देश का पहला सरकारी हम्माम सेंटर भोपाल में बनेगा, पीडब्ल्यूडी की सुस्ती से कागजों में अटका प्रोजेक्ट

भोपाल के यूनानी मेडिकल कॉलेज में देश का पहला अत्याधुनिक सरकारी हम्माम सेंटर बनने जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की डीपीआर में देरी के कारण प्रोजेक्ट फिलहाल कागजों में अटका है।

Aug 05, 2026 - 12:57
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देश का पहला सरकारी हम्माम सेंटर भोपाल में बनेगा, पीडब्ल्यूडी की सुस्ती से कागजों में अटका प्रोजेक्ट

भोपाल। कलियासोत की खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित हकीम सैयद जियाउल हसन शासकीय स्वशासी यूनानी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में देश का पहला अत्याधुनिक सरकारी 'हम्माम सेंटर' बनने जा रहा है। इस अनूठी परियोजना के लिए कॉलेज कैंपस के भीतर 3,000 वर्गफीट जमीन पहले ही पूरी तरह आरक्षित की जा चुकी है।

पारंपरिक यूनानी पद्धति से मरीजों के रोगों का इलाज करने और शरीर को अंदर से विषैले तत्वों से पूरी तरह मुक्त करने यानी बॉडी डिटॉक्स (Body Detox) के लिहाज से यह सेंटर बेहद खास साबित होगा, लेकिन विडंबना यह है कि घोषणा के चार साल बीत जाने के बाद भी यह अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लोक निर्माण विभाग (PWD) की उदासीनता और सुस्ती के चलते अब तक केवल कागजों में ही अटका हुआ है।

🚧 पीडब्ल्यूडी की डीपीआर (DPR) बनी निर्माण कार्य में सबसे बड़ी बाधा

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अब तक इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की विस्तृत 'डीपीआर' यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (Detailed Project Report) तैयार करके कॉलेज प्रबंधन को नहीं सौंपी है।

किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के लिए डीपीआर के बिना न तो टेंडर जारी किए जा सकते हैं और न ही जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। कॉलेज के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हम्माम के निर्माण और इसमें लगने वाले विशेष उपकरणों के लिए शुरुआती दौर में लगभग तीन करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। हालांकि, समय पर डीपीआर तैयार न होने और लगातार हो रही देरी के कारण अब इस पूरे प्रोजेक्ट की निर्माण लागत बढ़ने की भी पूरी आशंका जताई जा रही है। यूनानी कॉलेज में बनने वाले इस विशेष हम्माम सेंटर में देश-विदेश के गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को वैज्ञानिक और प्राचीन यूनानी चिकित्सा पद्धति के तहत विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।

⏱️ तीन अलग-अलग चरणों में पूरी होगी 90 मिनट की विशेष थेरेपी

इस पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी रूपरेखा तैयार करने वाले रीडर डॉ. महफूज उर रहमान ने जानकारी देते हुए बताया कि हम्माम की पूरी उपचार प्रक्रिया कुल 90 मिनट में संपन्न होगी।

इसके लिए तीन अलग-अलग तापमान वाले विशेष कक्ष (कमरे) तैयार किए जाएंगे:

  • पहला कमरा - कंफर्ट जोन: यह कमरा 14x14 स्क्वायर फीट का होगा, जिसकी दीवारें नौ इंच मोटी रखी जाएंगी। यहाँ का तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस रहेगा। मरीज को सबसे पहले 10 से 15 मिनट यहाँ बैठाया जाएगा ताकि उसके शरीर का तापमान सामान्य हो सके।

  • दूसरा कमरा - गर्म जोन: यह कमरा 10x12 स्क्वायर फीट का होगा। यहाँ का तापमान 36.5 से 38 डिग्री सेल्सियस रखा जाएगा। शरीर से पसीना लाने के लिए मरीज को 5 से 10 मिनट इस कमरे में रखा जाएगा।

  • तीसरा कमरा - मुख्य थेरेपी रूम: यह मुख्य कक्ष 450 से 600 स्क्वायर फीट बड़ा होगा, जिसकी दीवारें 24 इंच मोटी बनाई जाएंगी। यहाँ का तापमान 42 से 47 डिग्री और गर्म पानी का तापमान 40 से 45 डिग्री रहेगा। इस कक्ष के भीतर तीन अस्थायी चेंबर (Temporary Chambers) बनाए जाएंगे, जहाँ तीन अलग-अलग मरीजों का इलाज एक साथ तीन प्रशिक्षित सहायकों की सीधी देखरेख में किया जाएगा।

🏛️ डोम शेप डिजाइन, कॉपर पाइप और एलपीजी भट्टी की होगी विशेष व्यवस्था

इस हम्माम का अंतिम और मुख्य थेरेपी कक्ष गुंबद के आकार (Dome Shape) का होगा।

इसमें छोटे-छोटे खुलने और बंद होने वाले कांच तथा आकर्षक विशेष चित्रकारी की जाएगी, ताकि इलाज के दौरान मरीज मानसिक रूप से पूरी तरह शांत महसूस कर सके। पानी को सुरक्षित तरीके से गर्म करने के लिए बिजली के बजाय एलपीजी गैस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार के करंट या शॉर्ट सर्किट का खतरा न रहे।

इन कमरों के फर्श के ठीक नीचे तांबे (Copper) की प्लेटें लगाई जाएंगी। भाप के सुचारू और सही प्रवाह के लिए दीवारों में ऊपर से नीचे तक कॉपर के पाइप बिछाए जाएंगे। फर्श पर विशेष 'थर्मारेजिस्ट्रेंट टाइल्स' और दीवारों में 'थर्मारेजिस्ट्रेंट ब्रिक्स' (ईंटें) लगाई जाएंगी, ताकि तीव्र गर्मी और कंप्रेशन को आसानी से झेला जा सके।

इस अत्याधुनिक हम्माम सेंटर के बन जाने से मरीजों को प्राकृतिक और पारंपरिक तरीकों से शरीर को डिटॉक्स करने तथा पुरानी से पुरानी गंभीर बीमारियों से राहत पाने का एक नया और बेहतर विकल्प मिल सकेगा। यह देश के किसी भी सरकारी यूनानी कॉलेज में स्थापित होने वाली अपनी तरह की पहली अनूठी सुविधा होगी। कॉलेज प्रबंधन द्वारा पीडब्ल्यूडी विभाग को इस संबंध में औपचारिक पत्र भेज दिया गया है, और जैसे ही डीपीआर प्राप्त होगी, तुरंत टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। 

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