ईंधन खत्म होने का बहाना बनाकर नगर निगम ने शव वाहन देने से किया इनकार, 72 घंटे बाद भी नहीं हुआ दाह संस्कार

सतना में अज्ञात शव के दाह संस्कार को लेकर पुलिस और नगर निगम आमने-सामने हैं। नगर निगम के वाहनों में ईंधन न होने के कारण 72 घंटे बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है।

Aug 02, 2026 - 13:00
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ईंधन खत्म होने का बहाना बनाकर नगर निगम ने शव वाहन देने से किया इनकार, 72 घंटे बाद भी नहीं हुआ दाह संस्कार

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले से मानवता को पूरी तरह शर्मसार कर देने वाला एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ बीते तीन दिनों से एक अज्ञात व्यक्ति के शव के अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) को लेकर नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच अजीबोगरीब खींचातानी मची हुई है। अज्ञात शव पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल के मुर्दाघर (मर्चुरी) में रखा हुआ है। जब काफी प्रयास के बाद भी मृतक की कोई पहचान नहीं हो सकी, तो नियमानुसार दाह संस्कार के लिए नगर निगम को वाहन और कर्मचारियों की व्यवस्था करने के लिए कहा गया, लेकिन नगर निगम की ओर से बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला कि निगम के शव वाहनों में ईंधन (डीजल/पेट्रोल) खत्म हो चुका है।

🚶‍♂️ रामनाटोला में गंभीर हालत में मिला था व्यक्ति, उपचार के दौरान हुई थी मौत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामनाटोला इलाके में बीते 28 जुलाई को एक अज्ञात व्यक्ति अत्यंत गंभीर और अचेतन स्थिति में सड़क किनारे पड़ा हुआ मिला था।

तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मानवता दिखाते हुए उसे इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। लेकिन अस्पताल में उपचार के दौरान ही उसी दिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टर के निर्देश पर उसके शव को जिला अस्पताल की मर्चुरी में सुरक्षित रखवा दिया गया। सिटी कोतवाली पुलिस लगातार उस मृतक व्यक्ति की शिनाख्त (पहचान) करने के प्रयास में जुटी रही, लेकिन लगातार 72 घंटे बीत जाने के बाद भी उसकी पहचान का कोई सुराग नहीं लग सका।

⏳ मृत्यु के 72 घंटे बाद भी मुर्दाघर में पड़ी रही लाश, तार-तार हुई संवेदनाएं

नियमों के तहत जब तय समय सीमा में शव की शिनाख्त नहीं होती, तो पुलिस मामले को स्वतः संज्ञान में लेकर अज्ञात व्यक्ति का अंतिम संस्कार करती है। इसके लिए नगर निगम की ओर से शव वाहन और कर्मचारी उपलब्ध कराए जाते हैं।

लेकिन जब स्थानीय पुलिस ने वाहन के लिए नगर निगम से संपर्क किया, तो निगम अधिकारियों ने अजीब तर्क देते हुए कहा कि उनके किसी भी शासकीय वाहन में ईंधन नहीं है, इसलिए वे शव को मुक्तिधाम तक पहुँचाने में असमर्थ हैं। प्रशासनिक सुस्ती और विभागों की इस आपसी खींचतान के कारण जिला अस्पताल की मर्चुरी में लाश वैसे ही पड़ी रही। इस अमानवीय स्थिति के कारण इंसानियत और संवेदनाएं पूरी तरह तार-तार हो रही हैं, और मौत के तीन दिन बाद भी उस अनाथ शव का दाह संस्कार नहीं हो पा रहा है।

👨‍⚕️ सिविल सर्जन बोले- "72 घंटे तक मर्चुरी में रखा जाता है शव, पुलिस को दी जा चुकी है सूचना"

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया, "एक अज्ञात व्यक्ति गंभीर हालत में पुलिस को मिला था, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके दाह संस्कार की पूरी प्रक्रिया के लिए संबंधित पुलिस थाने को पहले ही आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया गया है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार किसी भी अज्ञात शव को 72 घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस (मर्चुरी) में सुरक्षित रखा जाता है, ताकि इस बीच यदि उसकी पहचान हो जाए, तो उसके परिजनों को शव सौंपा जा सके। फिलहाल पुलिस और नगर निगम अपने स्तर पर कागजी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।

🏢 नगर निगम की सफाई: ईंधन की फाइल पेंडिंग होने से वाहन नहीं चल पा रहे

इस प्रशासनिक लापरवाही पर सफाई देते हुए नगर निगम की डिप्टी कमिश्नर सत्यम मिश्रा ने बताया, "नगर निगम के वाहनों के ईंधन की भुगतान फाइल पेंडिंग पड़ी हुई है, जिसकी वजह से उसका भुगतान नहीं हो सका है और निगम के शासकीय वाहनों में पेट्रोल-डीजल की कमी है। हाल ही में निगम कमिश्नर का तबादला कलेक्टर के रूप में अन्य जिले में हो चुका है, इसलिए ईंधन भुगतान की यह फाइल अटकी हुई है।"

उन्होंने आगे बताया कि चूँकि हमें पुलिस पेट्रोल पंप से ईंधन मिलता है, इसलिए हमने उच्चाधिकारियों से विशेष अनुरोध किया है कि कुछ दिनों के लिए हमें उधार या आपातकालीन रूप से ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जा सके।

⛽ पुलिस विभाग का स्पष्ट तर्क: 70 लाख रुपए का भुगतान बकाया, पेट्रोल पंप बंद होने की कगार पर

इस पूरे विवाद पर पुलिस विभाग की रक्षित निरीक्षक देविका सिंह बघेल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "नगर निगम के शासकीय वाहनों में डलने वाला ईंधन हमारे पुलिस पेट्रोल पंप से ही जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि गत मई महीने से ही ईंधन का भारी भुगतान पेंडिंग चल रहा है, जिसकी कुल राशि लगभग 70 लाख रुपये तक पहुँच चुकी है।"

उन्होंने कहा कि इस बारे में निगम कमिश्नर से कई बार औपचारिक अनुरोध भी किया गया, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक बात नहीं बन पाई है। भुगतान न होने की वजह से पुलिस पेट्रोल पंप खुद वित्तीय संकट के चलते बंद होने की कगार पर आ गया है। ऐसी मजबूरियों के चलते ही हमने नगर निगम के शासकीय वाहनों को बिना भुगतान के ईंधन देने से फिलहाल इनकार किया है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है, ताकि जल्द से जल्द बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो सके।

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