सांदीपनि सीएम राइज स्कूल के छात्रों का दर्द, बस न मिलने पर 3 किमी पैदल चलने को मजबूर
मंदसौर के मल्हारगढ़ में सांदीपनि सीएम राइज स्कूल के छात्र बस सुविधा न मिलने के कारण रोज 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
मंदसौर। राज्य शासन द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके 'सांदीपनि सीएम राइज स्कूल' जैसी आधुनिक योजना की कल्पना की गई है। इस योजना के तहत पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए बसों की विशेष व्यवस्था भी की गई है, लेकिन धरातल पर लापरवाही का आलम यह है कि छात्रावास में रहने वाले मासूम विद्यार्थी रोज 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल आने-जाने को विवश हैं। स्थिति यह है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने में ही रोजाना दो कीमती घंटे बर्बाद हो रहे हैं, जिसका सीधा और बुरा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।
एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, तो दूसरी तरफ स्थानीय स्कूल प्रबंधन की उदासीनता और लापरवाही का भारी खामियाजा सीधे तौर पर इन विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी इन नौनिहालों के भविष्य के साथ ऐसा अन्याय क्यों कर रहे हैं?
🏫 सांदीपनि सीएम राइज स्कूल में पढ़ रहे हैं बालक छात्रावास के लगभग 30 छात्र
मल्हारगढ़ से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित नारायणगढ़ मार्ग पर बने महाविद्यालय के पास अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास संचालित होता है। इसी छात्रावास में रहकर मल्हारगढ़ स्थित सांदीपनि सीएम राइज स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 30 छात्र निवास करते हैं।
इन विद्यार्थियों का मुख्य दर्द यह है कि प्रतिदिन स्कूल की बसें ठीक उनके छात्रावास के सामने से ही गुजरती हैं, लेकिन चालक या संबंधित प्रबंधन उन्हें उन बसों में बैठने की अनुमति नहीं देता है। इसके विपरीत, पास ही स्थित कन्या छात्रावास की बालिकाओं को स्कूल लाने के लिए बसें बाकायदा लेने भी जाती हैं और सुरक्षित वापस छोड़ने भी आती हैं। बालकों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है, इसका कोई संतोषजनक जवाब जिम्मेदार अधिकारियों के पास नहीं है।
⚠️ तीन किलोमीटर का पैदल सफर और सड़क पार करते समय हादसों का गंभीर डर
इन विद्यार्थियों को रोज सुबह आने के लिए 3 किलोमीटर और शाम को वापस लौटने के लिए 3 किलोमीटर यानी कुल 6 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त ये बच्चे पैदल सड़क पर चलते हैं, उसी समय स्कूल की बसें भी उसी मार्ग से आती-जाती हैं।
इस गंभीर मामले पर जब विवाद और रोष बढ़ने लगा, तब जाकर अब स्कूल प्रबंधन की तरफ से यह रटा-रटाया बयान सामने आ रहा है कि वे जल्द ही इसके लिए कोई उचित व्यवस्था करेंगे।
इन तीन किलोमीटर के लंबे और जोखिम भरे पैदल सफर के दौरान मासूम विद्यार्थियों को हर पल सड़क हादसों का भारी डर सताता रहता है। मल्हारगढ़ बस स्टैंड के पास उन्हें मुख्य फोर-लेन मार्ग भी पार करना पड़ता है, जहाँ तेज रफ्तार वाहनों के बीच से गुजरना बच्चों के लिए किसी बड़े खतरे से खाली नहीं होता है।
🌧️ बारिश में भीगते हैं स्कूल बैग, जिम्मेदार बने हुए हैं पूरी तरह मूकदर्शक
मौजूदा बरसात के मौसम में इन बच्चों की मुसीबतें और अधिक बढ़ गई हैं। बारिश के दौरान स्कूल जाते समय उनके बस्ते, किताबें, कॉपियां और उनके खुद के कपड़े पूरी तरह गीले हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और स्कूल प्रबंधन इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं।
पीड़ित छात्रों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि, "वे रोज सुबह 9:30 बजे अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित सांदीपनि विद्यालय में पैदल पढ़ने के लिए निकलते हैं।"
अकेले स्कूल पहुँचने में ही उनका पूरा 1 घंटा पैदल चलते-चलते निकल जाता है, और लगभग इतना ही समय शाम को वापस छात्रावास लौटने में बर्बाद होता है। बारिश की वजह से उनकी पाठ्यपुस्तकें और कॉपियां भी खराब होने के कगार पर पहुँच चुकी हैं।
🚌 छात्रों और स्थानीय लोगों की मांग: प्रशासन तुरंत उपलब्ध कराए बस सेवा
नारायणगढ़ मार्ग पर स्थित इस छात्रावास के 25 से 30 छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए रोज नारकीय स्थिति से गुजर रहे हैं। शिक्षा के नाम पर इन बच्चों के दो घंटे व्यर्थ ही बर्बाद हो रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक और भारी शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है।
अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन इन छात्रों के साथ हो रहे इस अन्याय को तुरंत बंद करें और इन बच्चों के लिए छात्रावास के पास से ही नियमित बस सेवा उपलब्ध कराएं।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कूल प्रबंधन का कहना है कि, "अभी छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए बस में अलग से पर्याप्त जगह नहीं बच पाती है क्योंकि जो बसें आ रही हैं वे पहले से भरी होती हैं, लेकिन हम एक-दो दिन के भीतर ही एक अन्य अतिरिक्त बस की व्यवस्था करने जा रहे हैं जिससे सभी विद्यार्थी आसानी से आ-जा सकें।"
वहीं, दूसरी तरफ छात्रों का साफ कहना है कि स्कूल आने के लिए उनके पास कोई दूसरा साधन नहीं है, बसें उनके लिए रुकती नहीं हैं, और वे मजबूरी में बारिश और हादसों के साये में पैदल ही आवागमन करने को मजबूर हैं।
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