Ujjain: जून 2027 तक पूरे होंगे सभी जल परियोजनाएं, नगर को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

Aug 22, 2025 - 23:04
Aug 22, 2025 - 23:07
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Ujjain: जून 2027 तक पूरे होंगे सभी जल परियोजनाएं, नगर को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

उज्जैन:- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन में बड़े पैमाने पर विकास कार्य जारी हैं। शुक्रवार को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार जल संसाधन विभाग की सभी परियोजनाएं जून 2027 तक पूरी कर ली जाएंगी।

सिंहस्थ से मिलेगा उज्जैन को नया स्वरूप

निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट ने कहा कि सिंहस्थ-2028 मध्य प्रदेश के लिए स्वर्णिम अवसर है। इससे उज्जैन को विश्व स्तर पर नई पहचान मिलेगी। कान्ह डक्ट जैसी परियोजना शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाएगी और क्षिप्रा नदी स्वच्छ व निर्मल रूप में प्रवाहित होगी।

घाटों पर एक दिन में 5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की तैयारी

वर्तमान में क्षिप्रा नदी पर लगभग 30 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। लगभग 778.91 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इन घाटों से सिंहस्थ के दौरान एक ही दिन में 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे।

2400 करोड़ की जल परियोजनाएं निर्माणाधीन

जल संसाधन मंत्री ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के लिए जल संसाधन विभाग की 2400 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें

कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना (लगभग 919.94 करोड़ रुपये), जिसके तहत कान्ह नदी का दूषित जल 18.5 किमी कट/कवर और 12 किमी टनल बनाकर शहर की सीमा से बाहर ले जाया जाएगा।

सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना (लगभग 614.53 करोड़ रुपये), जिसके तहत बैराज और जलाशय बनाकर क्षिप्रा में निर्मल जल प्रवाहित किया जाएगा।

9 बैराज और कालियादेह स्टॉप डेम का निर्माण

सिंहस्थ के दौरान क्षिप्रा को अविरल जल उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन, इंदौर और देवास जिलों में कुल 9 बैराजों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा कालियादेह स्टॉप डेम की मरम्मत का काम भी नगर निगम द्वारा कराया जा रहा है।

मजदूरों से की चर्चा, गुणवत्ता पर दिया जोर

निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट और प्रभारी मंत्री टेटवाल टनल के अंदर भी पहुंचे। बाहर निकलने के बाद मंत्रियों ने “भारत माता की जय” के नारे लगाए। उन्होंने मजदूरों से चर्चा कर उनकी समस्याएं जानीं और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

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