भोपाल के पॉश इलाकों में दुकानों पर सीलिंग कार्रवाई टली, सीएम मोहन यादव के निर्देश पर समिति गठित
भोपाल के पॉश इलाकों में व्यावसायिक दुकानों पर सीलिंग कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। फिलहाल कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां और गुलमोहर जैसे पॉश और प्रमुख रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने वाले करीब साढ़े तीन हजार व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेशों और नगर निगम द्वारा की जा रही सीलिंग कार्रवाई के चलते पूरे शहर में मचे भारी हड़कंप के बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें एक बहुत बड़ा निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा और समाधान के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन कर दिया है, और फिलहाल किसी भी तरह की कठोर व दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के चलते पूरे भोपाल में लगभग 30 हजार से अधिक दुकानों पर ताले लटकने की आशंका पैदा हो गई थी।
👥 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति करेगी पूरे मामले का परीक्षण
अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया है।
यह समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विधिवत पालन में प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े नीतिगत निर्णयों, व्यावहारिक समाधानों और तमाम कानूनी नियमों का बारीकी से परीक्षण करेगी। इस समिति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, श्रम, पर्यावरण, नगर तथा ग्राम निवेश (TCP) और भोपाल नगर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह समिति सभी संबंधित पक्षों से विस्तार से चर्चा करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
🔓 राहत: अब फिर से खुल सकेंगी दुकानें, सख्त कार्रवाई पर रोक
नगर निगम द्वारा अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर समेत विभिन्न पॉश क्षेत्रों के लगभग 1,000 दुकानदारों और व्यापारियों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे और कुछ प्रतिष्ठानों को सील भी किया जाने लगा था।
व्यापारी वर्ग के लगातार विरोध और उनकी चिंता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, "जब तक यह गठित समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती, तब तक किसी भी व्यापारी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।" सरकार के इस फैसले के बाद सील या बंद कराई गई दुकानों के सोमवार से पुनः सुचारू रूप से खुलने की पूरी संभावना बन गई है।
🎭 सीलिंग का दावा बनाम ज़मीनी हकीकत: सिर्फ स्वैच्छिक अवकाश का नाटक
संयुक्त रहवासी समिति का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद नगर निगम को वास्तव में अवैध रूप से चल रही दुकानों को सील करना था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई।
आरोप है कि निगम ने सख्त सीलिंग करने के बजाय दुकानदारों से केवल 'स्वैच्छिक अवकाश' (खुद से दुकान बंद रखने) का नाटक करवाया। रहवासियों का यह भी दावा है कि दुकानों के बाहर एक ही तय फॉर्मेट के पोस्टर चस्पा करके निगम अधिकारियों को तस्वीरें भेज दी गईं, लेकिन शाम होते-होते अधिकांश दुकानें फिर से पहले की तरह खुल गईं।
📅 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होनी है अहम सुनवाई
विभिन्न रहवासी संघों ने कड़े आरोप लगाए हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दुकान संचालकों को केवल 4 अगस्त 2026 तक ही कार्रवाई से राहत का आश्वासन दिया गया है।
रहवासियों का तर्क है कि 4 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई के दौरान कथित तौर पर असत्य प्रमाण प्रस्तुत करने और अपने चहेते भू-माफियाओं को बचाने के लिए नगर निगम यह पूरा प्रशासनिक ड्रामा रच रहा है। उनका कहना है कि दुकानों के बाहर लगे इस तरह के पोस्टर इस बात का स्वतः प्रमाण हैं कि वहाँ लैंड यूज (भू-उपयोग) नियमों का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
🏢 अरेरा कॉलोनी से लेकर बावड़िया कलां तक तेज रही निगम की कार्रवाई
इससे पहले शनिवार और रविवार को आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने अपना शिकंजा कसते हुए कार्रवाई तेज कर दी थी।
अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां समेत कई इलाकों में निगम की टीमें काफी सक्रिय रहीं। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर आधिकारिक बोर्ड लगा दिए गए, जिन पर साफ-साफ लिखा था— "नगर निगम भोपाल के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।" नगर निगम अभी तक पूरे शहर में 1,018 से अधिक औपचारिक नोटिस जारी कर चुका है। लंबे समय से आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियां चलने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद निगम ने तालाबंदी की यह प्रक्रिया शुरू की थी। निगम ने अरेरा कॉलोनी और बावड़िया कलां के 19 बड़े शोरूमों और रेस्त्रां को मात्र 24 घंटे के भीतर अपनी व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह बंद करने का अंतिम नोटिस थमाया था।
💼 व्यापारियों का पक्ष: "हम नियमित रूप से दे रहे हैं सभी प्रकार के कर"
आवासीय भूखंडों व प्लॉटों पर चल रही कमर्शियल गतिविधियों को बंद कराने का यह अभियान लगभग डेढ़ महीने पहले ही शुरू किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए 15 जून को अरेरा कॉलोनी और बावड़िया कलां क्षेत्र के व्यापारियों को नोटिस थमाए गए थे।
10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने अपनी मजबूरी और पक्ष रखते हुए कहा है कि, "व्यापारी पूरी ईमानदारी और नियमितता के साथ कमर्शियल दर से बिजली का बिल, संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स), ट्रेड लाइसेंस शुल्क और जीएसटी (GST) का भुगतान कर रहे हैं।" वहीं दूसरी ओर, नगर निगम के सिटी इंजीनियर अनिल टेंटवाले का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही नियमों के तहत तालाबंदी और सीलिंग की यह कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
📢 भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने उठाई व्यापारियों के हक में आवाज
इस पूरे विवाद के बीच 'भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज' (BCCI) खुलकर व्यापारियों के समर्थन में सामने आ गया है।
चैंबर ने नगर निगम से मांग की है कि जब तक इस समस्या का कोई स्थायी और व्यावहारिक समाधान नहीं निकल आता, तब तक इस तरह की तमाम सख्त कार्रवाइयों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और शहर में 'मिक्स लैंड यूज़' (Mix Land Use) की उचित व्यवस्था लागू की जाए। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल और सचिव अजय देवनानी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि, "नगर निगम ने 17 जुलाई से व्यापारियों को केवल 10 दिन का बेहद कम समय देकर व्यवसाय पूरी तरह बंद करने या भवन को आवासीय स्वरूप में बदलने का जो निर्देश दिया है, उससे हजारों व्यापारियों और उनके माध्यम से पल रहे लाखों लोगों की आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित होगी।"
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