ग्वालियर में बारिश के दिनों में बढ़े सर्पदंश के मामले, जेएएच अस्पताल के आईसीयू में मरीजों की भारी भीड़
ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी के कारण सर्पदंश के मरीजों को जयारोग्य (JAH) अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जिससे जेएएच पर दबाव बढ़ गया है।
ग्वालियर। वर्तमान में मानसून और बारिश के इस मौसम के साथ ही सर्पदंश (सांप काटने) के मामलों में लगातार भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, लेकिन 300 बिस्तरों वाला प्रमुख मुरार जिला अस्पताल पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद मरीजों को समुचित और पूर्ण इलाज देने में पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। अस्पताल के भीतर एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom), जीवन रक्षक दवाइयां और अन्य जरूरी उपकरण पूरी तरह से उपलब्ध हैं, इसके बावजूद मेडिसिन विशेषज्ञों की भारी कमी के चलते सर्पदंश के गंभीर पीड़ितों को प्राथमिक उपचार के बाद मजबूरन जयारोग्य अस्पताल (JAH) रेफर करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में नियमानुसार चार विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं और कागजी रिकॉर्ड में भी चार डॉक्टरों की पदस्थापना दर्ज है, लेकिन वर्तमान में पूरे विभाग की जिम्मेदारी अकेले केवल एक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुकेश सिंह तोमर के कंधों पर है। ऐसे में अकेले डॉक्टर पर दबाव होने के कारण गंभीर मरीजों का सही उपचार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बारिश के इन दिनों में ग्रामीण अंचलों और खेतों में सर्पदंश के मामले सबसे तेजी से बढ़ते हैं।
इस संवेदनशील समय में जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव भी अत्यधिक बढ़ जाता है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों के खाली होने के कारण अधिकांश गंभीर मरीजों को सीधे मेडिकल कॉलेज के जयारोग्य अस्पताल भेजना मजबूरी बन जाता है। इस प्रक्रिया में इलाज शुरू होने में होने वाली देरी के कारण मरीज और उनके परिजन తీవ్ర मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलते हैं।
🏥 जेएएच अस्पताल पर लगातार बढ़ रहा गंभीर मरीजों का अतिरिक्त दबाव
मुरार जिला अस्पताल से लगातार रेफर होकर आने वाले सर्पदंश के इन मरीजों का सीधा और भारी असर शहर के जयारोग्य अस्पताल पर साफ दिखाई दे रहा है।
हाल ही में हजार बिस्तर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में केवल जुलाई माह के दौरान ही लगभग 500 सर्पदंश पीड़ित इलाज के लिए पहुँचे, जिनमें से दुर्भाग्यवश 15 मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी। स्थिति यह है कि हाल ही में एक ही दिन में 17 नए सर्पदंश के गंभीर मरीजों को सीधे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। मरीजों की इस निरंतर बढ़ती संख्या के कारण अब बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर भी भारी अतिरिक्त दबाव बनने लगा है।
⚠️ विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती
चिकित्सा विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि सांप काटने की दुर्घटनाओं में शुरुआती कुछ घंटे मरीज की जान बचाने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और निर्णायक होते हैं।
यदि जिला अस्पताल के स्तर पर ही मेडिसिन विशेषज्ञ हर वक्त उपलब्ध रहें, तो बड़ी संख्या में ऐसे मरीजों का प्राथमिक इलाज वहीं पर पूरी तरह संभव हो सकता है, जिससे बड़े अस्पतालों में मरीजों को रेफर करने की आवश्यकता में काफी कमी आ सकती है। फिलहाल, डॉक्टरों की यह भयंकर कमी ही इस पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी और कमजोर कड़ी बनी हुई है।
💉 एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध, फिर भी टर्सरी केयर के लिए करना पड़ रहा है रेफर
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि संस्थान में एंटी स्नेक वेनम और अन्य सभी आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मरीजों के अस्पताल पहुँचते ही उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दे दिया जाता है, लेकिन ऐसे मामलों में पीड़ितों को उच्च श्रेणी की 'टर्सरी केयर' (Tertiary Care) की सख्त आवश्यकता होती है, जिसके अभाव में मजबूरन पीड़ित को जयारोग्य अस्पताल रेफर करना ही पड़ता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)