मुख्य आरोपी प्यारे मियां के बयान दर्ज करने की तारीख तय, अभियोजन पक्ष के सभी साक्ष्य प्रस्तुत
भोपाल के बहुचर्चित प्यारे मियां सामूहिक दुष्कर्म और बाल यौन शोषण मामले में अभियोजन साक्ष्य समाप्त हो गए हैं। न्यायालय ने 7 अगस्त को आरोपी के बयान दर्ज करने की तारीख तय की है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी के सबसे बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म और बाल यौन शोषण प्रकरण में अब न्यायिक प्रक्रिया तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) कुमुदिनी पटेल की विशेष अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से अपने सभी गवाहों के बयान और पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य सफलताપूरक पेश कर दिए गए हैं।
अभियोजन के साक्ष्य समाप्त होने के बाद अब न्यायालय ने इस मामले के मुख्य आरोपी प्यारे मियां उर्फ अब्दुल अय्यूब के बयान दर्ज करने के लिए आगामी सात अगस्त की तारीख तय की है।
इस महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब अदालत आरोपी से उसके खिलाफ कोर्ट में पेश किए गए तमाम साक्ष्यों और गंभीर आरोपों पर स्पष्टीकरण लेगी। इसके पश्चात, बचाव पक्ष (डिफेंस) यदि चाहेगा तो वह अपने समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करेगा। दोनों पक्षों की ओर से अंतिम बहस (Final Arguments) पूरी होने के बाद माननीय न्यायालय द्वारा इस सनसनीखेज मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
🛑 क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ था खुलासा?
जुलाई 2020 में भोपाल के शाहपुरा स्थित विष्णु हाईटेक सिटी के एक फ्लैट में नाबालिग बालिकाओं के साथ यौन शोषण की गंभीर शिकायत सामने आने के बाद यह पूरा काला सच उजागर हुआ था।
पुलिस जांच के दौरान यह चौंकाने वाले आरोप सामने आए थे कि मुख्य आरोपी प्यारे मियां ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर भोपाल और इंदौर के विभिन्न इलाकों में कई नाबालिग मासूम बालिकाओं को अपने जाल में बहला-फुसलाकर फंसाया था। उनके साथ दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौनाचार जैसी घिनौनी वारदातों को अंजाम दिया गया था।
चार्जशीट (आरोप-पत्र) के अनुसार, पीड़िताओं को डरा-धमकाकर अश्लील वीडियो दिखाने, उनके देह शोषण के लिए इस्तेमाल करने, मानव तस्करी (Human Trafficking) जैसी गंभीर गतिविधियों में शामिल होने तथा एक अनुसूचित जाति की पीड़िता के साथ अत्याचार करने के पुख्ता आरोप भी दर्ज किए गए थे।
इस संगीन मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं जैसे 376, 376(2)(एन), 376-डीए, 377, 366-ए, 370, 354 के अलावा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और किशोर न्याय (Juvenile Justice) अधिनियम के तहत सख्त प्रकरण दर्ज कर अपनी चार्जशीट विशेष न्यायालय में प्रस्तुत की थी। अब अभियोजन के साक्ष्य पूरे होने के बाद आगामी सात अगस्त को होने वाली इस अगली सुनवाई पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
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