एक गोत्र में विवाह पर FIR, बड़वानी में कुशवाह समाज का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
बड़वानी में एक ही गोत्र में विवाह के विवाद पर दर्ज FIR के खिलाफ कुशवाह समाज ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। समाज ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।
बड़वानी : मध्य प्रदेश के बड़वानी में कुशवाह समाज सड़कों पर उतर आया है। यहां राजपुर थाना क्षेत्र में विवाह से जुड़े विवाद को लेकर दर्ज एफआईआर (FIR) के विरोध में बुधवार को समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, महिलाओं और बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने एफआईआर पर सवाल उठाए और मनमानी कार्रवाई करने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। यह पूरा विवाद दो पक्षों द्वारा एक ही गोत्र (Same Gotra) में विवाह करने को लेकर जुड़ा हुआ है।
💍 एक गोत्र में विवाह करने पर विवाद, समाज ने बताई अपनी बात
समाज के पदाधिकारियों के मुताबिक यह पूरा मामला राजपुर निवासी महेंद्र लोणारे के परिवार से जुड़े एक विवाह का है। इस विवाह में युवक और युवती एक ही कुल और गोत्र के होने के कारण समाज ने अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप विवाह की लिखित अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। समाज का दावा है कि दोनों पक्षों को पहले ही समाज के नियमों और निर्णय से अच्छी तरह अवगत करा दिया गया था, इसके बावजूद 1 मई 2026 को दोनों ने स्वेच्छा से विवाह कर लिया। इसके बाद समाज के पदाधिकारियों पर युवक-युवती का बहिष्कार करने के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
🚫 विवाह का विरोध नहीं किया, न किसी का बहिष्कार : कुशवाह समाज
सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने स्पष्ट किया है कि विवाह के दौरान या उसके बाद किसी प्रकार का विरोध, हंगामा या कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। समाज का कहना है कि संबंधित परिवार ने विवाह से पहले ही स्वेच्छा से समाज की सदस्यता समाप्त कर दी थी। ऐसे में सामाजिक बहिष्कार, निष्कासन या समाज की ओर से किसी प्रकार के दबाव का प्रश्न ही नहीं उठता। कुशवाह समाज ने यह भी कहा कि उनके निर्णय केवल सामाजिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लिए गए थे, जिनका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना बिल्कुल नहीं था।
⚖️ गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कुशवाह समाज के रमेश चंद्र ने कहा, "पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 351(2) के तहत दर्ज एफआईआर पर हमने कड़ा विरोध जताया है। न तो किसी व्यक्ति से फिरौती या आर्थिक दंड वसूला गया और न ही किसी प्रकार की धमकी दी गई। यदि समाज संचालन के लिए किसी सहयोग राशि का उल्लेख हुआ भी था, तो वह पूरी तरह स्वैच्छिक व्यवस्था का हिस्सा था, जिसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।"
समाज का आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त जांच, बिना तथ्यों के सत्यापन और बिना समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का पक्ष जाने ही इतनी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर दिया, जिससे पूरे समाज की छवि धूमिल हुई है।
📜 संविधान ने परंपराओं के पालन का अधिकार दिया, FIR निरस्त करने की मांग
ज्ञापन में कुशवाह समाज ने कहा, "भारतीय संविधान प्रत्येक समुदाय को अपनी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का पालन करने का अधिकार देता है। हमने उसी संवैधानिक दायरे में रहकर अपना सामाजिक निर्णय लिया था, लेकिन इसे गलत तरीके से आपराधिक स्वरूप देकर एफआईआर दर्ज कर दी गई।"
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (SP) से भी मुलाकात कर शहर कोतवाली में अपना ज्ञापन सौंपा। समाज ने पुलिस की कार्रवाई को एकपक्षीय बताते हुए दर्ज एफआईआर को तुरंत निरस्त करने, पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और बिना जांच के प्रकरण दर्ज करने वाले राजपुर थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।
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