रतलाम रेल मंडल में 100 प्रतिशत लागू हुआ 'कवच' सिस्टम, दिल्ली-मुंबई रूट पर घटी दुर्घटनाएं

भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेन हादसों को रोकने के लिए आधुनिक कदम उठाए जा रहे हैं। रतलाम रेल मंडल में 100% 'कवच' प्रणाली लागू हो चुकी है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आई है।

Aug 02, 2026 - 16:10
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रतलाम रेल मंडल में 100 प्रतिशत लागू हुआ 'कवच' सिस्टम, दिल्ली-मुंबई रूट पर घटी दुर्घटनाएं

रतलाम: भारतीय रेलवे में ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा को हमेशा से ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे द्वारा बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा को लेकर जितने भी आधुनिक और तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं, अब उनके बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।

इस वर्ष रेलवे द्वारा जारी किए गए दुर्घटना सूचकांक के अनुसार देश भर में रेल दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी दर्ज की गई है। इसमें सबसे बड़ा योगदान स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली यानी 'कवच', आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली और देश के प्रमुख रेल मार्गों पर लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम का है। इसकी बदौलत न केवल रेल हादसों में भारी कमी आई है, बल्कि ट्रेनों की औसत रफ्तार और समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

🚆 रतलाम रेल मंडल के अंतर्गत ट्रेनों की सुरक्षा के लिए किए गए विशेष कार्य

रतलाम रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के संपूर्ण 302 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर 'कवच' सुरक्षा प्रणाली अब पूरी तरह से कार्यशील हो चुकी है।

पंचपिपलिया से मंगल महुडी के लगभग 78 रूट किलोमीटर रेलखंड पर 'कवच' प्रणाली की सफल कमीशनिंग के साथ ही अब रतलाम रेल मंडल में 100 प्रतिशत कवच सुरक्षा प्रणाली लागू की जा चुकी है।

🛡️ डीआरएम अश्वनी कुमार बोले- शून्य दुर्घटना के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

रतलाम रेल मंडल के डीआरएम अश्वनी कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि, "यह ट्रेनों की दुर्घटनाओं को रोकने और रेलवे के 'शून्य दुर्घटना' (Zero Accident) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।"

इसके साथ ही, इस पूरे रेल खंड पर आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली का इंस्टॉलेशन और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने का कार्य भी पूरी तरह से पूरा किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर नागदा-गोधरा सेक्शन में इस वर्ष एक भी ट्रेन दुर्घटना का मामला सामने नहीं आया है। इसके अलावा, दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर आवारा पशुओं या जंगली जानवरों की वजह से कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ छह फीट ऊंची मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण भी किया गया है, जिसके कारण भी रेल हादसों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

⚡ क्या है भारतीय रेलवे का आधुनिक सुरक्षा 'कवच' सिस्टम?

'कवच' सिस्टम ट्रेनों के बीच आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्करों को रोकने की एक पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित सुरक्षा प्रणाली है।

यदि कभी दो ट्रेनें गलती से एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाएं या पीछे से टकराने का कोई भी खतरा उत्पन्न हो, तो यह स्मार्ट सिस्टम तुरंत लोको पायलट को अलर्ट भेजता है और ट्रेन के टकराने से पहले ही ऑटोमैटिक ब्रेक लगाकर उसे सुरक्षित दूरी पर रोक लेता है। यह कवच प्रणाली उच्च रेडियो फ्रीक्वेंसी (High Radio Frequency) पर कार्य करती है, जिसे अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित किया गया है।

📋 भारतीय रेलवे के वे 10 प्रमुख कार्य जो दुर्घटनाओं को रोकने में हैं अत्यंत सहायक
  1. इलेक्ट्रॉकिंग सिस्टम: मानवीय त्रुटि की संभावनाओं को कम करने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा 30 जून तक देश भर के 6,671 स्टेशनों पर स्थानों और संकेतों के केंद्रीकृत संचालन हेतु इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं।

  2. लेवल क्रॉसिंग गेट इंटरलॉकिंग: सड़क और रेल मार्ग के मिलने वाले 10,395 लेवल क्रॉसिंग (LC) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है।

  3. ट्रैक सर्किटिंग: विद्युत माध्यमों से ट्रैक पर ट्रेनों की उपस्थिति की पुष्टि करके सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 6,671 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग की व्यवस्था की गई है।

  4. विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (VCD): सभी रेलवे लोकोमोटिव में लोको पायलटों की लगातार सतर्कता सुनिश्चित करने के लिए विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं।

  5. सिग्मा बोर्ड: विद्युतीकृत क्षेत्रों में सिग्नल से दो ओएचई (OHE) मास्ट पहले स्थित मास्ट पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए जाते हैं, ताकि कोहरे के मौसम में कम दृश्यता के दौरान भी चालक दल को आगे के सिग्नल की जानकारी मिल सके।

  6. फॉग् सेफ़्टी डिवाइस (FSD): कोहरे से अत्यधिक प्रभावित रहने वाले क्षेत्रों में लोकोमोटिव पायलटों को जीपीएस (GPS) आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग गेट जैसी जगहों की सटीक दूरी का पता चल सके।

  7. आधुनिक ट्रैक मशीनें: पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 जैसी अत्याधुनिक ट्रैक मशीनों के उपयोग से ट्रैक बिछाने के कार्य का मशीनीकरण करके मानवीय भूल की संभावना को लगभग समाप्त किया जा रहा है।

  8. यूएसएफडी (USFD) परीक्षण: रेल पटरियों के भीतर छिपी आंतरिक खामियों और दोषों का समय रहते पता लगाने तथा दोषपूर्ण पटरियों को तुरंत बदलने के लिए अल्ट्रासोनिक दोष पहचान परीक्षण किए जाते हैं।

  9. पटरियों की गश्त: रेल पटरियों में किसी भी प्रकार की दरार या टूट-फूट की समय पर जांच करने के लिए रेलवे ट्रैक की नियमित रूप से गश्त कराई जाती है।

  10. ऑनलाइन निगरानी प्रणाली: ट्रैक परिसंपत्तियों की वेब-आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली (जैसे ट्रैक डेटाबेस और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम) को अपनाया गया है, ताकि रखरखाव की सही आवश्यकता तय की जा सके और इनपुट को बेहतर रूप से अनुकूलित किया जा सके।

बहरहाल, भारतीय रेलवे द्वारा आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के लगातार हो रहे इंस्टॉलेशन और सुरक्षा के प्रति बरती जा रही कड़ी सतर्कता के परिणामस्व्प पिछले कुछ वर्षों में रेलवे दुर्घटना सूचकांक को लगातार न्यूनतम स्तर पर लाने में बहुत बड़ी मदद मिली है।

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