ऊफनती बेतवा नदी पार कर स्कूल जाते बच्चों का वीडियो वायरल होने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस
विदिशा में उफनती बेतवा नदी के पिलरों से कूदकर स्कूल जाने वाले बच्चों के वायरल वीडियो पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने सरकार और कलेक्टर को नोटिस जारी किया है।
जबलपुर: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की गुलाबगंज तहसील से एक बेहद चिंताजनक और खतरनाक तस्वीर सामने आई थी, जहाँ छोटे-छोटे स्कूली बच्चे उफनती बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के पिलरों पर कूद-कूदकर अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर थे। छात्र-छात्राओं के इस खतरनाक तरीके से नदी पार करने से जुड़ी प्रकाशित खबर का मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले की सुनवाई एक जनहित याचिका (PIL) के रूप में करते हुए सभी संबंधित अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
🌊 जान जोखिम में डालकर ऊफनती बेतवा नदी पार कर रहे थे स्कूली बच्चे
समाचार पत्रों और मीडिया में प्रकाशित खबर में यह दर्शाया गया था कि किस प्रकार स्कूली छात्र-छात्राएं बेतवा नदी में बने स्टॉप डैम के 9 खुले पिलरों का उपयोग रोजाना स्कूल आने-जाने के लिए कर रहे हैं। शासकीय हाई स्कूल पलोह तक पहुँचने के लिए इन मासूम बच्चों को अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती थी।
यदि वे इस रास्ते के बजाय सुरक्षित सड़क मार्ग का उपयोग करते, तो उन्हें घूमकर 10 से 15 किलोमीटर का लंबा अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता था, जिसके चलते उन्होंने यह जानलेवा शॉर्टकट अपना रखा था।
🏛️ युगलपीठ के समक्ष सरकार ने दी सफाई, कहा- वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है
सुनवाई के दौरान युगलपीठ को शासन की तरफ से पैरवी करते हुए बताया गया कि किरमची बंधेरा के माध्यमिक स्कूल को अपग्रेड करके हाई स्कूल में तब्दील करने का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय को पहले ही भेजा जा चुका है।
इसके अलावा वर्तमान में उस स्कूल को अस्थायी तौर पर हाई स्कूल के रूप में संचालित कर दो शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी गई है। साथ ही, स्टॉप डैम के दोनों तरफ सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग कर दी गई है और वहाँ एक चौकीदार की भी तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों की एक टीम द्वारा भी मौके का निरीक्षण किया जा चुका है।
⚖️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: "दो शिक्षकों से कैसे होगी पढ़ाई?"
सरकार का पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने इस व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि, "अस्थाई तौर पर बनाए गए इस स्कूल में मात्र दो शिक्षक आखिर सभी विषयों की पढ़ाई कैसे करा सकते हैं? इससे निश्चित रूप से विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा।"
इस गंभीर मामले में अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा को 'कोर्ट मित्र' (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। कोर्ट ने इन दोनों अधिवक्ताओं से नदी पर नया पुल बनाने या स्टॉप डैम के ऊपर आवागमन के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करने के संबंध में बहुमूल्य सुझाव मांगे हैं।
📋 मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी और विदिशा कलेक्टर को नोटिस, 21 सितंबर को अगली सुनवाई
युगलपीठ ने इस पूरे मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव (Chief Secretary), लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव और विदिशा जिले के कलेक्टर को औपचारिक नोटिस जारी कर संपूर्ण स्टेटस रिपोर्ट के साथ अपना जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए आगामी 21 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
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