भारतीय घरों में जमा 31,000 टन सोना, GenZ की पसंद से चमकेगा डिजिटल गोल्ड मार्केट
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 'स्वर्णिम उड़ान 2047' रिपोर्ट के अनुसार, GenZ भारत के ₹315 लाख करोड़ के गोल्ड मार्केट को बदल रही है। जानिए कैसे बढ़ेगा डिजिटल गोल्ड।
देश का युवा वर्ग, जिसे मौजूदा समय में GenZ (जनरेशन जी) के नाम से संबोधित किया जा रहा है, वह हर क्षेत्र में नए इतिहास रचने को तैयार है। शेयर बाजार में इस जेनरेशन की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी हो चुकी है, और अब बारी देश के विशाल गोल्ड मार्केट की है।
पारंपरिक रूप से भारत में सोना खरीदना शादी-ब्याह, त्यौहारों या बुजुर्गों की बचत से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन अब देश की नई पीढ़ी इस सोच को पूरी तरह बदल रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं का डिजिटल-फर्स्ट नजरिया और बदलता लाइफस्टाइल भारत के ₹315 लाख करोड़ के विशाल गोल्ड मार्केट में खपत और निवेश की एक नई क्रांति लाने के लिए तैयार है।
📱 खुल सकता है ₹315 लाख करोड़ का मार्केट: 'स्वर्णिम उड़ान 2047' रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
भारत में सोने की अगली बड़ी लहर ज्वेलरी की दुकानों से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन से शुरू हो सकती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की जारी ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल रूप से जागरूक ‘GenZ’ के सबसे तेजी से बढ़ते कंज्यूमर ग्रुप के तौर पर उभरने के साथ ही, देश के पास अपने गोल्ड इकोसिस्टम को आधुनिक बनाने का शानदार मौका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, GenZ (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) सोने को सिर्फ पुश्तैनी गहनों के तौर पर नहीं, बल्कि एक फ्लेक्सीबल फाइनेंशियल एसेट (Financial Asset) के तौर पर देखते हैं। इससे डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) और टेक्नोलॉजी पर आधारित दूसरे इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में उनकी दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। उम्मीद है कि 2035 तक यह ग्रुप कंज्यूमर खर्च में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देगा।
🏠 भारतीय घरों में जमा है 31,000 टन सोना: अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा मौका
भारत में घरों में जमा भारी मात्रा में सोना देश की सबसे बड़ी फाइनेंशियल एसेट्स में से एक है।
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31,000 टन सोना: रिपोर्ट का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 31,000 टन से ज्यादा सोना जमा है, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹314.9 लाख करोड़ ($3.4 ट्रिलियन) है।
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प्रोडक्टिव कैपिटल में बदलाव: अगर इस निष्क्रिय सोने का एक छोटा सा हिस्सा भी फाइनेंशियल मार्केट में लाया जाए, तो लिक्विडिटी बढ़ सकती है, कैपिटल फॉर्मेशन बेहतर हो सकता है और इम्पोर्टेड बुलियन पर निर्भरता कम हो सकती है।
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इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम: रिपोर्ट ने गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रीसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग को आपस में जोड़ने का सुझाव दिया है।
💎 ₹4.5 लाख करोड़ का ज्वेलरी मार्केट: बदल रही है खरीदारों की पसंद
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत का गोल्ड ज्वैलरी मार्केट एक अहम मोड़ पर खड़ा है। हालांकि खरीदारी के फैसलों में परंपरा और भरोसा अब भी अहम हैं, लेकिन ऑर्गनाइज्ड रिटेल, अनिवार्य हॉलमार्किंग और ग्राहकों की बदलती उम्मीदें मांग को नया रूप दे रही हैं।
युवा खरीदारों को आकर्षित करने के लिए ज्वैलर्स को डिजाइन इनोवेशन, कस्टमाइजेशन और ओमनीचैनल रिटेल (Omnichannel Retail) अनुभव पर ज़्यादा ध्यान देना होगा ताकि फिजिकल और डिजिटल दोनों माध्यमों से ग्राहकों को जोड़ा जा सके।
🚢 कम हो सकती है सोने के आयात पर निर्भरता: वित्तीयकरण पर जोर
रिपोर्ट में भारत के गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'फाइनेंशियलइजेशन' (वित्तीयकरण) को मुख्य स्तंभ माना गया है। इसके साथ ही:
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घरेलू माइनिंग को बढ़ावा देना
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ज्वेलरी एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी करना
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सोने को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के तौर पर मान्यता देना
इन उपायों से आयात पर निर्भरता कम होगी, बाजार की कार्यक्षमता बेहतर होगी और सोना भारत की लंबी अवधि की इकोनॉमिक ग्रोथ में मजबूत योगदानकर्ता बनेगा।
🏛️ 'नेशनल गोल्ड बोर्ड' के गठन का सुझाव: WGC इंडिया के CEO का बयान
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत में रीजनल CEO सचिन जैन ने कहा कि इस रिपोर्ट की सिफारिशों के केंद्र में ‘नेशनल गोल्ड बोर्ड’ का गठन है।
यह बोर्ड गोल्ड वैल्यू चेन में पॉलिसी को-ऑर्डिनेशन के लिए शीर्ष संस्था के तौर पर काम करेगा। इसके साथ ही, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए एक ‘गोल्ड इनोवेशन सेंटर’ बनाने का भी प्रस्ताव है। यह संस्थाएं भारत के असंगठित गोल्ड सेक्टर को एक आधुनिक और इनोवेशन-आधारित इंडस्ट्री में बदलने में उत्प्रेरक (Catalyst) का काम करेंगी।
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