
वेतन वृद्धि और इस विसंगति को दूर करने के संबंध में विभाग को पहले अभ्यावेदन (Representation) दिया गया था, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट में दलील दी गई कि समान कार्य के लिए अलग-अलग वेतन देना भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
📩 संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी: 4 सप्ताह में स्पष्ट करना होगा वेतन अंतर का आधार
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
अब भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग को 4 सप्ताह के भीतर कोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि समान पद पर वेतन अंतर का तार्किक आधार क्या है और याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए अभ्यावेदन पर क्या कार्रवाई की गई।
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