किचन वेस्ट से जैविक खाद और छत पर 500 पौधे; जानिए मुंबई गार्डनिंग कॉम्पिटिशन में टॉप-10 में शामिल ज्योति की कहानी

विदिशा की ज्योति सारस्वत ने 30×40 की छत पर 500 से अधिक पौधों का टेरेस गार्डन बनाया है। किचन वेस्ट खाद और सोलर लाइट से सजा यह गार्डन मुंबई गार्डनिंग कॉम्पिटिशन के टॉप-10 में चयनित हुआ है।

Sep 17, 2026 - 20:53
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किचन वेस्ट से जैविक खाद और छत पर 500 पौधे; जानिए मुंबई गार्डनिंग कॉम्पिटिशन में टॉप-10 में शामिल ज्योति की कहानी

विदिशा। शहरों में तेजी से बढ़ते सीमेंट-कंक्रीट के निर्माण के बीच हरियाली के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। लेकिन विदिशा के हरिपुरा, साकेत नगर की रहने वाली ज्योति सारस्वत ने इस समस्या का एक शानदार समाधान ढूंढा है। उन्होंने अपने घर की छत को एक ऐसे हरे-भरे मिनी जंगल और गार्डेन में बदल दिया है, जहां 500 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पौधे फल-फूल रहे हैं। सीमित जगह में तैयार किया गया यह टेरेस गार्डेन फलदार, औषधीय, सब्जियों और सजावटी पौधों का एक बेहतरीन मिश्रण है।

🥭 छत पर फल, मसाले और औषधीय पौधों की भरमार: नीम, तुलसी, तेजपत्ता से लेकर संतरा तक शामिल

ज्योति सारस्वत के मकान की छत का क्षेत्रफल करीब 30×40 वर्ग फीट है। इसमें से लगभग 10×10 वर्ग फीट में एक कमरा बना हुआ है, जबकि बाकी बची खुली जगह का उन्होंने पौधों के लिए बेहतरीन इस्तेमाल किया है।

उनके इस टेरेस गार्डेन में नीम, एलोवेरा, आंवला, तुलसी और गुड़हल जैसे औषधीय पौधों के साथ-साथ लौंग और तेजपत्ता जैसे मसालेदार पौधे भी मौजूद हैं। इसके अलावा संतरा और मिनी ऑरेंज सहित कई फलदार वृक्ष, हरी सब्जियां और रंग-बिरंगे सजावटी पौधे गार्डेन की शोभा बढ़ा रहे हैं।

👧 पिता से मिली बागवानी की प्रेरणा: पिछले 15 सालों से अकेले संभाल रही हैं पूरा गार्डन

ज्योति बताती हैं कि "प्रकृति से उनका लगाव बचपन से ही रहा है। उन्हें बागवानी की प्रेरणा अपने पिता से मिली, जिन्होंने गांव में बड़ी संख्या में फलदार वृक्ष लगाए थे।

बचपन से उनका सपना एक ऐसा बगीचा तैयार करने का था, जहां प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताए जा सकें। पिछले करीब 15 वर्षों से वह लगातार बागवानी कर रही हैं और बीज बोने से लेकर नए पौधे तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया खुद ही संभालती हैं।"

⏰ प्रतिदिन 3 घंटे पौधों की देखभाल में बीतते हैं: सुबह-शाम की मेहनत से खिलती है हरियाली

सुबह होते ही ज्योति अपने गार्डेन में पहुंच जाती हैं और प्रतिदिन लगभग तीन घंटे पौधों की सेवा-देखभाल में लगाती हैं।

वह सुबह दो घंटे और शाम को एक घंटे पौधों की सिंचाई, छंटाई, नए गमले तैयार करने और उनकी सुरक्षा का काम करती हैं। ज्योति के लिए यह केवल पौधों की देखरेख नहीं, बल्कि उनकी दिनचर्या का सबसे पसंदीदा हिस्सा है, जिसमें समय बीतने का पता ही नहीं चलता।

♻️ बाजार की रासायनिक खाद से दूरी: किचन वेस्ट से बनाती हैं जैविक खाद और नीम ऑयल का करती हैं इस्तेमाल

इस टेरेस गार्डेन की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से जैविक (Organic) होना है।

पौधों के पोषण के लिए बाजार की रासायनिक खाद के बजाय घर की रसोई से निकलने वाले गीले कचरे (किचन वेस्ट) से जैविक खाद तैयार की जाती है। इसे ड्रम में एकत्र करके करीब दो महीने में प्राकृतिक खाद में बदल दिया जाता है। पौधों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए भी नीम के तेल का उपयोग किया जाता है।

🪴 ग्रीन ग्रो बैग्स, सोलर लाइट्स और बांस का ढांचा: पर्यावरण और ऊर्जा बचत का अनूठा संगम

छत पर पौधों को व्यवस्थित रखने के लिए ज्योति ने ग्रीन ग्रो बैग्स, हैंगिंग पॉट्स और बांस से बने ढांचों का इस्तेमाल किया है।

इसके अलावा, रात में गार्डेन को रोशन करने के लिए सोलर लाइट्स लगाई गई हैं। ये लाइटें दिन में धूप से चार्ज होती हैं और रात में अपने आप जल उठती हैं। इस प्रकार गार्डेन में हरियाली के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

📻 आकाशवाणी से लेकर ऑल इंडिया लेवल तक पहचान: मुंबई गार्डनिंग प्रतियोगिता के टॉप-10 में बनाई जगह

बागवानी के प्रति ज्योति की निष्ठा केवल उनके घर तक सीमित नहीं है। वह भोपाल आकाशवाणी के 'ग्राम लक्ष्मी' कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण महिलाओं को बागवानी के टिप्स दे चुकी हैं।

इसके साथ ही वह पंजाब कृषक बैंक (ईदगाह) में महिलाओं को ट्रेनिंग भी देती हैं। हाल ही में मुंबई में आयोजित 'ऑल इंडिया लेवल गार्डनिंग प्रतियोगिता' में उनका चयन देश के टॉप-10 मालियों व बागवानों में हुआ, जहां उन्हें सम्मानित भी किया गया।

🌸 कम जगह में भी संभव है बागवानी: विशेष अवसरों पर पौधे लगाने का दिया संदेश

ज्योति का मानना है कि प्रकृति से जुड़ने के लिए बड़े बजट या बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं है।

घर की बालकनी, छत या थोड़ी सी जगह में भी पौधे लगाए जा सकते हैं। उनका संदेश है कि हर व्यक्ति को अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अन्य सामाजिक-धार्मिक अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। यदि समाज में यह आदत बन जाए, तो छोटे-छोटे प्रयास मिलकर पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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