महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली स्मार्ट सिटी की महत्वाकांक्षी योजना अटकी, जानें क्या है वजह
ग्वालियर स्मार्ट सिटी के 'निर्भया कैफे' प्रोजेक्ट का टेंडर पूरा होने के बावजूद जगह फाइनल नहीं हो पाने के कारण काम अटक गया है। इस योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाना है।
ग्वालियर: ग्वालियर में विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्वालियर स्मार्ट सिटी ने 'निर्भया कैफ़े' प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। शक्ति दीदी योजना की तर्ज पर शहर के अलग-अलग स्थानों पर कुल 10 निर्भया कैफ़े खोले जाने थे, जहाँ इन महिलाओं को अपने खुद के व्यावसायिक प्रतिष्ठान शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का सुनहरा मौक़ा मिलता। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह बेहद उपयोगी परियोजना अपने शुरुआती चरण में ही प्रशासनिक पेंच में फंसकर अटक गई है। हालांकि इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन अब तक इन कैफ़े के निर्माण के लिए उपयुक्त जगह का चयन नहीं कर सकी है।
👩💼 अधर में लटकी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह अनूठी योजना
निर्भया कैफे प्रोजेक्ट विधवा, निराश्रित और पीड़ित महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने की एक ऐसी अनूठी पहल है, जिसकी शुरुआत संभवतः देश में पहली बार ग्वालियर से ही की जा रही है। जिस पर स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन द्वारा कार्य किया जा रहा है। ग्वालियर शहर में कुल 10 निर्भया कैफ़े शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन यह पूरी परियोजना शुरुआती चरण में ही इसलिए अटक गई है क्योंकि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण एजेंसी का तो चयन कर लिया गया, मगर यह तय नहीं हो पाया कि इन कैफ़े का निर्माण आखिरकार किस जगह पर किया जाना है। यही वजह है कि अब तक निर्भया कैफे का निर्माण कार्य जमीन पर शुरू नहीं हो पा रहा है।
🤝 सिर्फ महिलाओं के हाथों में होगा कैफ़े के संचालन का पूरा जिम्मा
ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर और स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के इंचार्ज संघ प्रिय ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, "इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत शहर में कुल 10 निर्भया कैफ़े बनाए जाएंगे। इसके लिए जो वित्तीय मॉडल तैयार किया गया है, उसके तहत कुल लागत की तीस प्रतिशत राशि स्मार्ट सिटी द्वारा दी जाएगी, जबकि शेष 70 प्रतिशत राशि इच्छुक वेंडर द्वारा लगाई जाएगी। इन सभी कैफ़े का संचालन पूरी तरह से सिर्फ महिलाओं के द्वारा ही किया जाएगा।"
🛡️ एक खास उद्देश्य के तहत दिया गया 'निर्भया कैफ़े' नाम
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के मुताबिक, "महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और महिलाओं को समाज में मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से यह प्रोजेक्ट लाया गया है, इसलिए इसे 'निर्भया कैफे' नाम दिया गया है। जो भी फर्म इसका संचालन करेगी, वह इस बात के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगी कि वह रोजगार के लिए किन महिलाओं को आगे बढ़ाती है। वे महिलाएं निराश्रित, विधवा, दिव्यांग या कोई दुष्कर्म पीड़िता भी हो सकती हैं, लेकिन संचालन का पूरा जिम्मा महिलाओं के हाथों में ही होना अनिवार्य है।"
💰 एक करोड़ रुपए है कुल प्रोजेक्ट की लागत, स्मार्ट सिटी लगाएगा सिर्फ 30 प्रतिशत
इस योजना के प्रावधानों के अनुसार, एक कैफ़े के निर्माण में लगभग 10 लाख रुपए की लागत आएगी। इसमें से 3 लाख रुपए ग्वालियर स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन और 7 लाख रुपए संबंधित वेंडर द्वारा लगाए जाएंगे।
ग्वालियर में ऐसे कुल 10 कैफ़े स्वीकृत हैं, जिसके तहत यह लगभग 1 करोड़ रुपए का बड़ा प्रोजेक्ट है। फरवरी 2026 में इसके लिए वेंडर आमंत्रित किए गए थे, जिनमें तीन फर्मों ने अपने टेंडर भरे थे। इनमें से दो फर्मों के टेंडर तकनीकी कारणों से रिजेक्ट हो गए और आखिरकार एक पात्र फर्म को निर्भया कैफ़े के निर्माण का ठेका मिल चुका है। स्मार्ट सिटी द्वारा संबंधित फर्म को लेटर ऑफ़ एलोकेशन (LOA) भी जारी किया जा चुका है।
🏛️ शासकीय परिसरों में शुरू होने थे कैफ़े, लेकिन जगह को लेकर फंसा पेंच
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खामी यह सामने आ रही है कि अब तक इन कैफ़े के लिए कोई भी जमीन या स्थान निश्चित नहीं हो पाया है। स्मार्ट सिटी प्रशासन ने शहर के भीतर लगभग एक दर्जन ऐसे स्थानों को चिह्नित किया था, जो सभी शासकीय (सरकारी) परिसर हैं।
इसके पीछे मुख्य सोच यह थी कि शासकीय स्थानों पर आम जनता और कर्मचारियों का आवागमन अधिक रहता है, जिससे ऑफिस टाइमिंग के दौरान इन निर्भया कैफ़े में आसानी से स्वल्पाहार (नाश्ता) मिल सकेगा और इससे महिलाओं की आमदनी में भी इजाफा होगा।
❌ इन परिसरों का हुआ था चयन, लेकिन संस्थानों ने खड़े किए हाथ
ग्वालियर स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन ने निर्भया कैफे के निर्माण और संचालन के लिए ग्वालियर के संभागीय आयुक्त कार्यालय, स्मार्ट सिटी कार्यालय, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक एक, जिला अस्पताल, एमएलबी कॉलेज, जीडीए मुख्यालय, जीवाजी यूनिवर्सिटी, पद्म विद्यालय और साइंस कॉलेज जैसे प्रमुख परिसरों को चिह्नित किया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर संस्थाओं ने अपने परिसरों में जगह देने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि कुछ अन्य संस्थानों ने अब तक इस प्रस्ताव पर कोई जवाब ही नहीं दिया है। यही वजह है कि निर्भया कैफ़े के निर्माण को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति लगातार बनी हुई है।
हालांकि, ग्वालियर स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है, लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि जिन स्थानों को चिह्नित करने में इतना लंबा वक्त लग रहा है, वहाँ कैफ़े का निर्माण कब तक संभव हो पाएगा।
📌 मुख्य बिंदु: क्या है 'निर्भया कैफ़े' परियोजना और क्यों अटकी?
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परियोजना का स्वरूप: यह ग्वालियर स्मार्ट सिटी की एक अनूठी महिला-केंद्रित पहल है।
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विशेषता: इन कैफ़े का संचालन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाएगा, जो उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा।
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भागीदारी: यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी और इच्छुक वेंडर की पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर आधारित है।
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मुख्य बाधा: टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद शासकीय परिसरों से अनुमति न मिलने और जगह फाइनल न होने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।
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