महाकाल की नगरी में चित्रकला प्रदर्शनी; जानिए पीपल के पत्ते पर 'राम नाम' से बनी पेंटिंग की खासियत
उज्जैन में आयोजित 2 दिवसीय युवा धर्म संसद में 6 राज्यों के 50 कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स से समां बांधा। जानें नवधा भक्ति और विक्रमादित्य के नवरत्नों पर बनी कलाकृतियों के बारे में।
उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के अंतर्गत राष्ट्रीय चित्रकला, कार्यशाला और प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में देशभर से पहुंचे कलाकार नवधा भक्ति, सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्न, कालिदास की रचनाओं और षोडश संस्कार जैसे पौराणिक व ऐतिहासिक विषयों को कैनवास पर जीवंत कर रहे हैं। यहां पहुंचे 50 कलाकारों में से 17 ऐसे हुनरमंद कलाकार हैं, जिन्होंने चित्रकला की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है और उनका यह हुनर पूरी तरह गॉड गिफ्टेड है।
कार्यशाला में महाकवि कालिदास की 'अभिज्ञान शाकुंतलम', 'मेघदूत', अहिल्याबाई होल्कर की जीवन गाथा और षोडश संस्कारों पर आधारित कलाकृतियां श्रद्धालुओं और कला मर्मज्ञों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।
🏛️ 6 राज्यों से पहुंचे 50 आर्टिस्ट, पद्मश्री अद्वैतचरण ने किया उद्घाटन: MP में पहली बार हो रहा है यह आयोजन
शहर के गीता भवन में 'सेवाज्ञ संस्थानम' द्वारा आयोजित इस 2 दिवसीय युवा धर्म संसद सह राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में 6 राज्यों (मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल) के 50 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।
इन कलाकारों की उम्र 21 वर्ष से लेकर 67 वर्ष तक है। इस प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन प्रख्यात मूर्तिकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अद्वैतचरण जी ने किया।
कार्यक्रम की संयोजक अंकिता जायसवाल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का यह छठवां संस्करण है। इससे पहले काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम में इसका सफल आयोजन हो चुका है। मध्य प्रदेश में यह आयोजन पहली बार हो रहा है, जबकि वर्ष 2027 में द्वारिका में आयोजन के साथ सप्तपुरियों का यह वार्षिक चक्र संपन्न होगा।
🍃 पीपल के पत्ते पर 'राम नाम' से नवधा भक्ति और रिंग के भीतर विक्रमादित्य के नवरत्न
प्रयागराज की कलाकार प्रतिभा पांडेय ने नवधा भक्ति को अपनी कलाकृति का आधार बनाया है। उन्होंने पीपल के पत्ते के आकार में 'राम नाम' लिखकर पेंटिंग तैयार की है, जिसमें श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन को दर्शाया गया है।
वहीं, वाराणसी की 21 वर्षीय रोशनी सिंह चौहान ने सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों को एक रिंग (Ring) के भीतर कैनवास पर उकेरा है। वाराणसी की ही 60 वर्षीया पद्मिनी जसवंत मेहता ने षोडश संस्कार में शामिल 11वें 'विद्यारंभ संस्कार' को अपनी पेंटिंग के जरिए प्रस्तुत कर शिक्षा और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया है।
🔱 राजस्थान के 67 वर्षीय शंकर सिंह ने बनाया शिव का रुद्र अवतार: हनुमान जी की राम भक्ति भी कैनवास पर उतरी
राजस्थान के 67 वर्षीय वयोवृद्ध कलाकार शंकर सिंह राजावत ने बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के भगवान शिव के प्रचंड रुद्र अवतार का चित्रण किया है। चित्रकला उनके लिए किसी जुनून से कम नहीं है।
दूसरी ओर, जयपुर के 45 वर्षीय तेजपाल सिंह ने एक्रेलिक कलर्स का उपयोग करके हनुमान जी द्वारा अपना सीना चीरकर हृदय में भगवान श्रीराम को विराजमान दिखाने वाले दिव्य दृश्य को कैनवास पर उतारा है। सभी कलाकारों ने माना कि कला ईश्वर का एक अनुपम उपहार है और ऐसे राष्ट्रीय मंचों से भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
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